पवन कल्याण बहुत बड़े तेलुगु स्टार हैं फैंस उनके लिए पागल हैं. उनकी एक झलक पर सीटियां तालियां बजती है. ये फिल्म उनके इसी स्टारडम को सेलिब्रेट करती है. इस फिल्म में उन्हें जिस अंदाज में दिखाया गया है वो जबरदस्त है और ये देखकर सिर्फ उनके फैंस नहीं, बाकी के लोग भी ताली बजा देंगे. एक जगह एक गैंगस्टर कहता है कि OG को मारने के बाद ये बंदूक वापस कर देना, इसे म्यूजियम में डिसप्ले करना है कि गंभीरा को मारने वाली गन. जब एक पुलिसवाला OG से कहता है कि तू बूढ़ा हो गया तो वो कहता है जंगल में शेर 60 मील की रफ्तार से दौड़ता है और हिरन 90 की लेकिन शेर हिरन को पकड़ लेता है और इसकी वजह है डर. इस फिल्म में पवन कल्याण सब पर भारी हैं. उनकी वजह से फिल्म की कहानी पर भी ध्यान नहीं जाता क्योंकि वो स्क्रीन पर जो कमाल दिखाते हैं आप बस देखते रह जाते हैं. ये तेलुगु फिल्म हिंदी में थियेटर में रिलीज हुई है.
कहानी ओजस गंभीरा यानी OG यानी पवन कल्याण15 साल पहले मुंबई छोड़कर जा चुका है, लेकिन फिर मुंबई में एक कंटेनर आता है. जिसको सत्या दादा यानी प्रकाश राज छुपा देते हैं. इसे हासिल करने ओमी भाऊ यानी इमरान हाशमी आता है. और फिर गैंगवॉर होती है, कहानी में कई सब प्लॉट आते हैं. OG की फैमिली दिखाई जाती है, उसका सत्या दादा के परिवार से रिश्ता दिखाया जाता है, कैसे ओमी और OG भिड़ते हैं, ये देखने आपको थियेटर जाना होगा.
कैसी है फिल्मये पवन कल्याण के स्टारडम का जश्न मनाती फिल्म है. उनका स्टाइल और स्वैग कमाल का लगता है, फिल्म स्टाइलिश है. कमाल तरीके से शूट हुई है, सिनेमैटोग्राफी जबरदस्त है, कई सीन आएंगे जब आप सीटी और ताली बजाएंगे. कहानी भले ठीक ठाक है या आप कमजोर भी कह सकते हैं लेकिन ट्रीटमेंट जबरदस्त है. ऐसी फिल्में अपने टीजर और ट्रेलर से ही बता देती हैं कि कहानी क्या होगी. लेकिन कहानी को जिस तरह से दिखाया गया है वो कमाल है. फैंस के लिए ऐसी फिल्में ट्रीट होती हैं और इसीलिए ये मास सिनेमा होती हैं.
एक्टिंगपवन कल्याण का काम जबरदस्त है, वो हर फ्रेम में आग लगा देते हैं. वो इतने फिट और स्टाइलिश लगे हैं कि उनसे नजर नहीं हटती. इमरान हाशमी का स्क्रीन स्पेस कम मिला है, लेकिन वो छा गए हैं. गैंगस्टर के किरदार में उन्होंने जान डाल दी है. प्रकाश राज का काम हमेशा की तरह कमाल है. प्रियंका मोहन OG की पत्नी के रोल में काफी प्यारी लगती हैं. श्रेया रेड्डी ने जबरदस्त काम किया है, वो जब बंदूक उठाती हैं तो कमाल लगती हैं. अर्जुन दास ने बढ़िया काम किया है.
राइटिंग और डायरेक्शनसुजीत की राइटिंग ठीक ठाक है, कहानी में और गहराई होनी चाहिए थी. लेकिन डायरेक्शन जबरदस्त है, एक सुपस्टार को कैसे पेश करना है ये वो जानते है आए उन्होंने किया है.
कुल मिलाकर ये फिल्म देखी जा सकती है
रेटिंग - 3.5 stars