हम फिल्में क्यों देखते हैं, एंटरटेन होने के लिए और दिमाग फ्रेश करने के लिए, ये फिल्म यही करती है, ये आपको खूब एंटरटेन करती है, बहुत हंसाती है, और बहुत हंसाती है और बहुत ज्यादा हंसाती है, ये उन फिल्मों में से है जो आपको चौंका जाती हैं, तो अगर आप सिर्फ और सिर्फ एंटरटेन होना चाहते हैं तो थिएटर जाकर ये फिल्म देख लीजिए.

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कहानी - ये कहानी बिहार के मोतिहारी की है, जहां एक शादी हो रही होती है, लड़के के चाचा को एक दिमागी बीमारी है और वो हल्दी पर हंगामा के देते हैं कि पहले मेरी शादी करवाओ, फिर परिवार के 3 लोग उन्हें लेकर अस्पताल जाते हैं और ये सफर होता है गजब एंटरटेनिंग, क्या क्या होता है ये देखने आपको थिएटर जाना होगा.

कैसी है फिल्म - ये फिल्म शुरू से एंड तक प्योर एंटरटेनमेंट है, आप कई जगह तो पेट पकड़कर हंसते हैं, हर एक्टर आपको किरदार लगता है और फिल्म में बहुत सारे किरदार हैं, हर कोई अपने अपने तरीके से आपको एंटरटेन करता है. आपको इंतजार रहता है कि आगे क्या होगा, कॉमिक पंच जबरदस्त हैं, और फिल्म की पेस जबरदस्त है, आप कहीं बोर नहीं होते. हर थोड़ी देर में कुछ ऐसा होता है कि आप एंटरटेन होते हैं, ये फिल्म बताती है कि अच्छी फिल्म बनाने के लिए किसी बड़े बजट और बड़े सुपरस्टार की जरूरत नहीं, कहानी और किरदारों में दम हो तो अच्छी फिल्म बन सकती है.

एक्टिंग - आशुतोष राणा का ये सबसे अलग किरदार है, एक दिमागी बीमारी के मरीज के किरदार को वो जैसे निभा गए वो गजब है, वो कई जगह आपको इतने मासूम लगेंगे कि उनपर प्यार आ जाएगा और आप हैरान होंगे कि यही वो एक्टर है जो खतरनाक विलेन बन चुका है. अभिमन्यु सिंह गैंगस्टर के रोल में जान डाल देते हैं, अनंत विजय की कॉमिक टाइमिंग कमाल है, हर्ष मयूर काफी इंप्रेस करते हैं, ये रोल उनपर काफी सूट किया है. चितरंजन गिरि बढ़िया हैं, अशोक पाठक तो खैर अच्छा ही काम करते हैं. नायरा बनर्जी अच्छी लगी हैं.

डायरेक्शन - अभिषेक राज खेमका और रजनीश ठाकुर का काम बढ़िया है, उन्होंने फिल्म को एंटरटेनिंग बनाया है और हर किरदार का सही इस्तेमाल किया है.

कुल मिलाकर ये फिल्म देखिए

रेटिंग -3.5 स्टार्स