Kuberaa Review: भिखारी बनकर धनुष ने दी करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस, ये कमाल फिल्म देखकर लगेगा जिंदगी में आप भी भीख मांग रहे हैं
Kuberaa Review: धनुष की फिल्म 'कुबेरा' 20 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. फिल्म में भिखारी बनकर धनुष छा गए हैं.
शेखर कम्मूला
धनुष, रश्मिका मंदाना, नागार्जुन
थिएटर
Kuberaa Review: रश्मिका मंदाना का किरदार भिखारी बने धनुष के किरदार से कहती हैं- 'मां बाप से आजादी की भीख मांगी, अपने बॉयफ्रेड(गाली देते हुए) से शादी की भीख मांगी, दोस्तों से अपने यहां रहने की भीख मांगी और अब नौकरी के लिए भीख मांग रही हूं.' हम सब अपनी जिंदगी में भीख ही मांग रहे हैं ,क्या हम भिखारी हैं? क्या हम सब भीख मांग रहे हैं?
सड़क किनारे या मंदिर के बाहर भिखारियों को देखकर हममें से कई भीख दे देते हैं,कई सोचते हैं कि इन्हें पैसे नहीं देने चाहिए. सबकी अपनी अपनी सोच है, लेकिन क्या इन भिखारियों को देखकर आपको ऐसा लगा है कि आप भी भिखारी हैं? 'कुबेरा' नाम की ये फिल्म देख लीजिए आपको ऐसा लगेगा, ये एक कमाल की फिल्म है जो एक भिखारी की नजर से कहानी दिखाती है और यही इस फिल्म की ताकत है. सबसे कंगाल इंसान इस फिल्म की कहानी की जान है.
जिम सर्भ यानि नीरज मित्रा नाम के बिजनेसमैन को पता चलता है कि बंगाल की खाड़ी में कच्चे तेल का एक खजाना है जो हजारों करोड़ का है. वो एक नेता से मिलकर उसपर कब्जा चाहता है, बदले में उसे बहुत सारे लोगों को रिश्वत देती है और इसके लिए काले धन को सफेद करना है. अब इसके लिए नीरज सीबीआई अफसर रहे नागार्जुन यानि दीपक तेज का सहारा लेता है जो एक फर्जी केस में जेल में है और बाहर आने के लिए नीरज का साथ देता है. दीपक इस काम में 4 भिखारियों का सहारा लेता है, उन्हीं में से एक भिखारी देवा यानि धनुष है.
हाल ही में साउथ की बहुत सी फिल्में काफी हौ-हल्ले के साथ आई और फुस्स साबित हुई, जो चुपके से ओटीटी पर आ रही है वो हंगामा मचा रही हैं. लेकिन ये फिल्म थिएटर में हंगामा मचाएगी, ये थिएटर में हाल में आई साउथ की एक कमाल की फिल्म है. 1 हफ्ते पहले इसका ट्रेलर आया, फिल्म की हाइप धनुष की वजह से रही और वर्ड ऑफ माउथ से हिंदी में इसके शो बढ़ने चाहिए. इस फिल्म की कहानी ठीक-ठाक है लेकिन जिस तरह एक भिखारी की नजर से ये फिल्म आपको कहानी दिखाती है वो कमाल है. ऐसा पहले कभी नहीं दिखा, फिल्म में धनुष की एंट्री होते ही माहौल बन जाता है.
धनुष ने अपने करियर का बेस्ट दिया है, उन्हें देखकर लगा ही नहीं कि वो धनुष है. उनका काम बहुत जबरदस्त है, एक भिखारी की बॉडी लैंग्वेज को, बेचारगी को धनुष ने कमाल तरीके से पर्दे पर निभाया है. धनुष एक एक फ्रेम में कमाल हैं, नागार्जुन ने काफी अच्छा काम किया है. वो काफी फ्रेश लगे हैं और उन्हें देखकर मजा आता है.
शेखर कमुल्ला और चैतन्य पिंगली ने फिल्म लिखी है और शेखर ने डायरेक्ट की है. जिस तरह से इस फिल्म को लिखा गया है वो कमाल है. एक नया नजरिया पेश किया गया है, यहां भिखारी पुष्पा या रॉकी भाई नहीं बनता. वो भिखारी ही रहता है और यही इस फिल्म की ताकत है और ये कमाल की राइटिंग की वजह से ही है. डायरेक्शन अच्छा है, फिल्म थोड़ी छोटी होती तो और मजेदार लगती.
देवी श्री प्रसाद का म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर अच्छे हैं, फिल्म के फील को और बढ़ाते हैं. कुल मिलाकर ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए




























