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Tanvi The Great Review: ये फिल्म हर किसी को जिंदगी में एक बार तो जरूर देखनी चाहिए, एक्स्ट्रा रुमाल लेकर जाइएगा
Tanvi The Great Review: अनुपम खेर की अपकमिंग फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' आपको बहुत कुछ सिखाती है. ये आपको मोटिवेट करेगी और इमोशनल भी कर देगी. ये फिल्म दिल की गहराई तक पहुंचती है.
तन्वी द ग्रेट रिव्यू
Source : Instagram
Director
अनुपम खेर
Starring
अनुपम खेर, शुभांगी, इयान ग्लेन, बोमन ईरानी, जैकी श्रॉफ, अरविंद स्वामी, पल्लवी जोशी और करण टैकर
Platform
थिएटर
अगर आपसे कोई ये कहता है कि कोई काम आपके बस का नहीं है या आप उस काम के लायक नहीं है, तो उसे 'तन्वी द ग्रेट' की टिकट दे दीजिएगा. उसकी सोच बदल जाएगी. कुछ फिल्में सिनेमा का मतलब सार्थक करती हैं, सिनेमा का सिनेमा होना उन्हीं फिल्मों से होता है.
कुछ फिल्में हमारे साथ ठहर जाती हैं, हमें जिंदगी भर के लिए कुछ दे जाती हैं. जो हमारी जिंदगी बदल सकता है, ये ऐसी ही फिल्म है. आजकल बॉलीवुड में प्रोजेक्ट बनते हैं, लेकिन अनुपम खेर ने प्रोजेक्ट नहीं फिल्म बनाई है. बड़े दिल से बनाई है और ये फिल्म दिल की गहराई तक पहुंचती भी है.
कहानी
ये कहानी है एक ऑटिस्टिक लड़की तन्वी की, जिसके पापा सेना में थे और वो शहीद हो गए. दादा लैंसडाउन में रहते हैं ,सेना से रिटायर हैं. ये लड़की अपने जूतों के फीते भी नहीं बांध पाती है, लेकिन एक रात 2 बजकर 17 मिनट पर ये तय करती है कि इसे सेना में भर्ती होना है. वजह आपको थिएटर जाकर पता करनी होगी, क्योंकि कहानी इससे ज्यादा नहीं बताई जा सकती.
ये कहानी है एक ऑटिस्टिक लड़की तन्वी की, जिसके पापा सेना में थे और वो शहीद हो गए. दादा लैंसडाउन में रहते हैं ,सेना से रिटायर हैं. ये लड़की अपने जूतों के फीते भी नहीं बांध पाती है, लेकिन एक रात 2 बजकर 17 मिनट पर ये तय करती है कि इसे सेना में भर्ती होना है. वजह आपको थिएटर जाकर पता करनी होगी, क्योंकि कहानी इससे ज्यादा नहीं बताई जा सकती.
कैसी है फिल्म?
आप इसे एक एक्सपीरियंस कह सकते हैं, थेरेपी कह सकते हैं, क्योंकि ये फिल्म आपको बहुत कुछ महसूस कराती है. ये फिल्म देखकर आपको लगता है कि हमारे हाथ पैर सलामत हैं तब भी हम सोचते हैं कि ये नहीं कर सकते, वो नहीं कर सकते और यह लड़की सेना में जान चाहती है. ये फिल्म पहले सीन से आपको इमोशनल कर देती है जब तन्वी के पापा करण टैकर उससे फोन पर बात करते हैं और वो उनका आखिरी कॉल होता है. इसके बाद आप तन्वी की जिंदगी से इस कदर जुड़ जाते हैं कि फिल्म में इंटरवल भी आपको बेचैन करता है.
आप इसे एक एक्सपीरियंस कह सकते हैं, थेरेपी कह सकते हैं, क्योंकि ये फिल्म आपको बहुत कुछ महसूस कराती है. ये फिल्म देखकर आपको लगता है कि हमारे हाथ पैर सलामत हैं तब भी हम सोचते हैं कि ये नहीं कर सकते, वो नहीं कर सकते और यह लड़की सेना में जान चाहती है. ये फिल्म पहले सीन से आपको इमोशनल कर देती है जब तन्वी के पापा करण टैकर उससे फोन पर बात करते हैं और वो उनका आखिरी कॉल होता है. इसके बाद आप तन्वी की जिंदगी से इस कदर जुड़ जाते हैं कि फिल्म में इंटरवल भी आपको बेचैन करता है.
