'मिनियंस एंड मॉन्स्टर्स' रिव्यू: पूरी टिकट के पैसे में आधा ही एंटरटेन करते हैं मिनियंस, मजा नहीं आएगा
Minions and Monsters Review: एनिमेटेड फिल्म 'मिनियंस एंड मॉन्स्टर्स' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. अगर आप ये फिल्म देखने का प्लान बना रहे है, तो यहां फिल्म का रिव्यू जरूर पढ़ लें.
पियरे कॉफिन
पियरे कॉफिन, ट्रे पार्कर
सिनेमाघरों
इस बार 'मिनियंस एंड मॉन्स्टर्स' उतना एंटरटेन नहीं कर पाए. पुरानी फिल्मों के मुकाबले फीकी निकली 'मिनियंस एंड मॉन्स्टर्स'. ये फिल्म बच्चों के लिए है, लेकिन इसके पहले वाले पार्ट्स में बड़ों का भी ध्यान रखा गया था. मिनियंस वो फ्रेंचाइजी है जो हमेशा से एंटरटेन करती रही है और खूब एंटरटेन करती रही है. इसकी कहानी, इसकी एनिमेशन, हर चीज ऑडियन्स खूब इंजॉय करती है, लेकिन इस बार ये मिनियंस एंटरटेन तो करते हैं, लेकिन उतना नहीं जितना इनसे उम्मीद की जाती है, इस बार ऐसा लगता है कि पूरी टिकट के पैसे में आधा एंटरटेनमेंट ही दिया है, आधी फिल्म तो एंटरटेनिंग लगती है, लेकिन पूरी फिल्म थोड़ी हल्की पड़ जाती है.
कहानी- फिल्म की कहानी शुरू होती है एक फिल्म हिस्ट्री म्यूजियम से, जहां कुछ लोगों को Minion, James और Henry की कहानी बताई जाती है, कि किस तरह से मिनियंस अपने मास्टर की तलाश कर रहे थे, और गलती से वो अपने हर मास्टर को मार दिया करते थे और फिर अचानक मिनियंस पहुंच जाते हैं हॉलीवुड, जहां वो गलती से एक फिल्म के सेट पर तोड़-फोड़ मचा देते हैं, डायरेक्टर को गुस्सा आ जाता है, लेकिन फिल्म के प्रोड्यूसर्स को मिनियंस की ये हरकत अच्छी लगती है, और वो मिनियंस को फिल्मों में काम दे देते हैं,उस वक्त साइलेंट फिल्में बना करती थीं, लेकिन जब फिल्मों में साउंड का इस्तेमाल होने लगा, तो मिनियंस को काम मिलना बंद हो गया, इसके बाद मिनियंस क्या करते हैं, वो अपनी एक फिल्म बनाते हैं, और वो फिल्म कैसे बनती है, यही इस फिल्म में दिखाया गया है
कैसी है फिल्म- फिल्म का फर्स्ट हाफ बिल्ड अप में जाता है. फिल्म के फर्स्ट हाफ में मिनियंस बस अपने मास्टर्स को मारते रहते हैं, मारते रहते हैं, और इंटरवल होने तक फिल्म मुद्दे पर आती है. फिल्म आपको बीच-बीच में कुछ पार्ट्स में एंटरटेन तो करती है, हंसाती भी है, एनिमेशन भी ठीक-ठाक लगता है, लेकिन उतना नहीं जितना मिनियंस से उम्मीद की जाती है. सेकेंड हाफ में फिल्म अपनी असली कहानी पर आती है, लेकिन यहां एंटरटेनमेंट का डोज़ उतना बढ़िया नहीं लगता, जितना मिनियंस जैसी फिल्म से उम्मीद की जाती है. आपको हंसी तो आती है, लेकिन बीच-बीच में बहुत कम सीन्स पर. इस तरह की फिल्म में आप लगातार एंटरटेन होना चाहते हैं और खासतौर पर तब जब फिल्म सिर्फ 90 मिनट की हो.
जी हां, ये 90 मिनट की फिल्म आपको सिर्फ बीच-बीच में थोड़ा बहुत एंटरटेन कर पाती है. हां, बच्चों को हो सकता है ये फिल्म ठीक-ठाक लगे, जी हां, ठीक-ठाक इसलिए क्योंकि आजकल कंटेंट बहुत ज्यादा आ रहा है और अलग-अलग तरह का आ रहा है. इसलिए हो सकता है बच्चे भी इस फिल्म को उतना पसंद ना करें जितना पहले की फिल्मों को किया गया है. कुल मिलाकर ये एक एवरेज टाइप की फिल्म है. जिसे आप बच्चों को दिखा सकते हैं अगर कुछ दिखाने को नहीं है, और थिएटर्स जाना ही जाना हो.
वॉइस एक्टिंग- ये एनिमेशनल फिल्म है तो जाहिर है यहां पर वॉइस एक्टिंग की ही बात की जाएगी. पियरे कॉफिन ने मिनियंस के कैरेक्टर को बढ़िया तरीके से डब किया है, उनकी आवाज मजेदार है, एक्सप्रेशन बढ़िया हैं, मजा आता है. ट्रे पार्कर ने गुमी के कैरेक्टर को डब किया है और वो भी अपना काम बखूबी कर गए हैं. Alison Cheney Olivia बने हैं जो टूर गाइड हैं, और ये भी आपको खूब हंसाते हैं, और अपनी आवाज का जादू चला जाते हैं. बाकी के किरदारों की आवाज भी बढ़िया है, मजा आता है सुनकर
राइटिंग और डायरेक्शन - फिल्म को लिखा है ब्रायन लिंच और पियरे कॉफिन ने डायरेक्ट किया है पियरे कॉफिन ने,देखिए, राइटिंग कमजोर लगती है, ऐसा लगता है कि बस ये फ्रेंचाइजी बना दी गई, जैसे कि बॉलीवुड में आजकल हो रहा है, डायरेक्शन भी ठीक-ठाक ही है, जाहिर है हॉलीवुड फिल्म है तो एनिमेशन बढ़िया है.
कुल मिलाकर ये फिल्म पहले के मुकाबले कमजोर है, अब आपकी मर्जी है कि आप देखना चाहते हैं या नहीं
रेटिंग – 2 स्टार्स

























