तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों और विधायकों को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रुख साफ कर दिया है. उन्होंने शुक्रवार (28 अगस्त) को कहा कि एक भी गद्दारों को पार्टी में वापस नहीं आने दिया जाएगा.

Continues below advertisement

टीएमसी स्टूडेंट विंग तृणमूल छात्र परिषद स्थापना दिवस के मौके पर कोलकाता में आयोजित रैली में अभिषेक बनर्जी ने कहा, ''इस मामले हालांकि पर आखिरी फैसला हमारी सुप्रीम लीडर ममता बनर्जी का है, लेकिन मैं पूरे यकीन के साथ कहता हूं कि एक भी गद्दार जो TMC के राज में फला-फूला और इस मुश्किल समय में अपनी पीठ बचाने के लिए हमारे वर्कर्स का हाथ छोड़कर चला गया उसे पार्टी में वापस नहीं आने दिया जाएगा." 

क्यों अहम है अभिषेक बनर्जी का बयान?

Continues below advertisement

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उन्होंने कहा, "जो लोग खुद को बचाने के लिए उस गुट में शामिल हो गए और अब BJP से फायदे उठा रहे हैं उन्हें भविष्य में हमसे कोई छूट नहीं मिलेगी." अभिषेक बनर्जी यह बयान ऐसे समय में दिया है जब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने हाल ही में 20 बागी TMC सांसदों को नोटिस भेजा है और जवाब मांगा है. अब उनके रुख का इंतजार है.

काकोली घोष, सयोनी घोष, सुदीप बंधोपाध्याय, शताब्दी रॉय और यूसुफ पठान समेत 20 सांसदों ने विधानसभा चुनाव में टीएमसी को मिली हार के बाद अलग गुट बना लिया था और नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया. बाद में एनसीपीआई ने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया. ये सांसद एनडीए की बैठकों में भी शामिल हुई.

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

सांसदों ने लोकसभा में NCPI के अलग समूह के रूप में बैठने की अनुमति भी मांगी. अब तक लोकसभा में इसे मान्यता नहीं मिली है. अभिषेक बनर्जी ने विलय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.  अभिषेक बनर्जी ने याचिका में कहा है कि बागी सांसदों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए और उनकी संसद सदस्यता रद्द की जानी चाहिए.  

बनर्जी ने कहा है कि लोकसभा स्पीकर के सामने अयोग्यता की याचिकाएं लंबित होने के बावजूद अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया. उनकी याचिका पर 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और 20 सांसदों और लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल को नोटिस जारी किया.