नई दिल्लीः आपने अक्सर सुना होगा गर्मियां हो या सर्दियां हमेशा सनस्क्रीन लोशन लगाकर ही घर से बाहर निकलना चाहिए. लेकिन क्या आप जानते हैं सनस्क्रीन भी आपको बीमार कर सकता है? जी हां, बाजार में बहुत से ब्रांड्स के सनस्क्रीन लोशन, जैल और क्रीम्स मौजूद हैं. लेकिन हर कोई आपके लिए नहीं है. जी हां, हर स्किन के हिसाब से अलग-अलग सनस्क्रीन होते हैं. आज हम आपको बता रहे हैं आपके लिए कौन सा सनस्क्रीन है परफेक्ट और गलत सनस्क्रीन का इस्तेमाल कैसे पहुंचा सकता है आपको नुकसान. पहले जानें ये बातें-
- सबसे पहले जानें अपनी स्किन टाइप. इसके साथ ही आपको ये जानना जरूरी है कि आखिर सनसक्रीन काम कैसे करता है. इसके मेकनिज़म को समझने की जरूरत है और कौन सा सनस्क्रीन आपको सूट करेगा.
- आपको ये जानना भी जरूरी है कि सनबर्न, यूवीए और यूवीबी के हार्मफुल इफेक्ट्स लंबे समय तक आपकी स्किन को डैमेज कर सकते हैं. कई बार ये स्किन कैंसर का भी रूप ले लेते हैं.
- सिर्फ टैनिंग ही सनसक्रीन लगाने का मेन कारण नहीं होना चाहिए. बल्कि स्किन को प्रोटेक्ट करना आपका पहला मकसद होना चाहिए.
- अक्सर आपने पढ़ा होगा कि सनस्क्रीन लगाने का बेस्ट तरीका क्या है? या फिर सनस्क्रीन कैसे आपको सनबर्न से बचा सकता है? लेकिन क्या आपने कभी पढ़ा है कि किस टाइप की स्किन पर कौन सर सनस्क्रीन लगाना चाहिए. सनस्क्रीन चूज करने से पहले आपको पूरी तरह से सनस्क्रीन क्रीम, जैल या लोशन को जांच-परख करनी चाहिए.
- सनस्क्रीन के बहुत ज्यादा इस्तेमाल और गलत इस्तेमाल से होने वाले साइड इफेक्ट्स के बारे में भी पता होना चाहिए.
इस तरह से चुनें परफेक्ट सनसक्रीन-
- सबसे पहले तो ये जाने लें कि सनस्क्रीन जब लंबे समय तक सन एक्सपोजर में होता है तो ये कई तरह से स्किन पर रिएक्ट करता है. कई बार इससे स्किन इश्यूज जैसे मेलेनोमा तक हो सकता है.
- ऑनलाइन पोर्टल ऑफ यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में पब्लिश रिपोर्ट के मुताबिक, सनस्क्रीन पर हुए तीन ट्रायल्स ये बताते हैं कि कई बार सन एक्सपोजर इतना ज्यादा होता है कि सनस्क्रीन क्रीम से टैनिंग तो कम नहीं होती लेकिन सनबर्न इससे बहुत ज्यादा हो जाता है. ये बढ़ा हुआ सनबर्न कई बार मेलेनोमा को बढ़ा देता हैं. ऐसे में सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते समय इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए.
- लोग सोचते हैं कि सनस्क्रीन लगाने से अब उनकी स्किन पूरी तरह सुरक्षित है और वे धूप में आसानी से निकल सकते हैं. लेकिन असल में ऐसा होता नहीं है. आपको सन एक्सपोजर में जाने से अधिक से अधिक बचना चाहिए.
- एक रिसर्च में SPF और सन प्रोटेक्शन फैक्टर का मेजर किया गया जिसमें देखा गया कि सनस्क्रीन कैसे स्किन को सन से डैमेज होने से बचाता है. लोग सोचते हैं कि SPF नंबर जितना हाई होगा स्किन उतनी ही अधिक प्रोटेक्ट होगी. लेकिन ये सच नहीं है SPF नंबर हाई होने से स्किन को अधिक प्रोटेक्शन नहीं मिलता.
- SPF हमेशा स्किन के हिसाब से चूज करना चाहिए. साथ ही ये भी माइंड में रखना चाहिए कि आप कितनी देर के लिए सन एक्सपोजर में रहने वाले हैं. SPF2-50% SPF4-75%, SPF10-90%, SPF15-93%, SPF30-97%, SPF50-98%, SPF70-98.5%, SPF100-99% तक यूवीबी रेज को ब्लॉक करता है.
- ऐसे में आपको ये देखने की जरूरत है कि आपको SPF100 की जरूरत है या नहीं. वैसे भारतीयों की स्किन टाइप के हिसाब से SPF15 से SPF50 तक बेस्ट माने जाते हैं. ये ना सिर्फ स्किन टैन से बचाते हैं बल्कि सन डैमेज से भी स्किन को प्रोटेक्ट करते हैं.
- दिल्ली की डर्मटालजिस्ट और ब्यूटी स्किन एक्सपर्ट डॉ. दीपाली भारद्वाज का कहना है कि ये भी मैटर करता है कि आप सनस्क्रीन को स्किन पर कैसे एप्लाई कर रहे हैं. अगर आप सन एक्सपोजर में निकलने वाले हैं तो 20 मिनट पहले स्किन पर सनस्क्रीन लगाएं. अगर आप दो घंटे से भी ज्यादा सन एक्सपोजर में है तो हर दो घंटे में सनस्क्रीन लगाएं. हाई SPF अपनाने से आपकी स्किन को नुकसान पहुंच सकता है.
- सनस्क्रीन का चयन करते समय ये भी ध्यान रखें कि वो वॉटर बेस्ड वैरिएंट हो क्योंकि क्रीम बेस्ड सनस्क्रीन से आपका फेस चिपचिपा लग सकता है. स्किन को फ्रेशनेस महसूस नहीं होगी. कई बार इससे पैच भी पड़ जाते हैं.