Peddi Review: राम चरण की होश उड़ाने वाली एक्टिंग हर चीज पर भारी, फैंस के लिए तोहफा है ये फिल्म
Peddi Review: राम चरण और जाह्नवी कपूर की मच अवेटेड फिल्म 'पेद्दी' 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. देखने की प्लानिंग है तो पहले इसका रिव्यू यहां पढ़ लीजिए.
बुची बाबू सना
राम चरण, जाह्नवी कपूर, बोमन ईरानी, जगपति बाबू, शिव राजकुमार, दिव्येंदु, रवि किशन
थिएटर
राम चरण साउथ के एक ऐसे स्टार हैं जिनकी फैन फॉलोइंग नेक्सट लेवल है. फैंस उनकी एक झलक के लिए दीवाने हैं. हाल में हमने एक फैन को देखा भी जो किसी तरह उनतक पहुंचना चाहता था. ये फिल्म ऐसे फैंस के लिए एक तोहफा है, राम चरण ने जैसे खुद को इस फिल्म में झोंक दिया है, ऐसा परफॉर्मेंस दिया है कि आप फिल्म की तमाम कमियों को नजरअंदाज कर देंगे और थिएटर से निकलकर आपको याद रहेगा तो बस एक नाम,,,पेद्दी. ये फिल्म एक तो टिपिकल साउथ फिल्म नहीं है. एक नया एक्सपेरिमेंट करने की कोशिश है, और ये कहीं सफल हुआ है तो कहीं फेल लेकिन राण चरण ने हर कमी को अपने काम से ढक दिया है.
कहानी
ये कहानी है आंध्र प्रदेश के विजयनगरम के एक गांव की, अब कौनसा गांव यही इस फिल्म की कहानी है. गांव का नाम नहीं है, वहां ट्रेन नहीं रुकती, जिस वजह से बीमार लोग अस्पताल नहीं सीधे शमशान जाते हैं. गांव को नाम चाहिए, पहचान चाहिए, वहां पेद्दी नाम का शख्स है जो कमाल का खिलाड़ी है और हर फन में माहिर है, वो अपने गांव को पहचान दिलवाने के लिए जो करता है वो आपको थिएटर जाकर देखना होगा.
कैसी है फिल्म
ये एक अच्छी फिल्म है,जो राम चरण की कमाल की एक्टिंग के लिए जरूर देखी जानी चाहिए. यहां कुछ नया करने की कोशिश की गई है. फर्स्ट हाफ खराब है, फर्स्ट हाफ में जरूरत से ज्यादा बिल्ड अप करने की कोशिश है. कहानी कनेक्ट नहीं करती, आपको लगने लगता है कि टिकट के पैसे बर्बाद हो गए लेकिन सेकेंड हाफ में फिर कमाल हो जाता है. राम चरण ऐसा काम करते हैं कि फिल्म की हर कमी को आप भूल जाते हैं. लास्ट में ऐसा मोनोलोग आता है कि आप इमोशनल हो जाते हैं. म्यूजिक अच्छा लगता है, बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के फील के हिसाब से जाता है. फिल्म की 3 घंटे की लंबाई अखरती जरूर है लेकिन सेकेंड हाफ में फिल्म आपको जोड़े रखती है. पहला हाफ बड़े आराम से छोटा किया जा सकता था. इस फिल्म की खासियत ये है कि ये रेग्यूलर साउथ टैंप्लेट फॉलो नहीं करती. कुछ अलग करने की कोशिश करती है जो कहीं कहीं अच्छा लगता है और कहीं कहीं काफी खराब लेकिन जिस तरह राम चरण ने खुद को इस फिल्म में झोंका है वो वाकई काबिले तारीफ है.
एक्टिंग
ये फिल्म एक ही शख्स के कंधे पर टिकी है और वो हैं राम चरण, उन्होंने अपने करियर के बेस्ट परफॉर्मेंस में से एक दिया है. वो जिस तरह हर खेल को खेलते हैं वो कमाल है. आपको उनको देखकर लगता है कि इस शख्स ने कैसे एक फिल्म के लिए खुद को पेद्दी बना डाला. उनकी एनर्जी, उनके एक्सप्रेशन, उनके इमोशन सब कमाल हैं और आखिरी के 20 मिनट में तो वो आपको खूब इमोशनल करेंगे. जगपति बाबू का काम काफी जबरदस्त है, वो एक अलग तरह के रोल में है. एक गांव वाले के रोल में उन्हें देखना चौंकाता है. कन्नड़ सुपरस्टार शिव राजकुमार ने भी अच्छा काम किया है. जाह्नवी कूपर ठीक ठाक हैं. वो ग्लैमर का तड़का लगाती हैं लेकिन यहां ओवर एक्टिंग करती दिखती हैं. दिव्येंदु काफी अच्छे लगे हैं. लेकिन उनका रोल और बड़ा होना चाहिए था पर उनके लिए ये बड़ा मौका था जो उन्होंने भुनाया. बोमन ईऱानी को बेहतर किरदार दिया जाना चाहिए था. रवि किशन छोटे से रोल में जमते हैं.
राइटिंग औऱ डायरेक्शन
Buchi babu sana की राइटिंग कमजोर है, वो बहुत कुछ करने के चक्कर में गड़बड़ कर गए. उन्हें फर्स्ट हाफ पर और अच्छे से काम करना चाहिए था, लेकिन सेकेंड हाफ में वो कसर पूरी कर देते हैं. डायरेक्शन सेकेंड हाफ में कमाल है, राम चरण का बेस्ट इस्तेमाल किया गया है.
म्यूजिक
ए आर रहमान का म्यूजिक अच्छा है, फिल्म के फील के हिसाब से म्यूजिक अच्छा लगता है.
कुल मिलाकर राम चरण के लिए ये फिल्म देखनी बनती है
रेटिंग- 3.5 स्टार्स



























