Subedar Review: अनिल कपूर-आदित्य रावल का कमाल का परफॉर्मेंस, कहानी की कमजोरी पर भारी पड़ी सूबेदार की सूबेदारी
अनिल कपूर की सूबेदार को आप प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं. इस फिल्म की हर तरफ चर्चा है. आइए जानते हैं कैसी बनी है फिल्म.
Suresh Triveni
Mona Singh, Anil Kapoor, Radhika Madan
एक 69 साल का हीरो...जी हां...हीरो...एक 69 साल का हीरो पर्दे पर क्या कर सकता है, ये फिल्म देखकर लगता है कि एक 69 साल का हीरो पर्दे पर वो कर सकता है जिसको सही मायने में हीरोगीरी कहते हैं. वो एक कमजोर फिल्म को भी कमाल बना सकता है, वो ऐसा कुछ कर सकता है जो उससे आधी उम्र के हीरो भी ना कर पाएं. अनिल कपूर ने इस फिल्म में यही किया है, प्राइम वीडियो पर आई इस फिल्म को देखने की सबसे बड़ी वजह अनिल कपूर हैं जिन्होंने हीरो को एक नया जीवनदान दिया है.
कहानी
ये कहानी है एक रिटायर्ड फौजी अर्जुन मौर्या की, वो एक माफिया के पास काम मागंने जाता है. पत्नी की मौत हो चुकी हैं. जवान बेटी से ज्यादा बनती नहीं है लेकिन फिर उस माफिया और इस सूबेदार के बीच कुछ ऐसा होता है कि आपको एक जबरदस्त टकराव देखने को मिलता है. इस टकराव को आप प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं.
कैसी है फिल्म
ये एक ठीक ठाक फिल्म है, फिल्म की कहानी कुछ खास नहीं है. फिल्म की कहानी का अंदाजा आपको ट्रेलर से ही लग जाता है, लेकिन इस फिल्म को देखने की सबसे बड़ी वजह से इसके कमाल के एक्टर. अनिल कपूर ने कमाल का काम किया है. उनका एक्शन, उनका इमोशन, उनका गुस्सा, आपको हैरान करता है. आपको ये बताता है कि मौका मिले तो एक 69 साल का हीरो गर्दा काट सकता है.
अनिल कपूर ने जिस शिद्दत से ये किरदार निभाया है वो काबिले तारीफ है. इस फिल्म में हीरो की हीरोगीरी जिस विलेन की वजह से चमकी वो हैं आदित्य रावल, क्योंकि हीरो की हीरोगीरी तभी चमकेगी जब विलेन मजबूत होगा. आदित्य रावल ने अपना अब तक का बेस्ट दिया है. वो बहुत खतरनाक और खौफनाक विलेन बने हैं. वो पर्दे पर एक अलग खौफ पैदा कर देते हैं.
वो अनिल कपूर जैसे मंझे हुए सीनियर एक्टर को तगड़ी टक्कर दे जाते हैं. पंचायत के प्रह्लाद चा यानि फैजल मलिक ने भी कमाल का काम किया है. सॉफ्टी नाम का उनका किरदार उनके बाकी सारे किरदारों से अलग है. वो एक ऐसे माफिया हैं जो शांत रहते हैं लेकिन जब आखिर में चिल्लाते हैं तो कहर बरसता है.
सौरभ शुक्ला ने एक बार फिर बढ़िया काम किया है. मोना सिंह का किरदार दमदार है. राधिका मदान के किरदार से लड़कियां सीख सकती हैं. कॉलेज में लड़के परेशान करते हैं तो वो उनका जिस तरह से सामना करती हैं, वो कमाल लगता है और राधिका ने ये किरदार मजबूती से निभाया है, खूशबू सुंदर छोटे से रोल में जमी हैं.
राइटिंग और डायरेक्शन
सुरेश त्रिवेणी और प्रज्जवल चंद्रशेखर की राइटिंग कमजोर है. उन्हें फिल्म में कुछ और मसाला डालना चाहिए था, कुछ सवालों को जवाब अधूरे रह जाते हैं. ये जवाब मिलने भी जरूरी थे. डायरेक्शन ठीक है. मध्य प्रदेश का फील अच्छे से क्रिएट किया गया है. फिल्म को रॉ रखा गया है. वीएफएक्स का इस्तेमाल नहीं किया गया, रियल लोकेशनस पर शूट किया गया है.
कुल मिलाकर अनिल कपूर और बाकी के एक्टर्स के दमदार परफॉर्मेस के लिए आप ये फिल्म देख सकते हैं.
रेटिंग- 3 स्टार्स





























