ऐसा नहीं है कि बॉलीवुड या साउथ वाले ही खराब फिल्में या फिर फिल्मों के खराब रीमेक बनाते हैं. इन दिनों हॉलीवुड वाले भी ये काम खूब कर रहे हैं. एनाकोंडा में भी यही किया गया है, ये फिल्म देखकर आपको लगेगा कि इसे बनाया ही क्यों गया, कॉमेडी बनाने के चक्कर में ये फिल्म अपनी ही हंसी उड़वा लेती है और आपको आएगा खुद पर गुस्सा की ये फिल्म क्यों देखी.

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कहानी

बांद्रा और बोरीवली के फिल्ममेकर्स की तरह 4 दोस्त तय करते हैं कि और कुछ करने को है नहीं तो फिल्म बनाते हैं लेकिन बॉलीवुड वालों की तरह, ओरिजिनल नहीं 1997 में आई एनाकोंडा का रीमेक. अब बजट है नहीं और यहां कोई बड़ा स्टार बजट नहीं ले गया, इनके पास पैसे थे ही नहीं. अब इस फिल्म को बनाने के दौरान कैसे असली एनाकोंडा मिल जाता है, यही कहानी है.

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कैसी है फिल्म

फर्स्ट हाफ में फिल्म में बस टाइम पास होता है, फिल्म की प्लानिंग होती रहती है. सेकेंड हाफ में जब आपको लगता है कुछ होगा फिल्म खत्म हो जाती है. जैसे एकता कपूर के सीरियल में होता है न कि मिहिर को गोली लगने वाली होती है, गोली रास्ते में होती है और एपिसोड खत्म वही यहां होता है लेकिन एकता एपिसोड में कुछ मसाला डालती हैं. यहां वो भी नहीं है, एनाकोंडा बहुत कम टाइम के लिए दिखता है. इससे ज्यादा बार तो कार्तिक आर्यन ने तू मेरा मैं तेरी में अपने सिक्स पैक एब्स दिखा दिए थे. जितने में आप कॉकरोच नहीं मार पाएंगे उतने में ये एनाकोंडा मार देते हैं. कुल मिलकर ये फिल्म निराश करती है.

एक्टिंग

पॉल रड, जेक ब्लैक, स्टीव जान, थैंडी न्यूटन सबने अच्छा काम किया है लेकिन फिल्म की कहानी और ट्रीटमेंट में ही दम नहीं है.

राइटिंग और डायरेक्शन

टॉम गोर्मिकन, केविन एटेन की राइटिंग काफी खराब है, न कोई जोक लैंड करता है और न इमोशनल कनेक्ट होता है. टॉम का डायरेक्शन एवरेज है.

कुल मिलाकर नागिन के पुराने एपिसोड देख लीजिए

रेटिंग - 2 स्टार्स