ऐसी फिल्मों के साथ दिक्कत ये होती है कि इन्हें क्राफ्ट के तौर पर जज किया जाए या फिर एजेंडा और प्रोपेगेंडा के तौर पर. इस फिल्म के मेकर्स ने पूरी कोशिश की है ये दिखाने कि ये फिल्म प्रोपेगेंडा नहीं है, लेकिन क्या वो इसमें कामयाब हो पाए. पूरा रिव्यू पढ़िए और फिर फैसला कीजिए की एजेंडा है या सच, और आपको ये फिल्म देखनी है या नहीं.
कहानी
फिल्म का नाम केरल स्टोरी है, लेकिन फिल्म में कहानी तीन राज्यों की दिखाई गई है, कोच्चि, ग्वालियरऔर जोधपुर. यहां रहने वाली तीन हिंदू लड़कियों को मुस्लिम लड़कों से प्यार हो जाता है और फिर उनके कहने पर अपना धर्म बदल लेती हैं. फिर उनके साथ होती हैं ज्यादतियां, ये सब किस तरह से होता है. ये देखने के लिए आपको थिएटर जाना पड़ेगा. कैसी है फिल्म?
फिल्म की शुरुआत में सबसे पहले डिस्क्लेमर आता है कि ये फिल्म कुछ सच्ची घटनाओं पर आधारित है. इसके बाद उन तीन लड़कियों की दर्दनाक कहानी दिखाई जाती है. फिर फिल्म खत्म होने के बाद, कुछ फैक्ट्स भी दिखाए जाते हैं, और ये बताने की कोशिश की जाती है कि ऐसा हो रहा है.
फिल्म के तौर पर ये एक ठीक-ठाक फिल्म है. पहले पार्ट से कमजोर है, कई जगह चीजों को ज्यादा खींचा गया है. बड़ा चढ़ा कर भी दिखाया गया है. कई जगह इन लड़कियों के साथ बुरा होते देख आपकी रूह कांप जाती है और आपको लगता है कि अगर ये सच है तो बड़ा घिनौना सच है. क्लाइमैक्स कुछ ज्यादा ड्रामेटिक कर दिया गया है. अब ये प्रोपेगेंडा है या नहीं, इस तरह के कैसे सामने तो जरूर आए हैं लेकिन क्या इसपर फिल्म बननी चाहिए. इसपर सबकी अपनी अपनी राय हो सकती है. आज का दर्शक खुद समझदार है.
एक्टिंग
अदिति भाटिया ने बढ़िया काम किया है. वो एक ऐसे लड़की के किरदार की अच्छे से निभा गई हैं, जिसे रील बनाकर मशहूर होना है. उल्का गुप्ता ने अच्छा काम किया है. उन्हें देखकर आपको घबराहट होती है, वो अपने किरदार को बड़े कमाल तरीके से निभा गई हैं. ऐश्वर्या ओझा ने भी अपने किरदार में जान डाल दी है. इन तीनों की एक्टिंग ही इस फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है.
राइटिंग और डायरेक्शन
विपुल शाह और अमरनाथ झा की राइटिंग अच्छी है. वो जो कहना चाहते थे कह गए. कामाख्या सिंह का डायरेक्शन बढ़िया है. कहीं कहीं फिल्म हल्की लगती है लेकिन कुल मिलाकर वो अपनी बात कह जाते हैं.
कुल मिलाकर ये फिल्म देखकर खुद तय कीजिए कि आपको ये सच लगता है या प्रोपेगेंडा
रेटिंग -2.5 स्टार्स
