मेरी पॉयट्री रहमान के गानों की तरह है, धीरे धीरे हिट होती है. सनी संस्कारी की ये बात फिल्म पर भी फिट होती है, ये फिल्म धीरे धीरे बताती है कि ये सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं दे रही, एक जरूरी मैसेज भी दे रही है. जब सनी कहता है कि आज भी लेडीज लोग को अपने सपनों के लिए लड़ना पड़ता है तो ये बात वो करोड़ों लेडीज फील कर सकती हैं जो शादी के चक्कर में अपने सपने पूरे नहीं कर पाई. सान्या मल्होत्रा जब कहती हैं है कि मैं मिसेज अनन्या भाटिया सिंह हूं, शादी कर रही हूं, अपनी पहचान त्याग नहीं रही हूं तो आपको लगता है कि शादी का मतलब ये नहीं कि कोई लड़की अब अपने और अपनी पहचान के लिए कुछ नहीं कर सकती. कुंडली और बायो डेटा मिलने से जोड़ियां नहीं बनती, दिल मिलने से जोड़ियां बनती हैं. ये मैसेज उन पेरेंट्स के लिए है जो अपनी मर्जी बच्चों पर थोपकर उनकी शादी करवा देते हैं और उनकी जिंदगी एक समझौता बनकर रह जाती है.

कहानीये कहानी है सनी यानि वरुण धवन और तुलसी यानि जाह्नवी कपूर की. इन दोनों का ब्रेकअप हुआ है, ये दोनों अपने एक्स अनन्या और विक्रम यानि सान्या मल्होत्रा और रोहित सराफ की शादी पर चले जाते हैं. फिर कैसे इन सबका रिश्ता बदलता है, कैसे ये दोनों और ये फिल्म एक ऐसा मैसेज दे जाती है जो जरूरी है. इसके लिए आपको थिएटर जाकर ये फिल्म देखनी होगी.

कैसी है फिल्मये एक अच्छी फिल्म है, इस फिल्म में आपको कॉमेडी, रोमांस, बढ़िया गाने, फुल ऑन एंटरटेनमेंट और साथ ही जरूरी मैसेज भी मिलेगा. ये उस तरह की फिल्म है जिसे आप आराम से अपनी फैमिली के साथ जाकर देखिए. ये आपकी लाइफ चेंज करने वाली फिल्म नहीं है, आपका मूड चेंज करने वाली फिल्म है और फेस्टिवल सीजन के लिए परफेक्ट है. जब हम एंटरटेन होने के लिए कुछ देखना चाहते हैं, स्क्रीन पर अच्छे चेहरे, अच्छे कपड़े, फ्रेशनेस नजर आती है. बीच बीच में बढ़िया गाने आते हैं जो सुनते हुए आप सीट पर ही थिरक सकते हैं. जो ट्रेलर से प्रोमिस किया गया था वो डिलीवर किया गया है,बल्कि उससे थोड़ा ज्यादा ही. कहानी का अंदाजा ट्रेलर से ही लग गया था लेकिन उससे आगे बढ़कर फिल्म बीच बीच में कुछ ऐसी बातें कह जाती है जो जरूरी हैं. हर फिल्म में मैसेज हो ये जरूरी नहीं लेकिन ये फिल्म हल्के फुल्के अंदाज में बड़ी बातें बोल जाती हैं. ऐसी फिल्म अक्सर ट्रोल होती है वो भी बिना वजह है. क्योंकि कई लोग इनके बारे में एक राय पहले से बना लेते हैं लेकिन कुल मिलाकर ये फिल्म अच्छी है और फैमिली के साथ देखी जा सकती है.

एक्टिंगवरुण धवन की कॉमिक टाइमिंग अच्छी है, वो खूब सारी मिमिक्री भी करते हैं. कभी सलमान की तरह कहते हैं शेरा गाड़ी निकालो तो कभी शाहरुख की तरह सूरज हुआ मद्धम पर डांस करते हैं. उनके कॉमिक पंच खूब हंसाते हैं, वरुण अपनी फॉर्म में हैं और कई जगह वो गोविंदा की याद भी दिलाते हैं. जाह्नवी कपूर पर ये किरदार पूरी तरह से सूट हुआ है, कहीं वो मासूम तुलसी टीचर बन जाती हैं तो कहीं एक दम ग्लैमरस डीवा. कई कई सीन्स वो वो गजब की खूबसूरत लगी हैं. रोहित सराफ इम्प्रेस करते हैं,लड़कियां क्यों उनकी दीवानी हैं ये फिल्म देखकर समझ आता है. वरुण के सामने भी रोहित अपना असर अच्छे से छोड़ते हैं. सान्या मल्होत्रा भी काफी अच्छी लगती हैं, उनका एक अलग ऑरा है जो आप महसूस करते हैं. मनीष पॉल का काम भी बढ़िया है.

राइटिंग और डायरेक्शनशशांक खेतान और इशिता मोइत्रा ने कहानी लिखी है और शशांक खेतान ने डायरेक्ट किया है. राइटिंग ठीक है, कहानी का अंदाजा आपको लग जाता है लेकिन जिस तरह से कहानी में कुछ गहरी बातें कही गई हैं वो दिल को छू जाती हैं. डायरेक्शन अच्छा है, शशांक ने अपने स्टाइल में ये फिल्म बनाई है. वो वरुण के साथ बद्री की दुल्हनिया और हंप्टी शर्मा की दुल्हनिया बना चुके हैं. ये वैसे ही फ्लेवर की फिल्म है और इनकी हैट्रिक कही जा सकती है.

म्यूजिकफिल्म का म्यूजिक काफी अच्छा है, गाने फिल्म के फील को बढ़ाते हैं. सोनू निगम से लेकर अऱिजीत सिंह और खेसारी लाल यादव तक के गाने इस फिल्म में हैं. जिन्हें सुनकर आप सीट पर बैठे बैठ थिरकते हैं.

कुल मिलाकर ये फिल्म देखी जा सकती है और फिल्म के मैसेज के लिए इसे आधा स्टार एक्ट्रा दिया जा सकता है.

रेटिंग- 3.5 स्टार्स