Matka King Review: बोरियत से भरा है इस किंग का मटका, विजय वर्मा की सबसे कमजोर सीरीज
विजय वर्मा की नई सीरीज 'मटका किंग' अमेजन प्राइम पर आई है. ये सीरीज बहुत बोर करने वाली है. आइए पढ़ते हैं 'मटका किंग' का डिटेल रिव्यू...
Nagraj Manjule
Vijay Varma, Sai Tamhankar, Kritika Kamra
विजय वर्मा ओटीटी की दुनिया में एक ऐसा नाम है, जो हमेशा कमाल का काम करते हैं. विजय वर्मा को ओटीटी ने ही शोहरत दिलाई. विजय अपने किरदारों को जी लेने में माहिर हैं, लेकिन इस वेब सीरीज में वो चूक गए. ये विजय वर्मा की अब तक की सबसे बोरिंग सीरीज है. प्राइम वीडियो पर आई सीरीज बिल्कुल फ्लैट है. इसमें कोई रोमांच नहीं है, ऐसा लग रहा है कि इसे बस बनाने के लिए बना दिया गया.
कहानी- ये कहानी है एक आम नौकरी पेशा शख्स की, जो मुंबई में अपनी बीवी और बच्चे के साथ रहता है. उसका भाई भी उसी की जिम्मेदारी है. भाई की गलत हरकतों की वजह से जिम्मेदारियां और बढ़ गई है. सैलरी कम है और खर्चा ज्यादा. पहले वो अपने मालिक के लिए सट्टा चलता था, फिर वह अपने लिए सट्टा चलाना शुरु करता है और बन जाता है मटका किंग. उसकी यही कहानी प्राइम वीडियो पर आठ एपिसोड की सीरीज में दिखाई गई है.
कैसी है सीरीज- ये सीरीज शुरू से एंड तक बोर करती है. एक आम शख्स के डॉन बनने की कहानी हम पहले भी देख चुके हैं. कहानी यहां भी कोई नई नहीं है. सेटअप जरूर नया है. पुराने जमाने का बॉम्बे दिखाया गया है. बॉम्बे देखने में अच्छा लगता है. लेकिन ये सीरीज जी स्लो रफ्तार से चलती है. वो आपके सब्र का इम्तिहान ले लेती है. पूरी सीरीज में एक भी ऐसा ट्वीट नहीं आता जो आपको चौक दे.
कहीं कोई ऐसे डायलॉग नहीं आते जिन पर आप ताली बजाएं. इस कहानी में मसाले की सख्त कमी महसूस होती है. सीरीज को जरूर से ज्यादा लंबा खींचा गया है. हर एपिसोड करीब करीब 45 मिनट का है, लेकिन एक भी एपिसोड ऐसा नहीं है, जो आपको दिलचस्प लगे. आप इस सीरीज के किसी किरदार से कनेक्ट नहीं कर पाते. इमोशनल लेवल पर तो आप इस सीरीज से जुड़ते ही नहीं है. कुल मिलाकर यह सीरीज वक्त की बर्बादी है.
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एक्टिंग- विजय वर्मा कमल के एक्टर है, लेकिन यहां उन्होंने यह किरदार जिस तरह से निभाया. वो बुझे बुझे से लगे, विजय ओटीटी की स्क्रीन पर आग लगा देते हैं, लेकिन यहां उन्हें देखकर ऐसा लगा, जैसे उन्होंने खुद आकर आग में पानी डाल दिया हो. सई ताम्हणकर ने अपना किरदार बड़े अच्छे से निभाया है. आप उनसे कनेक्ट भी करते हैं. कृतिका कामरा का काम भी कुछ खास नहीं है. सिद्धार्थ जाधव ने बहुत बढ़िया काम किया है. कई जगह तो सीरीज के हीरो वह लगे हैं. जैमी लीवर का काम भी शानदार है. गुलशन ग्रोवर ऐसे किरदार कई बार निभा चुके हैं.
राइटिंग और डायरेक्शन- नागराज मंजुले ने आशीष आर्यन और अभय कोरन्ने के साथ मिलकर सीरीज लिखी है और नागराज मंजुले ने ही इसे डायरेक्ट किया है. राइटिंग बिल्कुल मजेदार नहीं है. लगा ही नहीं कि ये सैराट और झुंड जैसी फ़िल्में बनाने वाले नागराज मंजुले की वेब सीरीज है. सीरीज कहीं आपसे कनेक्ट नहीं करती, पुरानी कहानी को नए तरीके से पेश भी नहीं किया जा सका.
कुल मिलाकर यह सीरीज वक्त की बर्बादी है
रेटिंग - 1.5 स्टार्स



























