Vaishno Devi Yatra: नए साल के पहले दिन लोग मां दुर्गा का आशीर्वाद लेने के लिए मां वैष्णो देवी के दरबार में जाते हैं. जम्मू-कश्मीर में स्थित मां वैष्णो देवी हिंदुओं में सबसे ज्यादा पूजनीय देवी हैं. पूरे साल मां का दरबार भक्तों से गुलज़ार रहता है.

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भक्त अपनी सुविधा अनुसार वैष्णो देवी की यात्रा करते हैं लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा. श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने यात्रा नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. अगले साल आप भी अगर वैष्णो देवी जाने का प्लान बना रहे हैं तो पहले यात्रा के नए नियम जान लें.

वैष्णो देवी यात्रा के नए नियम

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नए नियम के अनुसार अब भक्तों को वैष्णो यात्रा 24 घंटे के अंदर पूरी करनी होगी. नए दिशानिर्देशों के अनुसार, RFID यात्रा कार्ड जारी होने के बाद श्रद्धालुओं को अधिकतम 10 घंटे के भीतर यात्रा शुरू करनी होगी और दर्शन के बाद 24 घंटे के अंदर कटड़ा बेस कैंप लौटना होगा. नए नियम सभी यात्रियों पर लागू होंगे फिर चाहे आप पैदल, हैलिकॉप्टर, पालकी या रोपवे से यात्रा करें. यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए एक नए नियम बनाए गए हैं, जो लागू हो चुके हैं.

वैष्णो देवी मंदिर आस्था का केंद्र

वैष्णो देवी का मंदिर अथवा भवन 14 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद आता है इस दौरान रास्ते में और भी कई दिव्य स्थल मौजूद हैं जिनका धार्मिक महत्व है. इनमें बाणगंगा, अर्द्धकुंवारी, सांझी छत शामिल है. ग्रंथों के अनुसार अर्द्धकुंवारी गुफा में मां ने कन्या रूप में 9 महीनों तक तपस्या की थी.

भैरव का शरीर है मौजूद

मां वैष्णो देवी के दरबार में प्राचीन गुफा का महत्व इसीलिए भी ज्यादा है क्योंकि कहा जाता है कि यहां भैरव का शरीर मौजूद है. कहा जाता है कि यहीं पर भैरव को मां नेअपने त्रिशूल से मारा था और उसका सिर उड़कर भैरव घाटी में चला गया और शरीर इस गुफा में रह गया था.

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