Rana Naidu 2 Review: मुझे भी चाहिए 1 राणा नायडू, ये सीरीज देखकर यही महसूस होता है कि काश हमारी जिंदगी में भी कोई ऐसा शख्स होता जो हर प्रॉब्लम को सॉल्व कर देता. हालांकि राणा जिस तरह की दिक्कतों को सुलझाता है वैसी दिक्कतें आम लोगों की जिंदगी में आती नहीं हैं. ये सब बड़े लोगों के साथ ही होता है, इसे आप नेटफ्लिक्स की फैमिली मैन भी कह सकते हैं. ये सीरीज अपने पहले सीजन से थोड़ी बेहतर है, ट्रैक पर आने में वक्त लेती है लेकिन फिर जब आती है तो आपको बांधकर रखती है. ये कोई मास्टरपीस सीरीज नहीं है लेकिन खराब तो बिल्कुल नहीं है, तो अगर सीजन 1 अच्छा लगा था तो आप देख सकते हैं.

कहानी
राणा नायडू बड़े लोगों की बड़ी बड़ी समस्याओं को सुलझा रहा है और उसकी अपनी जिंदगी में भी अलग दिक्कतें चल रही हैं. बीवी और बच्चे उससे दूर जा रहे हैं, ऐसे में वो अब एक आखिरी बड़ा काम करके खूब सारा पैसा कमाकर सेटल होना चाहता है. क्या वो ऐसा कर पाएगा, उसके रास्ते में कौन कौन आएगा, उसके परिवार से उसके रिश्ते क्या बेहतर होंगे, यही आपको इस बार देखने को मिलेगा.
 
कैसी है सीरीज
ये एक अच्छी सीरीज है, 8 एपिसोड हैं, हर एपिसोड 45 से 50 मिनट का है, शुरू के एपिसोड में माहौल बनने में वक्त लगता है और उतना मजा नहीं आता लेकिन चौथे एपिसोड के बाद सीरीज अपने रंग में आती है. ट्विस्ट एंड टर्न आते हैं, इमोशन हाई होते हैं, कुछ कुछ ऐसा होता है जो आप सोचते नहीं और फिर ये सीरीज आपको एंड तक बांधकर रखती है. सीरीज की प्रोडक्शन वैल्यू अच्छी है, बढ़िया एक्टर्स को कास्ट किया गया है. कई ट्रैक चलते हैं और हर किसी को अच्छे से वक्त दिया गया है. जल्दी में किसी चीज को नहीं निपटाया गया, ये सीरीज आपका अच्छा एंटरटेनमेंट करती है और आप अच्छे टाइम पास के लिए इसे बिल्कुल देख सकते हैं.
 
एक्टिंग
राणा दग्गुबाती का काम अच्छा है, वो इस किरदार में रम चुके हैं और बिल्कुल नेचुरल लगते हैं. वो हर इमोशन को खूबसूरती से निभाते हैं, चाहे वो एक पति का हो, पिता का हो, भाई का हो या फिर एक फिक्सर का. वेंकटेश का काम जबरदस्त है, उनका किरादर अतरंगी टाइप का है और वो इसमें काफी सूट होते हैं. कृति खरबंदा काफी ज्यादा इम्प्रेस करती हैं, उनकी इमेज एक बिल्कुल सीधी सिंपल हीरोइन की है और यहां वो बिल्कुल अलग किरदार में दिखी हैं और उनका काम कमाल है. यही एक अच्छे एक्टर की खासियत होती है कि वो आपको चौंकाता है. सुरवीन चावला का काम अच्छा है, उनकी स्क्रीन प्रेजेंस मे एक करिश्मा है, वो स्क्रीन पर काफी अच्छी लगती हैं. अर्जुन रामपाल नेगेटिव रोल में गजब लगे हैं. सुशांत सिंह बढ़िया है. अभिषेक बनर्जी ने फिर से एक बार कमाल काम किया है, ये बिल्कुल अलग किरदार है और ये आपको फिर से उनका फैन बना देगा. फिर से इसलिए क्योंकि ऐसा हो नहीं सकता कि अभिषेक का काम आपने देखा हो और आप उनके फैन ना हों, सुशांत सिंह का काम भी काफी अच्छा है.
 
राइटिंग और डायरेक्शन
इस सीरीज के क्रिएटर हैं करण अंशुमन. डायरेक्ट हैं करण अंशुमन, सुपर्ण वर्मा और अभय चोपड़ा. राइटर्स हैं-Karan Anshuman, Ryan Soares, Karmanya Ahuja, Ananya Mody, Karan Gour, Vaibhav Vishal,इस सीरीज का राइटिंग अच्छी है. बस शुरू के 3 एपिसोड और टाइट होने चाहिए थे, चौथे एपिसोड से राइटिंग एक दम शार्प लगती है, डायरेक्शन बढ़िया है, सीरीज का स्केल अच्छा लगता है
 
कुल मिलाकर ये सीरीज देखी जा सकती है.
 
रेटिंग- 3 स्टार्स