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का होता है मेरिट और एक्सपीरियंस? बिना मौका दिए ना मेरिट पता चलता है और ना एक्सपीरियंस, रानी भारती बनीं हुमा कुरैशी जब इस सीरीज में ये डायलॉग बोलती हैं तो काफी रिलेबेटबल लगता है, क्योंकि हुमा को जब मौका मिला तो उन्होंने दिखा दिया कि वो कमाल की एक्ट्रेस हैं.

महारानी हुमा की पहचान बन चुकी है. इस सीरीज का अपना एक अलग फैन बेस है और इस बार भी ये सीरीज देखकर लगा कि ये हमारे देश में बनी सबसे कमाल की और हार्ट हिटिंग पॉलिटिकल सीरीज में से एक है. 8 एपिसोड की ये सीरीज आपको पलक झपकने का मौका नहीं देती. कमाल की राइटिंग, जबरदस्त परफॉर्मेंस और शानदार पेस, सोनी लिव पर ये सीरीज पहली फुर्सत में देख डालिएगा.

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कहानी- इस बार रानी भारती सेंटर की राजनीति में दखल देती हैं. केंद्र में सरकार को रानी का समर्थन चाहिए लेकिन रानी मना कर देती है और इसके बाद शुरू होता है गठजोड़ की राजनीति का एक गंदा खेल. रानी को अब पीएम बनना है. क्या वो पीएम बन पाएंगी, ये देखने के लिए आपको ये सीरीज देखनी होगी.

कैसी है सीरीज- हर सीजन की तरह महारानी का ये चौथा सीजन भी कमाल है. पहले सीन से ये आपको बांध लेता है. राइटिंग में धार है और राइटिंग किसी भी फिल्म या सीरीज की रीढ़ होती है और यहां ये रीढ़ काफी मजबूत है. चाहे रानी और उनके परिवार के बीच के इमोशनल सीन हों या फिर राजनीति के दांव पेंच वाले सीन, हर सीन को कमाल तरीके से उसके फील के हिसाब से लिखा गया है.

रानी भारती की बेटी बनी श्वेता जब मुख्यमंत्री बनकर भाषण देती हैं तो एक मां के तौर पर रानी के इमोशन और फिर मुख्यमंत्री बनकर श्वेता का रानी की तरह दहाड़ना, रानी के मंझले बेटे को ये लगना कि उसके साथ परिवार में नाइंसाफी हुई है, रानी का उसे समझाना, पीएम ऑफिस में जाकर ये कहना कि अगली बार पीएम बनकर यहां आऊंगी. हर एक सीन अपने आप में जबरदस्त है.

आप इस सीरीज को फास्ट फॉरवर्ड नहीं करेंगे क्योंकि आप इसे एन्जॉय करेंगे. आपको आज की राजनीति के जुमलेबाजी जैसे शब्द भी सुनने को मिलेंगे. आपको ये अहसास भी होगा कि राजनीति वाकई किस हद तक जा सकती है, और राजनेताओं के भी इमोशन होते हैं.

एक्टिंग- हुमा कुरैशी इस सीरीज की जान हैं. उनकी डायलॉग डिलीवरी, बॉडी लैंग्वेज, अग्रेशन, सब कमाल है. हुमा इस किरदार को जीती हैं. वो इस किरदार में रानी भारती ही लगती हैं. जिस अथॉरिटी से वो ये किरदार निभाती हैं वो अपने आप में एक मिसाल है. भाषा पर उनकी पकड़ गजब की है. जब उनकी बेटी बनी श्वेता भाषण देती हैं तो एक मां के तौर पर हुमा जो एक्सप्रेशन देती हैं वो वाकई उनके कमाल के एक्टर होने का बड़ा प्रूफ है.

विपिन कुमार शर्मा ने पीएम के किरदार में जान डाल दी है. श्वेता बासु प्रसाद ने हुमा की बेटी के किरदार में कमाल कर दिया है. वो एक नेता से जिस तरह से कहती हैं कि पीछे मुड़िए आपकी पूंछ देखनी है वो सीन देखकर आपको उनकी एक्टिंग रेंज का अंदाजा होता है.

शार्दुल भारद्वाज ने हुमा के बेटे के किरदार में अच्छी छाप छोड़ी है. कनि कसरूती काफी इम्प्रेस करती हैं. प्रमोद पाठक, विनीत कुमार सिंह इस सीरीज में एक अलग जान लेकर आते हैं. राजेश्वरी सचदेव और दर्शील सफारी का काम भी अच्छा है. इस सीरीज की कास्टिंग मुकेश छाबड़ा ने की है जो कमाल के कलाकार ढूंढने और उन्हें अलग अलग किरदारों में फिट करने में माहिर हैं.

राइटिंग और डायरेक्शन- सुभाष कपूर, नंदन सिंह और उमा शंकर सिंह ने सीरीज को लिखा है. पुनीत प्रकाश ने डायरेक्ट किया है और ये सब इस सीरीज के हीरो हैं. बिना अच्छी राइटिंग के अच्छी सीरीज नहीं बनाई जा सकती है. बिना जबरदस्ती के म्यूजिक और मेलोड्रामा के असरदार राइटिंग और जबरदस्त परफॉर्मेंस के इस सीरीज को जिस तरह से बनाया गया है, वो सीखने वाली बात है कि एक अच्छी सीरीज कैसे बनाई जा सकती है.

कुल मिलाकर ये सीरीज हर हाल में देखिए.

रेटिंग- 4 स्टार्स