नई दिल्ली: यूं तो हर एक वित्त मंत्री की पहचान महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो रखने के लिए होती है. लेकिन भारत में ऐसे बहुत से वित्त मंत्री हुए हैं जो कि आगे चलकर प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति के पद पर काबिज हुए.
पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तक कुछ ऐसे प्रधानमंत्री भी हुए हैं जो कि खुद वित्त मंत्री के तौर पर देश का बजट पेश कर चुके हैं.
जैसा कि आज यानी एक फरवरी को अरुण जेटली अपना पांचवां केंद्रीय बजट पेश करने जा रहे हैं. हम उन वित्त मंत्रियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आगे चल कर देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बने.
जवाहरलाल नेहरू
शुरुआत देश के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू से करते हैं. आज़ाद भारत में 1947 से 1964 तक प्रधानमंत्री रह चुके नेहरू ने इस पद पर रहते हुए वित्तीय वर्ष 1958-59 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया था.
भूतपूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने वित्त मंत्री के रूप में 10 बार केंद्रीय बजट पेश करने का रिकॉर्ड बनाया. देसाई ने साल 1958 से साल 1966 तक नेहरू और शास्त्री के कैबिनेट में वित्त मंत्री का काम-काज संभाला. फिर मार्च 1967 से 16 जुलाई 1969 तक उन्होंने इंदिरा गांधी के कैबिनेट में वित्त मंत्री के तौर पर सेवा दी. बाद में मोरारजी देसाई 24 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979 के बीच भारत के चौथे प्रधान मंत्री पद पर भी रहे.
इंदिरा गांधी
देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी जिन्होंने 1966-77 और 1980-84 में दो बार प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा कीं. उन्होंने 16 जुलाई 1969 से 27 जून 1970 तक वित्त मंत्री का पदभार संभाला था.
चरण सिंह
भूतपूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह वित्त साल 1979 में जनवरी से जुलाई तक सबसे कम अवधि के लिए वित्त मंत्री के पद पर रहे. उसी दौरान आगे चलकर जुलाई 1979 से जनवरी 1980 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में भी वह कार्यरत रहे. चरण सिंह के बारे में खास बात यह है कि वह बतौर प्रधानमंत्री संसद में नहीं जा सके. बाद में उन्हें पीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा.
राजीव गांधी
भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी अपनी मां के निधन के बाद 1984 से 1989 तक देश के प्रधानमंत्री रहे. उन्होंने वित्तीय वर्ष 1987-88 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया, जहां उन्होंने बतौर वित्त मंत्री रहते हुए कॉर्पोरेट टैक्स को इंट्रोड्यूस किया.
विश्वनाथ प्रताप सिंह
विश्वनाथ प्रताप सिंह ने दिसंबर 1984 से 1 जनवरी 1987 तक वित्त मंत्री के तौर पर देश को अपनी सेवा दी. बाद में वह 2 दिसंबर 1989 से 10 नवंबर 1990 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे.
इंद्र कुमार गुजराल
देश के 12वें प्रधान मंत्री इंद्र कुमार गुजराल 21 अप्रैल 1997 से 19 मार्च 1998 तक देश के प्रधानमंत्री रहे. इसके पहले वह बहुत ही कम अवधि तक यानी महज 11 दिन के लिए उन्होंने बतौर वित्त मंत्री अपनी सेवा दी.
मनमोहन सिंह
भारत के सबसे उम्दा वित्त मंत्रियों में से एक मनमोहन सिंह जिन्होंने भारत में लाइसेंस राज प्रणाली को समाप्त कर देश में उदारीकरण का रास्ता खोला था. मनमोहन सिंह साल 1991 से 1996 तक देश के वित्त मंत्री के रूप में काम किया. इसके पहले वह 1982 से 1985 तक भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर भी थे. वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल के बाद 2004 से 2014 तक यूपीए सरकार में प्रधानमंत्री के पद पर काबिज रहे.
आर वेंकटरमन
आर वेंकटरमन ने 14 जनवरी 1980 से 15 जनवरी 1982 तक वित्त मंत्री के रूप में देश की सेवा की. बतौर वित्त मंत्री रहते हुए आर वेंकटरामन ने तीन बार बजट पेश किया. बाद में वे 31 अगस्त 1984 से 24 जुलाई 1987 तक देश उपराष्ट्रपति का पदभार संभाला. फिर 25 जुलाई 1987 से 25 जुलाई 1992 तक राष्ट्रपति के रूप में देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद हासिल किया.
प्रणब मुखर्जी
वेंकटरमन की ही तरह पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी वित्त मंत्री के तौर पर अपनी सेवा दे चुके हैं. मुखर्जी जुलाई 2012 में भारत के 13वें राष्ट्रपति बने. उन्होंने 1982 से 1984 तक वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया. बाद में 2009 से 2012 तक मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार में वह वित्त मंत्री रह चुके हैं. श्री मुखर्जी ने 8 बार संसद में बजट पेश किया. मोरारजी देसाई और पी चिदंबरम के बाद वह तीसरे स्थान पर हैं जिन्होंने सबसे ज्यादा बार आम बजट पेश किया है. मोरारजी देसाई 10 बार और पी चिदंबरम 9 बार बजट पेश कर चुके हैं.
अरुण जेटली क्या वर्तमान के वित्त मंत्री अरुण जेटली भी आगे चल कर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे शीर्ष संवैधानिक पद पर रहते हुए देश की सेवा कर सकते हैं? फिलहाल तो यह आने वाला वक्त और परिस्थितियां ही तय करेंगी.