नई दिल्ली: कल शहीद लांस नायक नाजिर अहमद वानी को अंतिम विदाई दी गई. सुपूर्द-ए-खाक के मौके पर हर किसी की आंखे नम थी. उनके पार्थिव शरीर को ताबूत में रखकर तिरंगे में लपेटकर जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में उनके पैतृक गांव अशमुजी लाया गया. इस दौरान सेना के एक अधिकारी ने बताया कि वानी सेना में शामिल होने से पहले खूंखार आतंकी थे. उन्होंने बाद में हिंसा के रास्ते को छोड़कर देश सेवा के लिए सेना में शामिल हो गए. सेना के अधिकारी ने कहा कि लांस नायक वानी के देश और अपने राज्य की शांति के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया.
वानी 25 नवंबर (रविवार) को शोपियां में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे. शोपियां मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने छह आतंकियों को मार गिराया था. जिसमें लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी शामिल थे.
नाजिर अहमद वानी 2004 में सेना में शामिल हुए थे और सेना में रहते हुए दो बार अगस्त 2017 और 2018 में सेना मेडल से सम्मानित किया गया. वानी के घर में पत्नी और दो बच्चे हैं. उन्हें कल सुपुर्द ए खाक करते समय 21 तोपों की सलामी दी गई. इस मौके पर करीब 500 से 600 लोक मौजूद थे. उनका गांव आतंकी गतिविधियों के लिए कुख्यात है. लेकिन जैसे की वानी की मौत की खबर लगी गांव में मातम छा गया. उनकी शहादत को वतन हमेशा याद रखेगा.
जम्मू-कश्मीर: कुलगाम में दो आतंकी ढेर और एक जवान शहीद, त्राल में भी मुठभेड़
