Do Deewane Seher Mein Review: ये क्यूट लव स्टोरी काफी ज्यादा रिलेटेबल है, सिद्धांत चतुर्वेदी-मृणाल ठाकुर ने दिखाया डर के आगे जीत है
Do Deewane Seher Mein Review: सिद्धांत चतुर्वेदी और मृणाल ठाकुर की दो दीवाने शहर में सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. देखने की प्लानिंग है तो पहले इसका रिव्यू पढ़ लीजिए.
रवि उदयवार
सिद्धांत चतुर्वेदी, मृणाल ठाकुर, इला अरुण, संदीपा धर, आयशा रजा, जॉय सेन गुप्ता
थिएटर
लड़का भी परफेक्ट नहीं है, लड़की भी परफेक्ट नहीं है, दोनों को लगता है उनमें कोई ना कोई कमी है, ऐसे में इश्क कैसे होगा, और इश्क होगा तो कबूल होगा और ये दोनों अपनी अपनी कमियों या कह लीजिए अपने अपने डर पर जीत पा पाएंगे? लव स्टोरीज तो आपने काफी देखी होंगी, फिल्मी लव स्टोरीज में हीरो हीरोइन कमाल के दिखते हैं, और लव स्टोरी में कोई ट्विस्ट आता है लेकिन यहां तो हीरो हीरोइन दोनों में ही ट्विस्ट है और इसलिए ये लव स्टोरी क्यूट भी है और आप इससे रिलेट भी करेंगे. अब असल जिंदगी में भी कितने लड़के परफेक्ट होते हैं और कितनी लड़कियां परफेक्ट होती हैं, यहां भी नहीं हैं और यही चीज इस लव स्टोरी को काफी रिलेटेबल बनाती है.
कहानी
ये कहानी है शशांक या फिर कहें ससांक की जो श को स बोलता है और मिलती है रोशनी यानि रोसनी से जो मोटा सा चश्मा लगाती है. रोशनी ऐसी है कि जब कोई लड़का उससे पूछता है कि तुमने कॉन्टेक्ट लैंस लगाने का नहीं सोचा तो वो कहती है तूमने ब्रेन इंप्लांट का नहीं सोचा. जबकि शशांक ऐसा है जिसे अगर प्रेजेंटेशन देने को कह दिया जाए तो वो रिजाइन कर देता है. अब इन दोनों में कमियां हैं, तो क्या दोनों में प्यार होगा, क्या ये पहली नजर का प्यार होगा, और प्यार होगा तो क्या होगा, क्या ये दोनों अपनी अपनी कमियों यानि अपने अपने डर पर जीत पा लेंगे? ये देखने के लिए आपको फिल्म देखने थिएटर जाना होगा.
कैसी है फिल्म
ये एक क्यूट फिल्म है जो काफी रिलेटेबल है, असर जिंदगी में भी हमारे अंदर कोई ना कोई कमी तो होती है ना, हम हीरो हीरोइन की तरह पिक्चर परफेक्ट तो नहीं होते, और यही वजह है कि आप इस फिल्म से रिलेट करते हैं. सिद्धांत और मृणाल की केमिस्ट्री आपका दिल जीत लेती है, फिल्म एक दम हल्की फुल्की है. हल्के फुल्के अंदाज में बड़ी बातें कह देती है. आपको गहरी बातें समझा जाती है, बीच बीच में गाने आते हैं जो ब्रीदर का काम करते हैं. फिल्म एक अच्छी पेस पर चलती है, ऐसा कोई बड़ा ट्विस्ट नहीं आता जो आपका दिल दहला दे, लेकिन इन लव स्टोरी में ऐसा कुछ जरूर होता है जो दिल जीत लेता है. ये एक फील गुड फिल्म जिसे देखने में मजा आता है, दोनों किरदार आपके साथ जुड़ जाते हैं. आप इनके साथ जुड़ जाते हैं, इनकी जिंदगी में भी हमारी जिंदगी जैसी ही दिक्कतें आती हैं, कुछ भी फिल्मी नहीं होता और इसलिए ये लव स्टोरी फिल्मी नहीं लगती है, रियल लगती है और इसे देखने में मजा आता है.
एक्टिंग
सिद्धांत चतुर्वेदी ने कमाल का काम किया है, उन्हें देखकर वाकई में लगता है कि इस लड़के में कॉन्फिडेंस की कमी है. सिद्धांत ने अपने किरदार को कमाल तरीके से निभाया है, या ये कह लीजिए जिया है, वो आपको ससांक ही लगते हैं, और आपके दिल में उतर जाते हैं. जब वो प्रेजेंटेशन देते हैं तो आपको लगता है कि अरे यहां ये बस बोल ले किसी भी तरह. मृणाल ठाकुर बहुत क्यूट और बहुत प्यारी लगी हैं, एक सीन में वो सिद्धांत का कार की तरफ चलती हुई आती हैं और जिस तरह से वो आती हैं ना, आप अपने आसपास बहुत सी लड़कियों को वैसे ही चलते हुए देखेंगे. इला अरुण काफी अच्छी लगती हैं, संदीपा धर ने काफी प्यारा किरदार निभाया है. आयशा रजा दिल जीत लेती हैं. जॉय सेनगुप्ता ने बढ़िया काम किया है.
राइटिंग और डायरेक्शन
अभिरुचि चांद ने फिल्म लिखी है और रवि उदयवार ने फिल्म डायरेक्ट की है. राइटिंग बढ़िया और रिलेटेबल है, आप कनेक्ट होंगे, डायरेक्शन अच्छा है, थोड़ा सा स्क्रीप्ले और बेहतर होता तो ये फिल्म और कमाल लगती.
कुल मिलाकर एक क्यूट और रिलेटेबल फिल्म देखनी है तो जरूर देखिए
रेटिंग -3.5 स्टार्स




























