The Royals Review: इस सीरीज में रॉयल्स कहते हैं, हम कुछ नहीं करते, हम बस हैं. ये सीरीज भी बस है, कुछ नहीं करती बस बोर करती है. रॉयल्स जैसा कोई फील आपको इसमें नहीं होता. यहां बिजली का बिल न भरने की वजह से महल की लाइट चली जाती है और महाराजा अपनी दोस्त से कहते हैं कि ये यहां की प्रथा है तो जिन रॉयल्स की ऐसी प्रथा होगी उन्हें आप फुकरे ही कह सकते हैं. इस सीरीज की भी बत्ती गुल लगती है, एक जगह महारानी बनी साक्षी तंवर कहती हैं - हम तो बस नाम के रॉयल्स हैं, ये सीरीज भी बस नाम की रॉयल है.
कहानी
एक रॉयल फैमिली के महाराजा अपनी वसीयत में खूब सारा कर्ज छोड़ जाते हैं. अब शाही परिवार परेशान है, ऐसे में उन्हें एक कंपनी से ऑफर आता है कि वो उनके शाही महल को Royal BNB में बदलना चाहते हैं जैसे Air BNB होता है लेकिन इसमें मेहमान रॉयल फैमिली के साथ रहेंगे. अब ये कैसे होता है, कैसे रॉयल महाराजा ईशान खट्टर और इस कंपनी की सीईओ भूमि पेडनेकर के बीच मोहब्बत होती है. यही कहानी इस 8 एपिसोड की सीरीज में दिखाई गई है.
कैसी है सीरीज
ये सीरीज बिल्कुल रॉयल नहीं लगती, 8 एपिसोड झेले नहीं जाते, आप बोर हो जाते हैं. जबरदस्ती की किसिंग सीन डाले गए हैं. जबरदस्ती LGBT एंगल घुसाया गया है, सब ओवरएक्टिंग करते दिखते हैं. ये सीरीज रॉयल्स का मजाक जरूर बनाती है. कोई भी सीन ऐसा नहीं जो हैरान करे, जिसे देखने में मजा आए. आप बस इंतजार करते हैं कि ये सीरीज कब खत्म हो.
एक्टिंग
इस सीरीज में एक्टिंग नहीं ओवरएक्टिंग की गई है. ईशान खट्टर कहीं से रॉयल नहीं लगते, वो बस अपने six pack दिखाने और किसिंग सीन देने में लगे रहे. भूमि पेडनेकर ओवरएक्टिंग करती दिखी हैं. उन्हें आजकल क्या हो गया है ये समझ से परे है. वो कमाल की एक्ट्रेस हैं लेकिन इन दिनों वो निराश कर रही हैं. जीनत अमान की वजह से इस सीरीज की चर्चा थी लेकिन उन्हें एक साइड कॉमिक कैरेक्टर बनाकर छोड़ दिया गया जो बस नशा करती रहती हैं. साक्षी तंवर रॉयल लगी हैं लेकिन वो भी ओवरएक्टिंग कर रही हैं. विहान समय इकलौते एक्टर हैं जो अच्छे लगे और रॉयल लगे. मिलिंद सोमन छोटे से रोल में अच्छे लगते हैं. चंकी पांडे वही सब करते दिखे जो कई बार कर चुके हैं. नोरा फतेही को देखकर लगता है कि वो एक्टर बनने के लिए काफी कोशिश कर रही हैं जो नाकाम हो रही है. डिनो मोरिया भी कुछ खास इंप्रेस नहीं कर पाए. सुमुखी सुरेश जबरदस्ती हंसाने की कोशिश करती हैं लेकिन हंसी नहीं आती.
डायरेक्शन और राइटिंग
नेहा वीणा शर्मा, विष्णु सिन्हा और इती अग्रवाल ने ये सीरीज लिखी है. प्रियंका घोष और नुपुर अस्थाना ने डायरेक्ट किया है. राइटिंग और डायरेक्शन खराब है, राइटिंग किसी भी सीरीज की जान होती है और यहां कवि क्या कहना चाहता है ये शायद कवि को खुद नहीं पता. डायरेक्शन भी खराब ही है, सीरीज से कहीं आप कनेक्ट करते ही नहीं और इसकी जिम्मेदारी राइटर्स और डायरेक्टर्स की ही है.
कुल मिलाकर ये सीरीज वक्त की बर्बादी है
Rating - 2 stars
