Adarsh Baal Vidyalaya Review: मजेदार है ये बेब सीरीज, एंटरटेन करने के साथ साथ कुछ सिखाएगी और समझाएगी भी
Adarsh Baal Vidyalaya Review: आदर्श बाल विद्यालय आज रिलीज हो गई है. अगर आप इस सीरीज को देखने की प्लानिंग कर रहे हैं तो पहले यहां इसका रिव्यू पढ़ लीजिए.
हिमांक गौर
केके मेनन, नवीन कस्तूरिया, अर्चना पूरन सिंह, अभिमन्यू सिंह, देवेन भोजानी, प्रसन्ना बिष्टा
ओटीटी
टीचर स्टूडेंट से पूछती है कि रिलेटिव विलोसिटी क्या होती है, स्टूडेंट जवाब देता है कि मम्मी जब भी कोई गलती करती है तो बुआ फुल स्पीड में आकर कलेश करती है, इसी को कहते हैं रिलेटिव विलोसिटी. सोचिए जिस स्कूल के बच्चे ऐसे जवाब देते हों वो कैसे आदर्श विद्यालय होगा. ये ऐसे ही एक स्कूल की कहानी है, ये सीरीज बड़े सधे हुए तरीके से हमारे एजुकेशन सिस्टम पर सवाल उठाती है. पैरेंट्स के बच्चों से रखी जाने वाली बड़ी बड़ी उम्मीदों पर सवाल उठाती है, और ये सब आपको एंटरटेन करते हुए होता है ताकि आपको ये ना लगे कि कोई आपको ज्ञान दे रहा है क्योंकि ज्ञान तो हमें चाहिए नहीं होता.
कहानी
ये कहानी है एक आदर्श ग्राम विद्यालय की जहां के बच्चों को पढ़ाई के अलावा बाकी हर चीज में दिलचस्पी है. स्कूल के हेडमास्टर ज्ञानेश्वर त्रिपाठी बच्चों के साथ ही क्रिकेट खेलते रहते हैं और जब उन्हें पता चलता है कि अगर स्कूल का दसवीं का रिजल्ट अच्छा आया तो वो अपनी पत्नी के साथ विदेश घूमने जा सकते हैं तो वो लग जाते हैं बच्चों को पढ़ाने में, लेकिन स्कूल में सुविधाओं की काफी कमी है. ऐसे में ये सब कैसे होगा और क्या त्रिपाठी जी विदेश जा पाएंगे? यही प्राइम वीडियो पर आप 7 एपिसोड की इस सीरीज में देख सकते हैं.
कैसी है सीरीज
ये एक बढ़िया सीरीज है, ये सीरीज बच्चों की बात करती है, उनके पैरेंट्स की बात करती है, एजुकेशन सिस्टम की बात करती है, टीचर्स की बात करती है, और हर चीज को समझाती है. पहला एपिसोड कमाल है और सीरीज की पेस सेट हो जाती है, फिर ये बीच में थोड़ी सी ओवर ड्रामाटेकि होती है लेकिन मुद्दे पर बनी रहती है. आपको हल्के फुल्के अंदाज में चीजें दिखाई जाती हैं, समझाई जाती है और आपको मजा आता है. कई तरह की सिचुएक्शन दिखाई जाती हैं अलग अलग बच्चों के साथ जिन्हें देखकर आपको काफी कुछ सीख सकते हैं. ये सीरीज खिंचती नहीं है, एपिसोड लगभग 30 मिनट के हैं और ये एक अच्छी बात है कि कहीं आपको नहीं लगता कि आप बोर हो रहे हैं. थोड़ा सा ड्रामा जरूर कुछ लोगों को खल सकता है लेकिन वो काफी कम है. कुल मिलाकर ये एक जरूरी सीरीज भी है. आज भी हमारे देश के बहुत से स्कूलों का हाल बुरा है और ये इस सीरीज में कायदे से दिखाया गया है. सीरीज में कमाल के एक्टर हैं जो इस सीरीज में जान डाल देते हैं. ये सीरीज बिस्वपति सरकार ने बनाई है जो कभी टीवीएफ का खास हिस्सा रहे हैं और ये सीरीज बताती है कि टीवीएफ का खास हिस्सों वो क्यों थे.
एक्टिंग
केके मेनन ने कमाल का काम किया है, वो हेड मास्टर के रोल में खूब जमे हैं. उनकी कॉमिक टाइमिंग और मासूम अंदाज आपका दिल जीत लेगा. नवीन कस्तूरिया ने शानदार काम किया है, वो एक बेटी के पिता बने हैं,उनका अपनी बेटी के साथ रिश्ता आपको काफी इमोशनल करता है. अर्चन पूरण सिंह ने अच्छा काम किया है. कपिल के शो को उल्ट वो यहां बिल्कुल नहीं हंसती हैं. अभिमन्यू सिंह ने काफी वक्त बाद कुछ अलग काम किया है. हिंदी के टीचर के रोल में वो काफी जमे हैं. देवेन भोजानी नेता के किरदार में चौंकाते हैं. प्रसन्ना बिष्टा का काम अच्छा है.
राइटिंग औऱ डायरेक्शन
अक्षय अस्थाना और बिस्वपति सरकार ने कहनी लिखी है . कहानी को लिखने में कोई और लोगों का भी योगदान है और राइटिंग दमदार है, हिमांक गौर का डायरेक्शन काफी अच्छा है.
कुल मिलाकर ये देखने लायक सीरीज है
रेटिंग -3.5 स्टार्स





















