Pintu Ki Pappi Review: टाइमपास एंटरटेनर है ये फिल्म, पिंटू की पप्पी को जादू की झप्पी दे दीजिए
Pintu Ki Pappi Review: सुशांत थमके, जान्या जोशी की डेब्यू फिल्म पिंटू की पप्पी आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. अगर फिल्म देखने का प्लान बना रहे हैं जो पहले पढ़ लें रिव्यू.
शिव हरे
सुशांत थमके, जान्या जोशी, गणेश आचार्य, विजय राज
सिनेमाघर
Pintu Ki Pappi Review: इन दिनों सोशल मीडिया काफी बिजी है नादानियां को ट्रोल करने में. माना कि वो फिल्म अच्छी नहीं है लेकिन जो अंटेशन हम किसी को ट्रोल करने में देते हैं क्या वो उनसे बेहतर फिल्मों को देते हैं. अगर देते हैं तो सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव जैसी फिल्म ब्लॉकबस्टर हो जाती, पिंटू की पप्पी को महान फिल्म नहीं है लेकिन ये नादानियां भी नहीं है. अच्छा टाइमपास करती है ये फिल्म लेकिन सवाल वही है कि दर्शक इसे देखने सिनेमाघर जाएंगे, क्या नए कलाकारों को मौका देंगे.
कहानी
ये कहानी है पिंटू यानि सुशांत थमके नाम के एक लड़के की जिसकी हर गर्लफ्रेंड उसे छोड़कर चली जाती है. फिर वो अपने मामा गणेश आचार्य के पास आ जाता है और उसे पता चलता है कि वो जिसकी भी पप्पी लेता है उसकी शादी हो जाती है. फिर दोनों मामा भांजा मिलकर इसे एक बिजनेस बना लेते हैं और पिंटू लड़कियां की पप्पी लेकर उनकी शादी करवाता है. फिर उसे अपनी ही एक क्लाइंट से प्यार हो जाता है जो एक नेता की बेटी है. ये लोग शादी के पैसे ले लेते हैं लेकिन शादी तो होती नहीं, क्योंकि उससे शादी तो पिंटू को करनी है. क्या होगा आगे, ये देखने आप थिएटर जा सकती है.
कैसी है फिल्म
ये एक अच्छी टाइम पास मसाला एंटरटेनर है. फिल्म देखते हुए आपका अच्छा टाइमपास होता है. फिल्म में एक अलग टाइप की कहानी है, कलाकारों का काम अच्छा है. बीच बीच में अच्छे गाने आते हैं, और ये फिल्म देखते हुआ आपको ये भी लगता है कि कुछ स्टारकिड्स को बिना टैलेंट के इतना प्रमोट किया जाता है और ये फिल्म तो उनकी फिल्मों से काफी बेहतर है और इसका प्रमोशन उस लेवल का क्यों नहीं, या फिर दर्शकों के बीच इसकी वैसी हाइप क्यों नहीं. दिक्कत यही है कि दर्शक नेपो किड्स को ट्रोल करने में इतना बिजी है और उसे इसमें इतना मजा आ रहा है कि वो अच्छी चीज देखने में अपना टाइम नहीं देना चाहता. देखिए ये कोई महान फिल्म नहीं है लेकिन ये खराब फिल्म भी नहीं है. कम से कम कई ऐसी फिल्मों से बेहतर है जिनका प्रमोशन युद्ध स्तर पर होता है. जिनके लिए ये भी कहा जाता है कि इन्हें मौका तो दीजिए. पहली फिल्म में तो और भी कई सितारे खऱाब थे, तो फिर इन्हें भी मौका दीजिए और जाइए थिएटर पिंटू से पप्पी लेने.
एक्टिंग
इस फिल्म को तीनों लीड एक्टर नए हैं और तीनों ने अच्छा काम किया है. उन्हें देखकर लगता है कि सही मौका और डायरेक्शन मिला तो ये आगे और अच्छा कर सकते हैं. सुशांत थमके का काम अच्छा है. कॉमेडी टाइमिंग से लेकर डांस और इमोशन में वो अच्छे लगे हैं. जान्या जोशी काफी प्यारी लगी हैं और उनका काम भी अच्छा है. उन्हें और मौके मिलने चाहिए. ऐसे नए और फ्रेश चेहरों पर फिल्ममेकर्स की नजर जरूर जानी चाहिए. विधि यादव भी काफी मासूम लगती हैं और उनका काम भी काफी अच्छा है. गणेश आचार्य ने पिंटू के मामा के किरदार में मजेदार काम किया है, वो ठुमके भी लगता हैं और एक्शन भी करते हैं. गणेश के नाम पर ही ये फिल्म प्रमोट भी की गई है, विजय राज का काम अच्छा है, मुरली शर्मा अच्छे लगे हैं.
डायरेक्शन
शिव हरे ने फिल्म को डायरेक्ट किया है और उन्होंने न्यूकमर्स से अच्छा काम निकलवाया है. कहानी का ट्रीटमेंट मजेदार रखा है, जाहिर है ये कोई बहुत बड़े बजट की फिल्म नहीं है लेकिन लिमिटेड बजट में भी शिव ने अच्छा काम कर दिखाया है. अनादि सुफी ने कुछ नया लिखने की कोशिश की है और ये कोशिश अच्छी है.
म्यूजिक
नितिन अरोड़ा ने फिल्म का म्यूजिक दिया है और फिल्म के गाने अच्छा है. बीच बीच में गाने आते है तो अखरते नहीं हैं. कुछ गाने सुनकर मजा भी आता है, गणेश आचार्य फिल्म से जुड़े हैं तो गानों को ग्रैंड तरीके से फिल्माया गया है.
कुल मिलाकर ये एक छोटे बजट की टाइमपास फिल्म है जिसे देखा जा सकता है.
रेटिंग- 3 स्टार्स




























