Aakhri Sawal Review | आरएसएस पर बनी सबसे कंट्रोवर्शियल और हार्ड हिटिंग फिल्म, संजय दत्त, नमाशी चक्रवर्ती का कमाल का काम
Aakhri Sawal Review: संजय दत्त स्टारर आरएसएस पर बनी फिल्म आखिरा सवाल आज 15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. इसे देखने की प्लानिंग है तो पहले इसका रिव्यू पढ़ लीजिए.
अभिजीत मोहन वारंग
संजय दत्त, नमाशी चक्रवर्ती, अमित साध, नीतू चंद्रा
थिएटर्स
आरएसएस एक ऐसी संस्था है, जिस पर कई लोग सवाल उठाते रहे. कुछ लोग आरएसएस के समर्थक हैं, तो कुछ विरोधी. ये फिल्म आरएसएस से जुड़े कई सवालों का जवाब देती है. और बड़े सटीक तरीके से देती है. आरएसएस का महिमामंडम किए बिना. ये फिल्म कंट्रोवर्सी तो करती है, लेकिन अपनी राइटिंग से. यह फिल्म शोर तो करती है, लेकिन अपने डायलॉग्स से. यह फिल्म बताती है की आरएसएस जैसी संस्था पर भी बिना पॉलिटिकल हुए फिल्म बनाई जा सकती है
कहानी- यह कहानी है एक गुरु और शिष्य की. गुरु संजय दत्त और शिष्य नमाशी चक्रवर्ती. नमाशी ने आरएसएस पर एक थीसिस बनाई है और वो ये साबित करना चाहता है कि आरएसएस अच्छी संस्था नहीं है. उसके सामने उसके गुरु संजय दत्त हैं, वो संजय दत्त से कुछ सवालों के जवाब चाहता है और अगर उसे वो मिल गए, तो वो मान लेगा कि आरएसएस एक अच्छी संस्था है. इन्हीं सवालों के जवाबों पर बनी है ये फिल्म.
कैसी है फिल्म- क्या रस आजादी के वक्त कुछ नहीं कर रहा था. महात्मा गांधी की हत्या में क्या आरएसएस का हाथ था. बाबरी मस्जिद के गिरने में आरएसएस की क्या भूमिका थी. यह फिल्म ऐसे तमाम सवालों के जवाब देती है. और बड़े कंट्रोवर्शियल तरीके से देती है. फिल्म में आरएसएस का महिमा मंडन नहीं किया गया. डायलॉग के जरिए कई तीखे वार किए गए हैं. जब आप यह फिल्म देखेंगे तो आपको एहसास होगा की कई सवालों के जवाब तो हमें पता ही नहीं थे व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से पढ़ने वाले लोगों को भी यह फिल्म कई सवालों के जवाब देगी और सीख भी देगी की इंटरनेट पर मौजूद हर चीज सही नहीं होती. इस फिल्म को अगर पॉलिटिकल नजरिए से नहीं देखेंगे तो यह आरएसएस पर बनी एक शानदार फिल्म है. फिल्म थोड़ी ड्रैमेटिक भी है क्योंकि ये फिल्म है अगर ड्रामा नहीं डाला जाता तो ये डॉक्यूमेंट्री बन जाती. फिल्म के डायलॉग आपको काफी हिट करते हैं. कई जगह तो आपको ऐसा लगता है की डायरेक्टर यह सब दिखा कैसे सकते हैं. कुल मिलाकर यह फिल्म आरएसएस के बारे में कई चीजे बताती है. समझाती है दिखाती है.
एक्टिंग-संजय दत्त ने कमाल का काम किया है. वो प्रोफेसर के रोल में खूब जमे हैं अपने शिष्य से हारने का दुख उनकी आंखों में नजर आता है और साथ ही ये उम्मीद भी कि जब इसे इसके सवालों का जवाब मिल जाएगा तो उसे कितना बुरा लगेगा. नमाशी चक्रवर्ती ने शानदार काम किया है, वो संजय दत्त के आगे अच्छे से टिके, वो ये बता गए कि वो लंबी रेस के घोड़े हैं. अमित साध का काम बहुत जबरदस्त है. समीरा रेड्डी को इस तरह के रोल में देखना अच्छा लगा. यहां कोई ग्लैमर नहीं है लेकिन समीरा अपनी छाप छोड़ जाती है. नीतू चंद्रा का काम भी शानदार है
राइटिंग और डायरेक्शन-उत्कर्ष मैथानी की राइटिंग और रिसर्च बढ़िया है. अभिजीत मोहन वारंग का डायरेक्शन सटीक है. इस फिल्म की राइटिंग ही इसकी जान है. क्योंकि अगर राइटिंग दमदार ना होती तो यह कमजोर फिल्म होती
कुल मिलाकर आरएसएस के बारे में जानना चाहते हैं तो यह फिल्म देख सकते हैं
रेटिंग-3.5 स्टार्स



























