Bhabiji Ghar par hain review: भाभीजी आप घर पर ही रहिए, थिएटर में नहीं, ये फिल्म टॉर्चर कर देगी
Bhabiji Ghar Par Hain Review: हर मर्द को हमेशा पड़ोसी की बीवी अच्छी लगी है, ये इस फिल्म के शुरू में कहा जाता है, लेकिन क्या हर मर्द ऐसा होता है?
शशांक बाली
शुभांगी अत्रे, रवि किशन, निरहुआ, विदिशा श्रीवास्तव, मुकेश तिवारी, आसिफ शेख, रोहिताश्व गौर
थिएटर
ये एक बेहद कामयाब सीरियल है, घर घर में देखा जाता है लेकिन इसकी फिल्म क्यों बनाई गई? सोने के अंडे देने वाली मुर्गी का पेट काटकर सारे अंडे निकालने वाली गलती क्यों की गई? अच्छे खासे सीरियल को इस फिल्म के जरिए बर्बाद किया गया है. पहले ही नए आईडियाज की कमी है, लोग थिएटर नहीं जा रहे, ऊपर से अगर ऐसी फिल्में बनेंगी तो सिनेमा पीछे ही जाएगा.
कहानी
'हर मर्द को हमेशा पड़ोसी की बीवी अच्छी लगी है', ये इस फिल्म के शुरू में कहा जाता है, लेकिन क्या हर मर्द ऐसा होता है? यहां अंगूरी भाभी का एक और दीवाना रवि किशन आ जाता है और अनीता भाभी का भी एक और दीवाना मुकेश तिवारी आ जाता है, अब क्या होगा ये देखने थिएटर मत जाइयेगा, प्लीज! भाभीजी को टीवी पर ही देखिए.
कैसी है फिल्म?
ये एक टॉर्चर है, सीरियल काफी अच्छा है, यहां उसे जबरदस्ती खींचा गया है. कई जगह घटिया डबल मीनिंग जोक्स मारे गए हैं जो बिल्कुल फनी नहीं लगते. आपको ऐसा लगता है कि आप इस सीरियल के पायरेटेड वर्जन को थिएटर में देख रहे हैं. ये फिल्म इस सीरियल के लिगेसी का भी अपमान करती है. इस सीरियल को पूरा परिवार साथ बैठकर देखता है लेकिन ये फिल्म देखने के बाद कहीं- कहीं वो एक्सपीरियंस भी अफेक्ट होगा. अगर इसे फिल्म की तरह बनाना था तो राइटिंग अच्छी होनी चाहिए थी. एक तरफ फिल्म वालों के पास ही नए आईडियाज की कमी है ऊपर से ऐसी फिल्म हो, जो अच्छे खासे सीरियल का कबाड़ा कर दे, ये देखकर गुस्सा भी आता है और कहीं न कहीं ये सिनेमा का अपमान भी लगता है.
एक्टिंग
सारे किरदार टीवी के किरदारों जैसी ही एक्टिंग करते हैं. वो आपको फिल्म के किरदार लगते ही नहीं क्योंकि उन्हें अपना किरदार ही निभाना था. रवि किशन और मुकेश तिवारी नए किरदार हैं लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट के आगे वो कुछ नहीं कर पाए. निरहुआ भी फिल्म में है और क्यों हैं, ये समझ से परे है. ये किरदार उनके कद के एक्टर के लिए नहीं था. रवि किशन का कद अब हिंदी सिनेमा में काफी ऊपर उठ गया है. तो अब उन्हें सोच समझकर ही फिल्में करनी चाहिए और इस तरह की फिल्मों से तो काफी दूरी बना लेनी चाहिए.
राइटिंग और डायरेक्शन
शशांक बाली, संजय कोहली और विहान कोहली ने फिल्म लिखी है. शशांक बाली ने डायरेक्ट की है, राइटिंग बहुत कमजोर है, फिल्म जैसी राइटिंग है ही नहीं , डायरेक्शन सीरियल जैसा ही है.
कुल मिलाकर इस सीरियल के पुराने एपिसोड घर पर ही देखिए.
रेटिंग - 1 स्टार


























