Uttrakhand Second Kedar Madmaheshwar Door Open: उत्तराखंड की देवभूमि में पंच केदारों में द्वितीय केदार के रूप में विश्व विख्यात भगवान मदमहेश्वर धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए श्रद्धा, आस्था और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच खोल दिए गए. हजारों फीट की ऊंचाई पर मखमली बुग्यालों के बीच बसे इस दिव्य धाम में कपाट खुलने के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला.

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खुले द्वितीय केदार मदमहेश्वर के कपाट

शुभ लग्न के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना शुरू हुई. वेद ऋचाओं, शंखनाद, घंटियों की गूंज और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच जैसे ही भगवान मदमहेश्वर के कपाट खुले, पूरा धाम भक्तिमय माहौल में डूब गया. इस पावन अवसर पर कुल 1135 श्रद्धालु कपाटोद्घाटन के साक्षी बने.

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श्रद्धालुओं ने भगवान मदमहेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की. कपाट खुलते ही संपूर्ण मदमहेश्वर यात्रा मार्ग और पड़ावों पर फिर से रौनक लौट आई है. स्थानीय व्यापारियों और यात्राओं से जुड़े लोगों में भी उत्साह का माहौल है.

नाभि स्वरूप में पूजे जाते हैं महादेव

मदमहेश्वर धाम की महिमा पूरे देश में अद्वितीय मानी जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान शिव के मध्य भाग यानी नाभि स्वरूप की पूजा होती है. यही कारण है कि यह धाम पंच केदारों में विशेष स्थान रखता है.

केदारघाटी में बाबा मदमहेश्वर को ‘न्याय के देवता’ के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा के दरबार में पहुंचने वाले भक्तों को न्याय और मनोकामनाओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यही वजह है कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु कठिन यात्रा तय कर इस दिव्य धाम तक पहुंचते हैं.

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