Shatak Review: RSS के 100 साल के इतिहास को शानदार तरीके से दिखाती फिल्म, हैरान कर देने वाली है कहानी
Shatak Review: 'शतक:संघ के 100 वर्ष' सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. अगर आप भी इस फिल्म को देखने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो उससे पहले यहां रिव्यू पढ़ना ना भूलें...
आशीष मल्ल
वीर कपूर, आशीष तिवारी
क्या गांधी जी की हत्या में संघ का हाथ था, क्या आजादी में संघ की कोई भूमिका थी. गांधी जी और संघ प्रमुख के रिश्ते कैसे थे. संघ ने युद्ध के वक्त क्या काम किया है. ये फिल्म आपको संघ के बारे में सबकुछ बताती है और बड़े कमाल तरीके से बताती है. 1 घंटे 52 मिनट में ये फिल्म इतना कंटेंट दिखा देती है जिसे दिखाना शायद संभव नहीं होता और आपको संघ के बारे में ऐसी ऐसी बातें जानने को मिलती हैं जो आपने शायद इससे पहले कभी नहीं सुनी होंगी. ये फिल्म दावा करती है कि ये सब सच है और संघ के 100 सालों में ये सब हुआ है.
कहानी- 1925 में डॉक्टर जी यानि डॉक्टर केशव बालीराम हेडगेवार ने संघ कैसे बनाया, उनका बचपन कैसा था. उनके सामने क्या चुनौतियां आई, फिल्म का फर्स्ट हाफ इसपर फोकस सकता है और साथ साथ दिखाता है कि आजादी की लड़ाई में संघ कर क्या रहा था. इसके बाद गुरुजी यानि एम एस गोवालिकर ने संघ को कैसे आगे बढ़ाया. क्यों संघ राजनीति में नहीं आया, संघ ने अपने संगठन को इतना मजबूत कैसे किया, ये आप सेकेंड हाफ में देखते हैं. आरएसएस की पूरी जर्नी को इस फिल्म में समेटा गया है.
कैसी है फिल्म- ये फिल्म आपको 1 घंटे 52 मिनट में इतनी जानकारी दे देती है कि आप हैरान रह जाते हैं. पहले सीन से फिल्म मुद्दे पर आती है, कहीं टाइम बर्बाद नहीं होता और एक एक करके साल दर साल संघ के बनने और देश में उसकी भूमिका की कहानियां सुनाती है. वॉयस ओवर का सहारा लिया गया है और इससे कहानी और तेजी से आगे बढ़ती है. कुछ बातें ऐसी पता चलती हैं जो हमने नहीं सुनी या बहुत कम सुनी और वो आपको हैरान करती है. कहीं किसी चीज को खींचा नहीं गया. कहीं किसी को टार्गेट नहीं किया गया. बैलेंस रखा गया है. गांधी, नेहरू और इंदिरा को कुछ वक्त के लिए दिखाया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है कि उनके बारे में निगेटिव ही कहा गया है. यहां संघ की कहानी पर फोकस किया गया है और अगर इस फिल्म में दिखाया गया दावा सच है तो ये वाकई हैरान करने वाली बात है. संघ की भूमिका आजादी के बाद भी एक लड़ाई में खूब रही, जो आपने कम ही सुना होगा. इस फिल्म को हाइब्रिड तरीके से बनाया गया है,यानि AI और इंसानों दोनों के इस्तेमाल से, ऐसा फिल्म के मेकर्स का दावा है. हालांकि AI आपको बहुत कम सीन्स में महसूस होता है. वीएफएक्स ही ज्यादा लगता है वो भी जंग के सीन्स में, हां ऐसा जरूर लगता है कि जरूरत से ज्यादा जानकारी दे दी गई है लेकिन 100 साल को समेटना आसान नहीं था और फिल्म को लंबा भी नहीं बनाया गया. कुल मिलाकर ये ऐसी फिल्म है जो जानकारी देती है और कमाल तरीके से देती है.
राइटिंग और डायरेक्शन - अनिल अग्रवाल, उत्सव डान, रोहित गहलोत, नितिन सावंत ने लिखी है और आशीष मॉल ने डायरेक्ट की है और राइटिंग बढ़िया है. खासतौर पर रिसर्च बहुत शानदार है, बैलेंस रखा गया है, डायरेक्शन भी अच्छा है, Kridhan mediatech ने ये फिल्म बनाई है, वीर कपूर ने प्रोड्यूस की, और इन्होंने हाइब्रिड फिल्मों के जरिए एक नई पहले की है.
म्यूजिक - फिल्म का म्यूजिक काफी अच्छा है, गाने फिल्म के फील के हिसाब से जाते हैं, सनी इंदर और शांतनू शंकर का म्यूजिक आपको बांधकर रखता है. शंकर महादेवन, शान, सुरेश वाडेकर की आवाज में गाने बढ़िया लगते हैं.कुल मिलाकर संघ के बारे में जानना चाहते हैं तो जरूर देखिए.
रेटिंग - 3 स्टार्स
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