System Review: सोनाक्षी, ज्योतिका, आशुतोष की दमदार परफार्मेंस है इस दिलचस्प सिस्टम की जान
System Review: सोनाक्षी सिंहा कि फिल्म 'सिस्टम' आज, 22 मई 2026 को रिलीज हो गई है. अगर आप ये फिल्म देखना चाहते हैं तो नीचें इसका रिव्यू पढ़ ले.
अश्विनी अय्यर तिवारी
सोनाक्षी सिंहा, ज्योतिका, आशुतोष गोवारिकर, विजयंत कोहली
ओटीटी
तारीख पर तारीख, कोर्टरूम ड्रामा का जिक्र आता है तो सबसे पहले दिमाग में यही सनी देओल का यही डायलॉग आता है, लेकिन यह फिल्म तारीख पर तारीख वाली बात नहीं, यहां कोर्ट रूम ड्रामा के साथ-साथ आपको एक मर्डर मिस्टी भी देखने को मिलती है और ये थोड़ा और अलग नया लगता है. इस फिल्म को जानदार बनाती हैं इसकी दमदार परफॉर्मेंस.
कहानी
यह कहानी है एक बाप बेटी की. बाप बड़ा वकील है, बेटी वकालत में पैर जमाने की कोशिश कर रही है. वह अपने पापा की कंपनी में पार्टनर बनना चाहती चहती है, लेकिन पापा कहते हैं कि पहले 10 केस जीतो. उसके बाद तुम मेरी कंपनी में पार्टनर बन सकती हो. इसके बाद एक मर्डर केस लड़ते हुए दोनों बाप बेटी आमने सामने जाते हैं. फिर क्या होता है, ये आपको अमेजन प्राइम वीडियो पर देखना होगा.
कैसी है फिल्म
ये एक अच्छी फिल्म है और अपने कमाल के एक्टर्स की वजह से इस फिल्म की कमियां छिप भी जाती हैं. पहले ये एक रेगुलर बाप बेटी की लड़ाई लगती है लेकिन फिर जब से मर्डर मिस्ट्री में बदलती है तो दिलचस्प हो जाती है. आप ये जानना चाहते हैं कि मर्डर किसने किया और क्लाइमैक्स आपको चौंकाता है. फिल्म और बेहतर हो सकती थी, सस्पेंस एलीमेंट और ज्यादा डाला जा सकता था. शुरुआत में फैमिली ड्रामा कम किया जा सकता था और अगर ऐसा होता तो ये और बेहतर फिल्म होती लेकिन ओटीटी के लिहाज से ये एक अच्छी फिल्म कहीं जाएगी जिसे आप आराम से घर बैठकर एंजॉय कर सकते हैं.
एक्टिंग
सोनाक्षी सिंहा ओटीटी पर अलग ही रंग में दिखती हैं, यहां भी वो बढ़िया काम करती हैं. वकील , जासूस और बेटी टीमों शेड्स में वो जमती हैं, उनका परफॉर्मेंस फिल्म की हाईलाइट है. ज्योतिका कमाल की एक्ट्रेस हैं और यहां वो चौंका देती हैं, उनका किरदार सबसे अहम हो जाता है और ऐसा क्यों ये आपको फिल्म देखकर समझ आएगा. आशुतोष गोवारिकर ने बढ़िया काम किया है, वो वकील ही लगते हैं और आप ये सोचते हैं कि ये एक्टर ज्यादा अच्छे हैं या डायरेक्टर. विजयंत कोहली एक बार फिर सपने वर्सेस एवरीवन के बाद नेगेटिव रोल में हैं और वो अपना असर छोड़ते हैं, वो आपको एक नेगेटिव किरदार ही लगते हैं, बाकी के एक्टर्स ने भी अपना का अच्छे से किया है.
डायरेक्शन
हरमन बाजवा ने फिल्म लिखी है और अश्विनी अय्यर तिवारी ने डायरेक्ट की है, राइटिंग अच्छी है लेकिन और मसाला डाला जाता तो ये एक अच्छी नहीं शानदार फिल्म बनती, डायरेक्शन रियलिस्टिक लगता है, कोर्ट को अखाड़ा नहीं बनाया गया.
कुल मिलाकर आप ये फिल्म देख सकते हैं.
रेटिंग - 3 स्टार्स



























