तेलंगाना के ग्रेटर हैदराबाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने बुधवार (23 सितंबर) को NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के कैंपस में उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'प्रिजनर नंबर 626710' की बिना इजाजत स्क्रीनिंग की कड़ी निंदा की है. छात्र संगठन ने कहा कि यह फिल्म एक ऐसे व्यक्ति के बारे में है, जो JNU के विरोध प्रदर्शनों, अफजल गुरु की याद में हुए कार्यक्रमों, CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों और दिल्ली दंगों से जुड़े विवादों में शामिल रहा है.

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ABVP का कहना है कि स्क्रीनिंग के लिए शैक्षणिक परिसर का इस्तेमाल करने से यह सवाल उठता है कि क्या परिसरों को सीखने और रचनात्मक बहस के केंद्रों के बजाय राजनीतिक प्रचार के मंच में बदला जा रहा है.

ABVP ने NALSAR के वाइस-चांसलर को सौंपा ज्ञापन

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ABVP के बयान के अनुसार, मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि NALSAR प्रशासन ने इस कार्यक्रम को मंजूरी नहीं दी थी और यूनिवर्सिटी अधिकारियों की ओर से कोई अनुमति नहीं दी गई थी. संगठन ने कहा कि इससे एक प्रमुख राष्ट्रीय लॉ यूनिवर्सिटी में बिना मंजूरी वाले कार्यक्रम के आयोजन पर गंभीर सवाल उठते हैं. ABVP ने NALSAR के वाइस-चांसलर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है. हालांकि, संगठन का कहना है कि उसे अब तक वाइस-चांसलर से कोई जवाब नहीं मिला है. 

छात्र संगठन ने उन हालात की सख़्त और पारदर्शी जांच की मांग की है जिनकी वजह से बिना मंजूरी के स्क्रीनिंग हो सकी. इसने यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई, वाइस-चांसलर को सौंपे गए ज्ञापन पर जवाब और भविष्य के कार्यक्रमों को यूनिवर्सिटी के नियमों, कानूनी जरूरतों और शैक्षणिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए गाइडलाइंस की भी मांग की है.

संवेदनशील विषयों पर कार्यक्रम आयोजित करने पर खड़े हुए सवाल

संगठन ने कहा कि वह उन गतिविधियों के बारे में चिंता जताना जारी रखेगा, जो उसकी नजर में शैक्षणिक संस्थानों की गरिमा और शैक्षणिक उद्देश्य के अनुरूप नहीं हैं. इस घटना ने अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषयों पर कार्यक्रम आयोजित करने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

जहां ABVP ने स्क्रीनिंग को यूनिवर्सिटी के नियमों का उल्लंघन माना है, वहीं दूसरों का तर्क है कि लॉ यूनिवर्सिटी ही वे जगहें हैं, जहां ऐसी चर्चाएं होनी चाहिए. NALSAR प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. ABVP की ओर से सौंपे गए ज्ञापन और उनकी मांगों पर यूनिवर्सिटी विचार कर रही है, इसलिए आगे की जानकारी का इंतजार है. 

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