पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने की अपील की है. उन्होंने कहा कि हालात बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच चुके हैं,और अब युद्ध की जगह बातचीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

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बीजिंग में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक के दौरान शी चिनफिंग ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र और पूरे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं सुधरे तो ऊर्जा सप्लाई, व्यापार और वैश्विक बाजारों पर बड़ा असर पड़ सकता है.

ईरान-इजराइल तनाव पर दुनिया की नजर

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चीन और रूस की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब ईरान और इजराइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. दोनों देशों के ईरान के साथ करीबी संबंध हैं, इसलिए दुनिया की नजर इस मुलाकात पर टिकी हुई है. माना जा रहा है कि चीन और रूस, ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने जैसे बड़े कदम से रोकने की कोशिश कर सकते हैं.

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है. अगर यह बंद होता है तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है.

ट्रंप की नीतियों पर चीन का परोक्ष हमला

बैठक के दौरान शी चिनफिंग ने बिना नाम लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि दुनिया में एकतरफा फैसले और दबाव की राजनीति फिर बढ़ रही है, जिससे वैश्विक स्थिरता प्रभावित हो रही है. चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया को टकराव नहीं बल्कि सहयोग की जरूरत है. उन्होंने चीन और रूस से मिलकर वैश्विक व्यवस्था को अधिक संतुलित और न्यायपूर्ण बनाने की अपील की.

पुतिन बोले. चीन-रूस दोस्ती पहले से ज्यादा मजबूत

बैठक के दौरान पुतिन ने शी चिनफिंग को अपना “प्रिय मित्र” बताया. उन्होंने कहा कि रूस और चीन के रिश्ते अब नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुके हैं. रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देश लगातार आपसी सहयोग बढ़ा रहे हैं और हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

रूसी मीडिया के मुताबिक, पुतिन की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच करीब 40 समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. इनमें व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और तकनीक से जुड़े कई अहम समझौते शामिल हैं.

दुनिया की राजनीति में बढ़ रहा चीन-रूस गठजोड़

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट के बीच चीन और रूस का बढ़ता तालमेल अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. दोनों देश खुद को वैश्विक राजनीति में मजबूत शक्ति के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं. पुतिन की यह चीन यात्रा काफी अहम मानी जा रही है. रूस और चीन पहले ही कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन कर चुके हैं और अब पश्चिम एशिया संकट ने दोनों देशों को और करीब ला दिया है.