Inspector Avinash Season 2 Review: घिसी पिटी पुरानी फिल्म जैसी लगती है 'इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2', रणदीप हुड्डा चमके, उर्वशी रौतेला को तो ऑस्कर दे दो
Inspector Avinash Season 2 Review: रणदीप हुड्डा और उर्वशी रौतेला की सीरीज 'इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2' ओटीटी पर आ गई है. इसे देखने की प्लानिंग है तो पहले इसका रिव्यू पढ़ लीजिए.
नीरज पाठक
रणदीप हुड्डा, अमित सियाल, उर्वशी रौतेला, अभिमन्यु सिंह, रजनीश दुग्गल, फ्रेडी दारुवाला, शालीन भनोट
ओटीटी
इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा की ये कहानी 90 के दशक की है, असली घटनाओं से प्रेरित है, ये हम सबको पता है, लेकिन इसको थोड़ा सा नया ट्रीटमेंट देने की कोशिश तो की जा सकती थी. चलिए नया नहीं थोड़ा अलग ट्रीटमेंट दे दे, वैसे तो सिनेमैटिक लिबर्टी के नाम पर मरे हुए आदमी को जिंदा कर देते हैं लेकिन यहां इस सीरीज में जान नहीं डाल पाए. ये सीरीज आपको तभी अच्छी लगेगी अगर आपको पुराने टाइप की पुलिस नेता और गैंगस्टर की भिड़त वाली फिल्में पसंद हैं तो, और अगर आप रणदीप हुड्डा के कट्टर फैन हो तो, और हां उर्वशी रौतेला के भी, जी हां ये सरप्राइज है.
कहानी
ये कहानी है 90 के दशक के एसटीएफ इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा की, इस बार नेताओं और माफियाओं से तो जंग चलती है, उनका अपना छोटा सा बेटा एक मर्डर केस में फंस जाता है औऱ अविनाश खुद भी सस्पेंड हो जाता है. ड्यूटी और पर्सनल लाइफ को बैलेंस करते हुए अविनाश कैसे सब कुछ ठीक करेगा, यही इस बार दिखाया गया है.
कैसी है ये सीरीज
ये सीरीज एक दम आपको पुरानी गैंगस्टर टाइप फिल्मों वाला फील देगी, इसमें कुछ बुरा नहीं है लेकिन कुछ नया नहीं है. ये घिसी पिटी लगती है, ऐसा लगता है ये सब तो हम हजारों बार देख चुके हैं, बस वहां किरदार फिक्शनल होता था, यहां असली इंस्पेक्टर अविनाश की कहानी दिखाई गई है. पुलिस स्टेशन के सीन हों या फिर पुलिस और नेता की भिड़त, वही सब डायलॉगबाजी जो हम कई बार देख चुके हैं. 10 एपिसोड थोड़े लंबे भी लगते हैं, या तो कुछ नया होता है. इंस्पेक्टर अविनाश और उनके बेटे वाला एंगल फिर भी थोड़ा सा कनेक्ट करता है लेकिन इंस्पेक्टर अविनाश का नेताओं और माफियाओं से भिड़ना कोई थ्रिल पैदा नहीं करता. एक्टर्स सारे अच्छे हैं लेकिन ऐसी राइटिंग और ट्रीटमेंट के आगे वो क्या करते. माना कि कहानी 90 के दशक की है लेकिन ऐसी कहानियों और भी हैं जो इससे बहुत बेहतर तरीके से बनाई जा चुकी हैं. इसमें भी कुछ और मसाला डाला जा सकता था. कुल मिलाकर ये सीरीज आपको कुछ भी नया नहीं देती.
एक्टिंग
रणदीप हुड्डा का काम कमाल है. वो इंस्पेक्टर ही लगे हैं. उनकी बॉडी लैंग्वेज डायलॉग डिलीवरी सब बढ़िया है. उन्होंने इस किरदार में जान डाल दी है. उर्वशी रौतेला ने बढ़िया काम किया है, वो आपको चौंका देती हैं. अक्सर वो अपने बयानों की वजह से चर्चा में रहती हैं लेकिन यहां उन्होंने काफी सधी हुई एक्टिंग की है. अभिमन्यु सिंह ने कुछ नया नहीं किया है, फीमेल डॉन पहले भी एक्टर बन चुके हैं, वो कोई ऐसा खौफ पैदा नहीं कर पाते. अमित सियाल बढ़िया है लेकिन उन्हें ठीक से इस्तेमाल नहीं किया गया. उन्हें और बेहतर सीन दिए जाने चाहिए थे. रजनीश दुग्गल का काम अच्छा है. फ्रेडी दारुवाला ने बढ़िया काम किया है. शालीन भनोट सरदार के गेटअप में जमे हैं और उनका काम भी अच्छा है.
राइटिंग और डायरेक्शन
नीरज पाठक की राइटिंग और डायरेक्शन दोनोें ओल्ड स्टाइल हैं. अब कंटेंट आगे बढ़ चुका हैं और उन्हें इस सीरीज को एक अलग ट्रीटमेंट देना था. ये सीरीज कुछ वक्त पहले आती तो शानदार लगती है लेकिन अब ये पुरानी सी लगती है.
कुल मिलाकर रणदीप हुड्डा के फैन हैं तो देख लीजिए
रेटिंग-2 स्टार्स



























