Raid 2 Review: कुछ फिल्में के पार्ट 2 नहीं बनने चाहिए, शायद इसलिए शोले का पार्ट 2 नहीं बनाया गया, हम आपके हैं कौन का पार्ट 2 नहीं बना. और भी कई ऐसी फिल्में हैं जो हमेशा याद रखी जाती है क्योंकि उनकी लेगेसी के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाती लेकिन बॉलीवुड के पास कहानियां का अकाल है. वो पुरानी फिल्मों के बेवजह और बेकार के अगले पार्ट्स बनाकर ही अपनी दुकान चला रहे हैं.
रेड 2 ऐसी है एक फिल्म है जिसकी कोई जरूरत नहीं थी. इस फिल्म में बार-बार आते अजय देवगन की चप्पल के क्लोज शॉट्स हैं. बेकार के गाने हैं, जग्गा जासूस बनने की कोशिश करता हीरो है, बस कुछ कमी है तो वो है रेड की. हां, रेड सिनेमा लवर्स पर जरूर पड़ी है. एक तो बेकार फिल्म, ऊपर से इसके शोज की वजह से भूतनी और हिट 3 के कम शोज. अब इसे तो सिनेमा प्रेमियों पर रेड ही कहेंगे.
कहानी
फिल्म के नाम से पता है कि रेड पड़ने वाली है. प्रोमो में दिखा दिया गया कि रितेश देशमुख पर रेड पड़ेगी. रितेश एक नेता है जिन्हें उनके इलाके के लोग पूजते हैं. उनपर रेड पड़ती है लेकिन अब पार्ट 2 बनाया है तो रेड आसान तो होगी नहीं, तो यहां भी नहीं होती और फिर रेड की जगह हीरो वही सब करता है जो अक्सर हमारे हीरो करते हैं. वो पुलिस का भी काम करता है. जासूस भी बनता है, सबूत भी इकट्ठे करता है, और एंड में तो आपको पता है कि क्या होगा तो बताने की जरूरत ही नहीं और इसमें कोई स्पॉयलर नहीं है क्योंकि ये फिल्म खुद एक स्पॉयलर है.
कैसी है फिल्म?
ये एक गैर जरूरी फिल्म है. रेड 1 एक एक्सपीरियंस थी, उसमें चौंकाने वाली बातें थी. पहली बार स्क्रीन पर ऐसा कुछ देखने को मिला था तो मजा आया था. यहां जबरदस्ती में रेड करवाने की कोशिश की जा रही है. फिल्म शुरू ही होती है कि एक बेकार सा गाना आ जाता है. पहले से बेकार फिल्म में बेकार गाना देखकर और गुस्सा आता है. फिर थोड़ी देर बाद एक और बेकार सा गाना आता है.
वैसे रेड 2 के मेकर्स ने प्रमोट भी गानों को ही किया और ये देखकर लगा कि फिल्मों के साथ साथ बॉलीवुड का म्यूजिक का टेस्ट भी खराब हो गया है. इस फिल्म में रेड बहुत कम टाइम के लिए पड़ती है. बाकी के टाइम हीरो जग्गा जासूस लगता है, चुलबुल पांडे लगता है, सब लगता है लेकिन इनकम टैक्स ऑफिसर नहीं लगता. फिल्म काफी बोरिंग और स्लो लगती है. इतनी ज्यादा प्रिडिक्टेबल है कि आप आसानी से अंदाजा लगा लेते हैं कि आगे क्या होगा. कुल मिलाकर ये फिल्म काफी ज्यादा निराश करती है.
एक्टिंग
अजय देवगन ने वैसी ही एक्टिंग की है जैसी सलमान खान ने सिकंदर में की थी. अजय की एक्टिंग में दिलचस्पी ही नहीं लगी, वो बुझे हुए से लगे. ऐसा लगा जैसे वो जबरदस्ती काम कर रहे हैं. और ऐसा पिछली कई फिल्में से लग रहा है. अजय हिंदी सिनेमा के बेहतरीन एक्टर हैं. आंखों से एक्टिंग करने वाले हीरो हैं, लेकिन पता नहीं इन दिनों वो अपने क्राफ्ट पर काम करते नहीं दिख रहे.
एक ही एक्स्प्रेशन उनकी कई फिल्मों में दिख रहा है और वो है किसी भी चीज में दिलचस्पी ना होने का, रितेश देशमुख का काम अच्छा है. वो नेगेटिव रोल में जमे हैं. फिल्म में असली रेड अमित सियाल मारते हैं. वो सबपर भारी हैं. असली इनकम टैक्स ऑफिसर अमित सियाल लगे हैं. उन्हें देखकर मजा आता है और इस फिल्म में जो थोड़ी बहुत जान है वो उन्हीं की वजह से हैं. वाणी कपूर बीच बीच में आती हैं तो याद आता है कि वो भी फिल्म में हैं. क्यों हैं. ये डायरेक्टर बता सकते हैं. सौरभ शुक्ला जैसे दिग्गज को बर्बाद कर दिया गया. रजत कपूर ठीक ठाक हैं.
राइटिंग और डायरेक्शन
इस फिल्म को पांच लोगों ने मिलकर लिखा है, रितेश शाह, राज कुमार गुप्ता, जयदीप यादव, करन व्यास और अक्षत तिवारी और फिल्म देखकर लगता है कि सबने अपना काम एक दूसरे पर डाल दिया. मतलब क्या ही लिखा है अगर ये पांचों एक बार पढ़ लेते तो शायद इस फिल्म को देखने वालों की जेब पर रेड नहीं पड़ती है. राज कुमार गुप्ता अगर ये फिल्म ना बनाते तो उन्हें रेड 1 जैसी शानदार फिल्म के लिए याद रखा जाता है लेकिन उन्होंने अपनी ही कमाल की फिल्म की लेगेसी को खराब कर दिया. उनका डायरेक्शन कहीं से दमदार नहीं लगता. कहानी में कोई ट्विस्ट एंड टर्न नहीं हैं और ना ही वो चीजों को ऐसे पेश कर पाए कि आपको चौंका पाएं.
म्यूजिक
ये अमित त्रिवेदी का म्यूजिक है, इस पर विश्वास करना मुश्किल है. आजकल फिल्मों में गाने प्रमोशन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं लेकिन यहां इतने बेकार के गाने फिल्म में डाले गए. ये और हैरानी की बात है, ये हाल में आए सबसे खराब म्यूजिक में से एक है.
कुल मिलाकर ये फिल्म आपकी जेब पर रेड ही डालेगी
रेटिंग- 2 स्टार्स
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