The Great Grand Superhero Review: जैकी श्रॉफ ने दी असली सुपरहीरो वाली जबरदस्त परफॉर्मेंस, आपके बचपन में ले जाएगी ये फिल्म
The Great Grand Superhero Review: जैकी श्रॉफ की फिल्म द ग्रेट ग्रैंड सुपरहीरो सिनेमाघरों में शुक्रवार को रिलीज हो गई है. इसे देखने की प्लानिंग कर रहे हैं तो पहले यहां इसका रिव्यू पढ़ लीजिए.
मनीष सैनी
जैकी श्रॉफ, भाग्यश्री, प्रतीक बब्बर, मिहिर गोडबोले, सहर्ष शुक्ला
थिएटर
सुपरहीरो क्या होता है, वो जो फिल्मों में हम भारी वीएफएक्स के साथ देखते हैं, या फिर वो जो वाकई कुछ ऐसा कर सके जो लोगों की जिंदगी बदल दे, ये फिल्म ऐसे ही एक सुपरहीरो को सामने लाती है. ये फिल्म आपको आपके बचपन में ले जाएगी, खूब इमोशनल करेगी, आपको कुछ सिखाएगी और आपको सुपरहीरो का असली मतलब बताएगी कि सुपरहीरो जरूरी नहीं सिक्स पैक वाला कोई हट्टा कट्टा हीरो ही हो, वो एक बूढ़े दादाजी भी हो सकते हैं. ये फिल्म आपको क्यों अपनी पूरी फैमिली के साथ देखनी चाहिए, ये इस रिव्यू में जानिए.
कहानी
11 साल का दीपू यानी मिहिर गोडबोले स्कूल में बच्चों की बुलिंग से परेशान होकर उन्हें ये कह देता है कि उसके दादा सुपरहीरो हैं, वो ये बात अपने दादा को बताता है. दादा कहते हैं कि हां मैं तो सुपरहीरो हूं लेकिन क्या दादा सुपरहीरो हैं? ये आपको इस फिल्म को देखकर ही पता चलेगा, और इसके लिए आपको थिएटर जाना होगा.
कैसी है फिल्म
ये एक अच्छी फिल्म है, पहला हाफ तो बहुत कमाल का है. आप खूब इमोशनल होते हैं, फिल्म से खूब कनेक्ट करते हैं. अपने बचपन में चले जाते हैं जब हम शक्तिमान जैसे सीरीयिल देखते थे. ये फिल्म आपको आपके स्कूल की याद दिलाएगी, आपके स्कूल के दोस्तों की याद दिलाएगी. पहले हाफ में ये फिल्म आपको अपने साथ जोड़ लेती है, लेकिन सेकेंड हाफ में फिल्म में थोड़ा लड़ाई झगड़ा ज्यादा होता है. फिल्म थोड़ा वीडियोगेम टाइप हो जाती है. सेकेंड हाफ पहले जितना मजेदार भले नहीं है लेकिन कुल मिलाकर ये फिल्म अच्छी लगती है. ये फिल्म आपको बताती है कि पेड़ पौधे क्यों जरूरी हैं, पढ़ना क्यों जरूरी है, और कई ऐसी चीजें सिखाती है जो शायद बच्चों को इस तरह की फिल्मों के जरिए आसानी से सिखाई और समझाई जा सकती हैं. इस फिल्म का ट्रेलर कमाल था, फिल्म उतनी कमाल नहीं लेकिन काफी अच्छी कही जा सकती है. सेकेंड हाफ पर थोड़ा और काम किया जाता तो ये एक मास्टरपीस बन सकती थी,क्योंकि इस फिल्म के ट्रेलर ने उम्मीदें आसमान पर पहुंचा दी थी इसलिए इस फिल्म की छोटी मोटी कमी भी खलती है लेकिन इस फिल्म की नीयत साफ है और कुछ नया करने की कोशिश की गई है. वीएफएक्स की जगह मैसेज और इमोशन पर ध्यान दिया गया है और यही इस फिल्म की ताकत है.
एक्टिंग
आपको जैकी श्रॉफ से प्यार हो जाएगा, आपको लगेगा कि सुपरहीरो ये होता है. जैकी श्रॉफ असल जिंदगी में जितने बिंदास लगते हैं, यहां वो इसके बिल्कुल उलट हैं. वो दादजी ही लगते हैं, क्या कमाल की बॉडी लैंग्वेज लगती है उनकी, स्क्रीन पर वो बिल्कुल अलग लगते हैं लेकिन पौधा असल जिंदगी में भी हाथ में होता है और यहां भी है, और लगता है फिल्म के इसी मैसेज की वजह से उन्होंने ये फिल्म की होगी. जैकी श्रॉफ ने इस फिल्म से सुपरहीरो होने का मतलब ही बदल दिया है. मिहिर गोडबोले ने जैकी श्रॉफ के पोते का किरदार कमाल तरीके से निभाया है, वो बहुत प्यारे लगे हैं और खूब हंसाते हैं. सहर्ष शुक्ला ने एलियन का किरदार बहुत मजेदार और क्यूट तरीके से निभाया है. छोटे से रोल में भाग्यश्री काफी प्यारी लगती हैं. एलियन के कैरेक्टर में प्रतीक बब्बर ठीक हैं, बाकी के सारे एक्टर्स ने भी अच्छा काम किया है.
राइटिंग औऱ डायरेक्शन
मनीष सैनी ने फिल्म को लिखा और डायरेक्ट किया है. वो तीन बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं और यहां मनीष ने कुछ नया, कुछ अच्छा किया है, ये रेग्यूलर फिल्मों से अलग है. बड़े टाइम बाद बच्चों के लिए कोई फिल्म आई है, फिल्म के कुछ सीन जरूर थोड़े एक्स्ट्रा लगते हैं, उन्हें और बेहतर किया जा सकता था लेकिन बेहतरी तो हमेशा हमारे काम में चाहिए होती है.
कुल मिलाकर ये फिल्म देखी जानी चाहिए
रेटिंग- 3 स्टार्स


























