नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में भारी संख्या में तैनात सुरक्षाबलों में से अर्धसैनिक बलों की 72 कंपनियों को सरकार ने वापस बुलाने का फैसला लिया है. इनमें सीआरपीएफ की 24, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी की 12-12 कंपनियां शामिल हैं. हर एक कंपनी में 90 से 100 कर्मी मौजूद रहते हैं. घाटी में सुधरते हालात को देखते हुए 72 कंपनियों को हटाए जाने का फैसला लिया गया है. एक अधिकारी ने कहा, ''गृह मंत्रालय ने कश्मीर से अर्द्धसैनिक बलों के 7000 से अधिक जवानों की वापसी का आदेश दिया है.''

बता दें कि आज नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह ने केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के विकास मामलों और सुरक्षा स्थिति पर चर्चा करने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की. अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, केन्द्रीय गृह सचिव अजय के भल्ला, जम्मू कश्मीर के राज्यपाल जी सी मुर्मू और अन्य अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया. एक अधिकारी ने बताया, ‘‘जम्मू कश्मीर में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने के लिए बैठक बुलाई गई थी.’’

बता दें कि जुलाई के आखिरी सप्ताह में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की थी. तब विपक्षी दलों ने सवाल उठाया था कि घाटी में भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती क्यों की जा रही है. इसके बाद पांच अगस्त को मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला लिया.

सुरक्षाबलों की तैनाती जम्मू कश्मीर को मिला विशेष दर्जा वापस लिये जाने और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में विभाजित किये जाने के मद्देनजर की गई थीं. कश्मीर घाटी में कई पाबंदियां भी लागू की गई, जिन्हें बाद में धीरे-धीरे ज्यादातर इलाकों से हटा लिया गया.

गृह मंत्रालय में जम्मू-कश्मीर को लेकर अहम बैठक हुई, अमित शाह ने सुरक्षा स्थिति का लिया जायजा