ये फिल्म बार बार आपकी आंखें नम करती है, आपको हौसला देती है. ये आपको जिंदगी में एक नई मोटिवेशन देती है, सेना के लिए सम्मान बढ़ाती है. आपको लगता है कि हमारी ये सेना जो दुश्मन को घर में घुसकर मारती है, वो इतना बड़ा दिल भी रखती है. ये फिल्म आपके साथ ठहर जाती है और ऐसे फिल्में कम ही बनती हैं. तो अब शिकायत मत कीजिएगा कि ऐसी फिल्में बनती नहीं, क्योंकि बनेंगी तब जब आप देखेंगे, इसे पूरी फैमिली के साथ देखा जा सकता है.
एक्टिंग
शुभांगी दत्त ने तन्वी के किरदार को जिया है, आप इस किरदार के साथ जबरदस्त तरीके से कनेक्ट करते हैं. शुभांगी की ये पहली फिल्म है और वो आपको तन्वी ही लगती हैं. उनकी हर एक चीज आपको कमाल लगती है. फिल्म के सारे दिग्गज कलाकारों पर वो भारी पड़ती हैं. अनुपम खेर ने तन्वी के दादा के रोल में बढ़िया काम किया है. लेकिन यहां डायरेक्टर अनुपम खेर एक्टर अनुपम खेर पर भारी रहे. बोमन ईरानी का काम शानदार है, वो म्यूजिक टीचर रजा साब ही लगे हैं.
शुभांगी दत्त ने तन्वी के किरदार को जिया है, आप इस किरदार के साथ जबरदस्त तरीके से कनेक्ट करते हैं. शुभांगी की ये पहली फिल्म है और वो आपको तन्वी ही लगती हैं. उनकी हर एक चीज आपको कमाल लगती है. फिल्म के सारे दिग्गज कलाकारों पर वो भारी पड़ती हैं. अनुपम खेर ने तन्वी के दादा के रोल में बढ़िया काम किया है. लेकिन यहां डायरेक्टर अनुपम खेर एक्टर अनुपम खेर पर भारी रहे. बोमन ईरानी का काम शानदार है, वो म्यूजिक टीचर रजा साब ही लगे हैं.
इयान ग्लेन ने बढ़िया काम किया है, जैकी श्रॉफ बहुत अच्छे लगे हैं. अरविंद स्वामी इस रोल में बिल्कुल परफेक्ट हैं, पल्लवी जोशी का काम अच्छा है. करण टैकर ने तन्वी के पापा के रोल में जान डाल दी है, छोटे से रोल में नसार ने कमाल का काम किया है.
राइटिंग और डायरेक्शन
इस फिल्म को अनुपम खेर, अंकुर सुमन और अभिषेक दीक्षित ने लिखा है और अनुपम खेर ने डायरेक्ट किया है. ये तीनों इस फिल्म के हीरो हैं, क्योंकि इतने सारे दिग्गज होने के बाद एक नई लड़की को ऐसे पेश कर देना, ये अपने आप में कमाल है. अनुपम खेर खुद प्रोड्यूसर हैं, डायरेक्टर हैं, एक्टर हैं. लेकिन इस फिल्म में वो जितने जरूरी थे, स्क्रीन पर उतने ही हैं. यही एक अच्छे डायरेक्टर की पहचान है कि वो कहानी को हीरो बनाता है, न कि खुद हीरो बन जाता है. फिल्म पर उनकी पकड़ दिल और दिमाग दोनों से मजबूत रही, क्योंकि ऐसी फिल्में सिर्फ दिमाग से नहीं बन सकती.
इस फिल्म को अनुपम खेर, अंकुर सुमन और अभिषेक दीक्षित ने लिखा है और अनुपम खेर ने डायरेक्ट किया है. ये तीनों इस फिल्म के हीरो हैं, क्योंकि इतने सारे दिग्गज होने के बाद एक नई लड़की को ऐसे पेश कर देना, ये अपने आप में कमाल है. अनुपम खेर खुद प्रोड्यूसर हैं, डायरेक्टर हैं, एक्टर हैं. लेकिन इस फिल्म में वो जितने जरूरी थे, स्क्रीन पर उतने ही हैं. यही एक अच्छे डायरेक्टर की पहचान है कि वो कहानी को हीरो बनाता है, न कि खुद हीरो बन जाता है. फिल्म पर उनकी पकड़ दिल और दिमाग दोनों से मजबूत रही, क्योंकि ऐसी फिल्में सिर्फ दिमाग से नहीं बन सकती.
कुल मिलाकर ये फिल्म देखिए, जिंदगी में आपको कुछ हासिल होगा.
रेटिंग- 4 स्टार्स
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