चरक रिव्यू: डुप्लीकेट कांतारा की भी पायरेटेड कॉपी, पूरी फिल्म झेल पाना भी होगा मुश्किल
Charak : Fair Of Faith Review: इस फिल्म की कहानी चरक उत्सव के बारे में बताती है या बताने का दावा करती है. ये हजार साल पुरानी परंपरा बंगाल, बिहार, असम समेत कोई जगहों पर मनाई जाती है.
शिलादित्य मौलिक
अंजली पाटिल, साहिदुर रहमान, सुब्रत दत्ता, शशि भूषण और नवनीश नील
थिएटर
इस फिल्म का ट्र्रेलर देखकर लगा था कि ये 'कातांरा' जैसी कोई कहानी होगी लेकिन ये तो डुप्लीकेट कांतारा की भी पायरेटेड कॉपी निकली. ना तो ये फिल्म बन पाई, ना डॉक्यूमेंट्री बन पाई और ना कुछ और. इस फिल्म को देखकर समझ नहीं आया कि इसमें चरक को दिखाना था, नर बलि दिखानी थी, मर्डर मिस्ट्री दिखानी थी या मेकर खुद ही कनफ्यूज थे कि वो दिखाना क्या चाहते हैं.
कहानी- इस फिल्म की कहानी चरक उत्सव के बारे में बताती है या बताने का दावा करती है. ये हजार साल पुरानी परंपरा बंगाल, बिहार, असम समेत कई जगहों पर मनाई जाती है. इस उत्सव के दौरान कुछ लोग बलि भी देने की बात कहते हैं, अंधविश्वास भी फैलाया जाता है. इसी दौरान दो बच्चे गायब हो जाते हैं और फिर पूरी फिल्म यही पता करने में बीत जाती है कि वो बच्चे गए कहां. चरक के बारे में कुछ नहीं बताया जाता है जो फिल्म की मुख्य कहानी मानी जा रही थी.
कैसी है फिल्म- ये एक बिल्कुल बेकार फिल्म है, फिल्म को पूरा देख पाना ही मुमकिन नहीं होगा. फिल्म क्या कहना चाहती है ये समझ नहीं आता. ना तो ये फिल्म लगती है, ना डॉक्यूमेंट्री, ना मर्डर मिस्ट्री. ऐसा लगता है मेकर खुद ही कन्फ्यूज हैं. ना तो फिल्म का प्रोडक्शन वैल्यू ग्रेट लगती है, ना ट्रीटमेंट. फिल्म कई जगह इतनी बोरिंग लगती है कि आप थिएटर छोड़कर जाना चाहेंगे. आपको लगता है ये फिल्म 'कातांरा' की तरह हमें एक और प्रथा के बारे में बताएगी लेकिन ऐसा आप सोचते ही रह जाते हैं. फिल्म कहीं आपको बांध नहीं पाती, एंड में एक ट्विस्ट डाला गया है लेकिन वो भी ऐसा नहीं है कि उसके लिए आप ये फिल्म देखें. कुल मिलाकर ये फिल्म निराश करती है और काफी निराश करती है.
एक्टिंग- अंजली पाटिल ने ठीक ठाक काम किया है. साहिदुर रहमान का काम भी ठीक है. सुब्रत दत्ता, शशि भूषण और नवनीश नील का काम भी ठीक है. कोई भी ऐसा एक्टर नहीं है जिसने आपको चौंका दिया हो. सबने अपना काम बस ठीक ठाक कर दिया है.
राइटिंग और डायरेक्शन - संजय हलदर और फारुक मलिक ने फिल्म लिखी है, शिलादित्य मौलिक ने फिल्म डायरेक्ट की है, राइटिंग और डायरेक्शन किसी में दम नहीं है, 'केरल स्टोरी' डायरेक्टर करने वाले सुदिप्तो सेन ने फिल्म प्रोड्यूस की है और इसी वजह से फिल्म की थोड़ी बहुत चर्चा भी है लेकिन ये फिल्म निराश करती है.
कुल मिलाकर ये फिल्म मत ही देखिए
रेटिंग -1 स्टार




























