Rao Bahadur Review: ये एक मेंटल सिनेमा है, तेलुगु सिनेमा में कमाल का प्रयोग
'राव बहादुर' रिलीज हो गई है. फिल्म में सत्यदेव अहम रोल में नजर आए हैं. फिल्म की स्टोरीलाइन शानदार है. आइए पढ़ते हैं फिल्म का रिव्यू.
Venkatesh Maha
Satyadev Kancharana, Deepa Thomas, Vikas Muppala
राव बहादुर एक मेंटल सिनेमा है, सत्यदेव की ये फिल्म तेलुगू सिनेमा में एक नया एक्सपेरिमेंट है. फिल्म देखकर लगा कि तेलुगू सिनेमा वालों के अंदर मलयालम सिनेमा की आत्मा आ गई है. ये फिल्म काफी एक्सपेरिमेंटल है और इसकी खूब तारीफ भी हो रही है. फिल्म बड़े स्केल पर बनाई गई है. हालांकि, थिएटर में इसे उतने दर्शक नहीं मिल रहे हैं. अभी ये हिंदी डब में उपलब्ध नहीं है, लेकिन ये फिल्म साबित करती है कि सिनेमा में अगर नए एक्सपेरिमेंट किए जाएं तो बेहतरीन फिल्में बनाई जा सकती हैं.
कहानी-
ये कहानी एक ऐसे शख्स की है जो अजीबोगरीब हरकतें करता है. वो मौत की कगार पर है और उसे लीवर कैंसर है. डॉक्टर कह चुके हैं कि वो सिर्फ चार महीने जिएगा, लेकिन वो एक साल से भी ज्यादा जिंदा रह जाता है. डॉक्टर भी इस बात से हैरान हैं. उसकी एक आखिरी ख्वाहिश है. वो जानना चाहता है कि उसका बेटा, जो अब इस दुनिया में नहीं है. क्या वाकई उसका असली बेटा था. अब वो इस सच्चाई का पता कैसे लगाएगा. यही पूरी कहानी है जिसे जानने के लिए आपको थिएटर जाना होगा.
कैसी है फिल्म?
ये एक ऐसी फिल्म है जिसके लिए "मेंटल सिनेमा" शब्द बिल्कुल फिट बैठता है, क्योंकि इसमें जो कुछ दिखाया गया है. वो आप शायद सोच भी नहीं सकते, फिल्म का हर सीन आपको अजीब और अलग महसूस होगा. आपको लगेगा कि ऐसी चीजें आपने किसी सामान्य फिल्म में पहले कभी नहीं देखी हैं. यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है. फिल्म कहीं भी लाउड नहीं होती, न ही यहां ऐसा बैकग्राउंड म्यूजिक डाला गया है जो जबरदस्ती आपको शॉक देने की कोशिश करे.
इसके बावजूद कहानी, ट्विस्ट और टर्न्स आपको लगातार बांधे रखते हैं. फिल्म की लंबाई करीब 2 घंटे 49 मिनट है और यही चीज कुछ दर्शकों को परेशान कर सकती है, लेकिन स्क्रीनप्ले इतना दिलचस्प है कि आप फिल्म के साथ जुड़े रहते हैं. फिल्म में गाने भी हैं और मुख्य किरदार अजीबोगरीब कपड़े पहनकर अनोखे अंदाज में डांस करता है, जिसे देखना भी काफी मनोरंजक लगता है. फिल्म का क्लाइमेक्स शानदार है, आखिर में आपको एक के बाद एक कई शॉक मिलते हैं और आपको महसूस होता है कि आपके पैसे वसूल हो गए. थिएटर में भले ये फिल्म बड़ी सफलता हासिल न कर पाए, लेकिन OTT पर आने के बाद इसके लिए बड़ी ऑडियंस जरूर मिलेगी.
एक्टिंग
सत्यदेव ने भुवनम रामप्पा राव बहादुर के किरदार में जान डाल दी है. उन्हें देखकर लगता है कि इस रोल के लिए उनसे बेहतर कोई और हो ही नहीं सकता था. उन्होंने हर उम्र में इस किरदार को जिस तरह निभाया है और जो अजीबोगरीब एक्सप्रेशन दिए हैं. वो कमाल के हैं, वो इस फिल्म को देखने की सबसे बड़ी वजह हैं. विकास मुपल्ला डॉक्टर अचारी के किरदार में हैं जो राव बहादुर के दोस्त हैं. उन्होंने काफी संतुलित और प्रभावशाली अभिनय किया है. दीपा थॉमस रेनुका के किरदार में अच्छी लगी हैं, जो राव बहादुर की पत्नी हैं. बाला पराशर ने अचम्मा के किरदार में खूब मनोरंजन किया है. वहीं आनंद IPS के किरदार में नजर आते हैं और उनका काम भी बढ़िया है.
राइटिंग और डायरेक्शन
इस फिल्म को वेंकटेश महा ने लिखा है और उन्होंने ही इसका निर्देशन भी किया है, राइटिंग वाकई कमाल की है, उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर कुछ अलग सोचकर लिखा जाए तो सिनेमा में नए और दिलचस्प अनुभव पैदा किए जा सकते हैं. निर्देशन भी काफी मजबूत है और फिल्म की दुनिया को उन्होंने बेहद प्रभावशाली तरीके से पेश किया है. अगर फिल्म की लंबाई थोड़ी कम होती तो ये और भी ज्यादा असरदार बन सकती थी, लेकिन इसके बावजूद ये एक जबरदस्त और यादगार फिल्म है.
कुल मिलाकर कुछ नया देखना है तो देखिए.
रेटिंग -3.5 स्टार्स.

























