बच्चों का दिमाग 'बच्चा' ही होता है. अक्सर उन्हें रात में जो कुछ भी याद करवाओ, अगली सुबह उन्हें याद ही नहीं रहता. चाहें रात में बच्चों के साथ किया गया कोई वायदा हो या याद किया गया होमवर्क. स्कूल पहुंचते-पहुंचते उनके दिमाग से ज्यादातर चीजें गायब ही हो जाती हैं. लेकिन आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? 

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दरअसल, बच्चों का दिमाग में मेमोरी को याद रखने वाला हिस्सा पूरी तरह विकसित नहीं होता है. ऐसे में आइए जानते हैं वो तरीके, जिससे आप अपने बच्चे की मेमोरी और याद करने की क्षमता को बढ़ा सकते हैं. 

पूरी नींद न लेना:

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अच्छी नींद दिमाग को पढ़ी हुई बातों को याद रखने में मदद करती है, क्योंकि अच्छी नींद के दौरान दिमाग दिनभर सीखी हुई बातों को व्यवस्थित और मजबूत करता है. इसे मेमोरी कंसोलिडेशन (Memory Consolidation) कहते हैं. वहीं दूसरी ओर अगर बच्चा देर से सोता है या उसकी नींद पूरी नहीं होती, तो याद की गई चीज़ें जल्दी भूल सकती हैं.

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पढ़ाई के बाद मोबाइल चलाना

पढ़ाई के तुरंत बाद मोबाइल, टीवी या गेम खेलने से दिमाग का ध्यान दूसरी चीज़ों में चला जाता है, जिससे पढ़ा हुआ कमजोर पड़ सकता है. इसलिए बच्चों को तुरंत पढ़ाई के बाद मोबाइल न दें और ना ही गेम खेलने की इजाजत दें. आप कुछ समय बाद बच्चे को इसकी इजाजत दे सकते हैं.

तनाव या घबराहट

परीक्षा का डर या ज़्यादा तनाव होने पर बच्चे को याद की हुई बातें भी समय पर याद नहीं आतीं, क्योंकि जैसा की हम सभी जानते हैं कि परीक्षा का डर बच्चों के अंदर कितना ज्यादा होता है और फिर वो ही डर तनाव बनकर बाहर आता है जिस वजह से बच्चे अक्सर पढ़ा हुआ भी भूल जाते हैं

दोबारा पढ़ाई न करना

अगर बच्चा एक बार पढ़कर छोड़ देता है और वह दोबारा नहीं दोहराता है तो पढ़ा हुआ जल्दी भूल सकता है, क्योंकि याद रखने के लिए बच्चे को उस विष्य को समझना जरूरी होता है.

बच्चे की याददाश्त कैसे बढ़ाएं?

  • बच्चे को समझकर पढ़ने की आदत डालें.
  • रोज़ थोड़ा-थोड़ा रिविजन कराएं.
  • 8–10 घंटे की अच्छी नींद लेने दें.
  • पढ़ाई के बीच-बीच में छोटे ब्रेक दें.
  • पढ़ाई के बाद कुछ समय मोबाइल से दूर रखें.

क्या यह चिंता की बात है?

कभी-कभी सुबह पढ़ा हुआ भूल जाना सामान्य बात है. लेकिन अगर बच्चा बार-बार बहुत सी बातें भूलने लगे या रोज़मर्रा की चीज़ें भी याद न रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना सही रहेगा. साथ ही कोशिश कीजिएगा की बच्चे को डराए या धमकाएं नहीं क्योंकि उससे फिर बच्चे के दिमाग पर असर पड़ता है.

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