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Disclosure Day Review: स्टीवन स्पीलबर्ग की ये साइंस-फिक्शन फिल्म जरूर देखिए, एलियंस को नए नजरिए से दिखाया गया है

Disclosure Day Review: स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म 'डिस्क्लोजर डे' रिलीज हो चुकी है. अगर आप इस फिल्म को देखने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आइए पहले इसका रिव्यू जान लीजिए.

स्टीवन स्पीलबर्ग का एलियंस के साथ कनेक्शन या रिलेशन हम सब जानते हैं. ऐसा लगता है कि एलियंस ने कहीं न कहीं कभी उनसे आकर कुछ कहा होगा. इस फिल्म में स्टीवन स्पीलबर्ग हमें एक नई दुनिया में लेकर जाते हैं और उनकी फिल्मों की यही सबसे बड़ी खासियत है कि वो हमें हमेशा ऐसा कुछ दिखा जाते हैं जो हमने न पहले सुना होता है और न ही देखा होता है. यह फिल्म भी हमें एक नई दुनिया में लेकर जाती है, कुछ नया दिखाती है, कुछ नया समझाती है और एलियंस के बारे में हमारी सोच बदलने की कोशिश करती है. आखिर ये ''डिस्क्लोजर डे" क्या है, इसका जवाब आपको फिल्म देखकर ही मिलेगा.

कहानी
कहानी एक साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट की है जिसके हाथ कुछ ऐसी जानकारी लग जाती है जिसे सरकार लोगों से छिपाना चाहती है. इसके बाद एक रहस्यमयी एजेंसी उसके पीछे पड़ जाती है और उसके साथ कई अजीब घटनाएं होने लगती हैं.

इसी दौरान उसकी मुलाकात एक न्यूज रीडर से होती है. इस न्यूज रीडर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह सामने वाले का दिमाग पढ़ सकती है. एक बार जब एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी उसे रोकता है तो वह तुरंत बता देती है कि सुबह उसकी अपनी पत्नी से लड़ाई हुई थी. उसकी यह क्षमता देखकर हर कोई हैरान रह जाता है.

अब यह न्यूज रीडर और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट उस गुप्त जानकारी का क्या करेंगे? वे उस एजेंसी से कैसे बचेंगे जो किसी भी कीमत पर इस सच को दुनिया के सामने नहीं आने देना चाहती? और क्या यह न्यूज रीडर अपने न्यूज बुलेटिन के जरिए उस जानकारी को पूरी दुनिया तक पहुंचा पाएगी? इन सवालों के जवाब जानने के लिए आपको थिएटर जाना पड़ेगा.

कैसी है फिल्म 
ये एक अलग तरह की फिल्म है. आखिर यह स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म है, और अगर आप साइंस-फिक्शन फिल्मों के शौकीन हैं तो आपको यह फिल्म हर हाल में देखनी चाहिए, फिल्म आपको एक नई दुनिया में ले जाती है. इसमें बेवजह का एक्शन नहीं ठूंसा गया है, लेकिन जो एक्शन और चेज़ सीक्वेंस हैं, वे कमाल के हैं. खास तौर पर एक ट्रेन सीक्वेंस बेहद शानदार है, जहां इन दोनों की गाड़ी एक ट्रेन से टकरा जाती है और ट्रेन में फंसकर आगे बढ़ने लगती है. तभी सामने से दूसरी ट्रेन आ जाती है. यह पूरा सीक्वेंस आपकी सांसें रोक देता है, फिल्म एलियंस को लेकर भी आपकी सोच बदलने की कोशिश करती है. क्या एलियंस हमेशा बुरे ही होते हैं? क्या वे अच्छे नहीं हो सकते? फिल्म इन सवालों को एक नए नजरिए से पेश करती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है, करीब ढाई घंटे लंबी यह फिल्म आपको शुरू से आखिर तक बांधे रखती है. अगर आप स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्मों के फैन हैं तो यह फिल्म आपको बेहद पसंद आएगी. और अगर आपको साइंस-फिक्शन फिल्में पसंद हैं, तो यह फिल्म आपके लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है.

एक्टिंग
Emily blunt ने कमाल का काम किया है. एमिली ही वो न्यूज रीडर हैं जिनके पास कुछ अलग तरह की शक्तियां आ जाती हैं. उन्होंने इस किरदार को जिस तरह से निभाया है, उसे देखकर आप आसानी से मान लेते हैं कि उनके पास सच में ये शक्तियां मौजूद हैं. उनकी स्क्रीन प्रेजेंस शानदार है और उन्होंने अपने किरदार की भावनाओं और रहस्यमय पक्ष को बेहतरीन तरीके से पेश किया है. Josh O'connor उस शख्स के किरदार में हैं जिसके पास सारी अहम जानकारी है. जिस तरह से वो इस जानकारी को छिपाने की कोशिश करते हैं, जिस तरह से भागते हैं और हर समय दबाव में दिखाई देते हैं, उनके एक्सप्रेशंस और बॉडी लैंग्वेज इस किरदार के लिए बिल्कुल परफेक्ट लगते हैं. उन्होंने अपने रोल को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है. Colin firth का काम भी बहुत अच्छा है और वह अपने हिस्से के दृश्यों में प्रभाव छोड़ते हैं. Eve hewson ने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है और कहानी में उनकी मौजूदगी अहम लगती है, comman domingo ने भी अच्छी एक्टिंग की है और अपने किरदार को मजबूती के साथ निभाया है.

राइटिंग और डायरेक्शन
स्टीवन स्पीलबर्ग ने इस कहानी को लिखा है और इसका निर्देशन भी खुद किया है. कहानी की बात करें तो स्टीवन ने एक बार फिर कुछ अलग करने की कोशिश की है. उन्होंने ऐसा कॉन्सेप्ट पेश करने का प्रयास किया है जो मुख्यधारा के सिनेमा में बहुत कम देखने को मिलता है. यही स्टीवन स्पीलबर्ग की सबसे बड़ी खासियत है कि वे ऐसी फिल्में बनाते हैं जो अक्सर अपने समय से आगे होती हैं. इस फिल्म में भी वह सिर्फ मनोरंजन नहीं करते, बल्कि दर्शकों को नए विचारों और संभावनाओं के बारे में सोचने पर मजबूर करते हैं. डायरेक्शन बेहद शानदार है. स्टीवन ने जिस दुनिया को क्रिएट किया है, वह वाकई कमाल की है. फिल्म का माहौल, इसके विजुअल्स और इसकी कहानी कहने का तरीका दर्शकों को पूरी तरह अपने साथ जोड़कर रखता है. स्टीवन स्पीलबर्ग ऐसे फिल्ममेकर हैं जो सिर्फ फिल्में नहीं बनाते, बल्कि हर बार फिल्ममेकिंग को एक कदम आगे ले जाने की कोशिश करते हैं और यह बात इस फिल्म में भी साफ दिखाई देती है.

कुल मिलाकर अगर आप स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्मों के फैन हैं या साइंस-फिक्शन सिनेमा पसंद करते हैं, तो ये फिल्म बिल्कुल मिस नहीं करनी चाहिए.

रेटिंग -3.5 stars

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