कुछ फिल्में सबके लिए नहीं होतीं, वो जब आती हैं तो क्रिटिसाइज होती हैं और बाद में सालों बाद उनकी तारीफ होती है. ये ऐसी ही फिल्म है, या तो ये किसी को छू जाएगी या फिर कुछ को लगेगा कि फिल्म की हीरोइन की तरह हमारी आंखों पर भी पट्टी होती, लेकिन फिल्म ठीक ठाक है, न ये बहुत खराब फिल्म है जिसको बेवजह ट्रोल किया जाए और न ही मास्टरपीस है.

कहानी- इस फिल्म की कहानी रस्किन बॉन्ड की शॉर्ट स्टोरी 'द आईज हैव इट' पर बेस्ड है. एक लड़की (शनाया कपूर) को हीरोइन बनना है और उसे एक ऐसी लड़की का किरदार निभाना है जो देख नहीं सकती, और कैरेक्टर में आने के लिए वो आंखों पर पट्टी बांध लेती है. उसकी मुलाकात एक ऐसे लड़के विक्रांत मैसी से होती है जो उसकी मदद करता है लेकिन वो खुद देख नहीं सकता लेकिन लड़की को लगता है वो देख सकता है. इनकी लव स्टोरी फिर कैसे डेवलप होती है,यही फिल्म में दिखाया गया है.

कैसी है फिल्म- ये एक ठीक ठाक फिल्म है. कमियों के बावजूद फिल्म देखने लायक है. फिल्म में कुछ नया करने की कोशिश की गई है. इस तरह की लव स्टोरी को पचाना थोड़ा मुश्किल है लेकिन सिनेमा तो यही करता है. वरना हम ये शिकायत तो करते रहते हैं कि कुछ नया नहीं बनता और जब बनता है तो हम कहते हैं ऐसा कैसे हो सकता है.

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी शानदार है. लोकेशंस को खूबसूरती से दिखाया गया है. बीच-बीच में कॉमिक पंच भी डाले गए हैं. 2 किरदार कैसे एक फिल्म को अपने कंधे पर लेकर चल सकते हैं वो आप इस फिल्म में देख सकते हैं. स्क्रीनप्ले और बेहतर हो सकता था. मसाले और डाले जा सकते थे, उससे यह फिल्म आजकल की वायलेंट फिल्में पसंद करने वाले लोगों को भी पसंद आती, लेकिन इस फिल्म को महसूस करने वालों को ये अच्छी लगेगी.

एक्टिंग- विक्रांत मैसी ने बढ़िया काम किया है. वो अच्छे एक्टर हैं इसमें कोई शक नहीं और इस फिल्म की देखने की सबसे बड़ी वजह वही हैं. वो उस रोल में फिट हैं. शनाया कपूर ने अच्छा डेब्यू किया है. उनकी स्क्रीन प्रेजेंस अच्छी है. वो लगती खूबसूरत हैं, एक्टिंग ठीक है , आगे और बेहतर करेंगी ऐसी उम्मीद वो जगाती हैं. बाकी अब किसी को नेपोकिड के नाम पर उनको ट्रोल ही करना है तो कुछ किया नहीं जा सकता. सानंद वर्मा का काम काफी अच्छा है. जैन खान दुर्रानी अच्छे लगे हैं.

राइटिंग और डायरेक्शन- मानसी बागला ने फिल्म लिखी है और संतोष सिंह ने डायरेक्ट की है. स्क्रीनप्ले बेहतर हो सकता था, मसाले डाले जा सकते थे, वहां से फिल्म मात खाती है, डायरेक्शन अच्छा है.

कुल मिलाकर फिल्म देखी जा सकती है

रेटिंग - 3 स्टार्स