Sitaare Zameen Par Review:  आमिर खान की जब कोई फिल्म आती है तो उम्मीदें साथ लेकर आती है. तारे जमीन पर देखने के बाद से ही लोगों के बीच सितारे जमीन पर देखने की चाह और बढ़ गई थी. इस फिल्म ने साबित कर दिया की आमिर खान लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरे हैं. फिल्म एक मस्ट वॉच है और आपको थिएटर में खूब हंसाएगी. दोनों ही हाफ एंगेजिंग हैं और एक सेकंड के लिए भी आपका ध्यान नहीं भटकने देते. हर एक सीन में इतनी ताकत है की आपको जमकर एंटरटेन करेगा. आमिर खान ने जब लाल सिंह चड्ढा का रीमेक बनाया था तब भी उसमें एक इंडियन टच डाला था और सितारे जमीन पर में भी उन्होंने ये काम बहुत अच्छे से किया है अगर करीब 70% एडेप्टेशन है तो करीब 30% हिस्सा आमिर ने अलग डाला है

कहानीगुलशन, एक घमंडी बास्केटबॉल कोच जो खुद को खुदा से कम नहीं समझता था. दूसरों की कोई परवाह नहीं, बस अपनी दुनिया में मस्त. लेकिन किस्मत ने पलटी मारी, शराब पीकर गाड़ी चलाई, पकड़ा गया और कोर्ट ने थमा दी समाज सेवा की सजा. अब जनाब को कोचिंग देनी पड़ती है एक ऐसी टीम को, जिसमें सभी खिलाड़ी न्यूरोडाइवर्जेंट होते हैं. शुरुआत में तो गुलशन की शक्ल देखने लायक होती है- “ये क्या फालतू काम पकड़ा दिया!” लेकिन जैसे-जैसे वो इन बच्चों के साथ वक्त बिताता है, उसकी दुनिया ही बदलने लगती है. जो चीज उसे सजा लग रही थी, वही उसकी सबसे बड़ी सीख बन जाती है. धीरे-धीरे घमंड पिघलता है, दिल खुलता है और वो इन बच्चों को सिर्फ कोच नहीं, अपना बना लेता है.

कैसी है फिल्मइस फिल्म के दोनों ही हाफ मजेदार हैं और आपको हंसा हंसा कर अपना बना लेते हैं. लेकिन सेकंड हाफ की शुरुआत में फिल्म थोड़ी सी ढीली पड़ती है लेकिन फिर से अपनी पेस पकड़ लेती है. अगर इसको हम तारे जमीन के सामने रखकर देखें तो आपको सितारे जमीन में इमोशनल सीन कम मिलेंगे यहां मजाकिया अंदाज में बेहतरीन कहानी दिखाई गई है. फिल्म का क्लाइमेक्स भी आपको एक तगड़ी सीख देगा, हार कर भी जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं. ये मूवी आपको मोटीवेट करेगी लाइफ में कभी हार न मानने के लिए और सबसे खास एक लाइन “सबका अपना-अपना नॉर्मल.” ये फिल्म सिर्फ देखने की नहीं बल्कि महसूस करने की है. क्योंकि हर इंसान के अंदर एक गुलशन होता है जिसको अलग को समझने से डर लगता है. 

एक्टिंगइस फिल्म में आमिर खान ने गुलशन के किरदार को ऐसे निभाया है कि लगेगा ,ये बंदा सच में बदला है. आमिर खान की एक्टिंग गजब की है उन्होंने फिर साबित कर दिया की वो परफेक्शनिस्ट क्यों कहलाते हैं. उन्होंने गुलशन के करैक्टर में जान डाल दी, हर सीन में उनका हाव-भाव, डायलॉग डिलीवरी और बॉडी लैंग्वेज इतना असरदार है कि दर्शक उनसे नजरें नहीं हटा पाते. और जेनेलिया डिसूजा? जैसे गुलशन की जिंदगी की रौशनी. कम बोलती हैं, लेकिन हर सीन में दिल छू जाती हैं. जेनेलिया ने एक परफेक्ट बीवी का किरदार सादगी और गहराई से निभाया है. लेकिन अगर थोड़ा और ज्यादा उनका करैक्टर इन्फ्लुएंशियल होता तो बेहतर था उनके रोल को और ज्यादा इंपैक्टफुल बनाया जा सकता था. पर फिल्म का असली तड़का तो वो 10 न्यूरोडाइवर्जेंट कलाकार लगाते हैं. ना ओवरएक्टिंग, ना बनावटी ड्रामा,  सब कुछ दिल से. साथ ही फिल्म में डॉली अहलूवालिया ने बेहतरीन तरीके से गुलशन की मां का किरदार निभाया है और एक्टर बृजेन्द्र काला का कॉमिक टाइमिंग कमाल है जिन्होंने फिल्म में आमिर की मां के ‘गुड फ्रेंड’ का रोल निभाया है. लेकिन एक बात जरूर है कि एक्टिंग में इन 10 स्पेशल लोगों ने आमिर खान को भी पीछे छोड़ दिया है. 

राइटिंग और डायरेक्शनआरएस प्रसन्ना की डायरेक्शन और आमिर खान की प्रोडक्शन में बनी ये शानदार फिल्म ऑफिशियली स्पैनिश हिट चैंपियंस की एडेप्टेशन है. रीमेक जरूर है लेकिन राइटिंग और डायरेक्शन अच्छी है फिल्म पर पकड़ मजबूत है. 

म्यूजिकफिल्म में देखा जाए तो बहुत ज्यादा म्यूजिक नहीं है. 

रेटिंग- 3.5 स्टार्स

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