ये फिल्म महीना पहले रिलीज होनी थी, ये टाल दिया गया, अब हुई तो सामने 'सैयारा' और 'तन्वी द ग्रेट' जैसी फिल्में थीं जिन्हें खूब हाइप और प्रमोशन मिला. बहुत लोगों को पता भी नहीं कि ये फिल्म आ रही है. फिल्म का प्रमोशन भी कम हुआ और फिल्म से उम्मीदें भी कम थीं लेकिन ये फिल्म चौंकाती है. एक अहम मुद्दे पर बनी एक अच्छी फिल्म जो आप बेझिझक देख सकते हैं
कहानी- एक शख्स अंधविश्वास के खिलाफ काम करता है. ऐसे लोगों और बाबाओं की पोल खोलता है जो अंधविश्वास फैलाते हैं, लेकिन उसे एक बाबा कहता है कि वो 3 दिन में मर जाएगा और वाकई 3 दिन बाद उसकी मौत हो जाती है. अब उसकी बहन निकिता रॉय यानी सोनाक्षी सिन्हा उसकी मौत की वजह का पता लगाती है और चौंकाने वाली बातें सामने आती हैं. क्या होता है, ये आपको थियेटर जाकर देखना होगा.
कैसी है फिल्म- बिना उम्मीदों के रिलीज हुई ये फिल्म आपको सरप्राइज कर देती है. फिल्म को काफी अलग तरह से बनाया गया है. शुरू से ही फिल्म आपको बांध लेती है. बेकार का टाइम बर्बाद नहीं किया जाता. आप जानना चाहते हैं कि आगे क्या होगा.
2 घंटे से भी कम टाइम में फिल्म खत्म हो जाती है और पूरी फिल्म के दौरान आप फोन चेक नहीं करते क्योंकि कुछ न कुछ दिलचस्प होता रहता है. विदेशी लोकेशंस कमाल लगते हैं. कुछ सीन आपको काफी हैरान करते हैं और कुल मिलाकर आपको लगता है कि ये फिल्म जितना इसे मिला है उससे कहीं ज्यादा डिजर्व करती है.
एक्टिंग- सोनाक्षी सिन्हा का काम अच्छा है. वो उस किरदार में सूट करती हैं. उन्होंने मेच्योर एक्टिंग की है. बेकार की ओवर एक्टिंग या ड्रामा बिल्कुल नहीं किया. परेश रावल बाबा के किरदार में असर छोड़ते हैं. अर्जुन रामपाल बढ़िया लगे हैं. सुहैल नय्यर का काम काफी अच्छा है. इश्क में इंसान क्या कुछ कर सकता है ये उनका किरदार अच्छे से बताता है.
डायरेक्शन- कुश सिन्हा ने पहली फिल्म ऐसी चुनी ये हैरानी की बात है और इसे वो ठीक से बना गए ये और भी हैरानी की बात है. इस फिल्म पर उनकी पकड़ दिखती है. फिल्म की लंबाई हो या किरदारों का इस्तेमाल,उन्होंने ये काम अच्छे से किया है. पहली फिल्म के लिहाज से उनका काम बढ़िया कहा जाएगा.
कुल मिलाकर ये फिल्म देखी जा सकती है.
रेटिंग - 3 स्टार
