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Jyeshtha Month 2026: ज्येष्ठ माह में तुलसी चालीसा के पाठ से दूर होगी दरिद्रता, जानें पूजन की सही विधि

Jyeshtha Month 2026: ज्येष्ठ माह (6 मई- 20 जून 2026) में तुलसी चालीसा का पाठ व दीप दान सुख-समृद्धि लाता है. विष्णुप्रिया की सेवा से दरिद्रता दूर होती है और घर में लक्ष्मी का वास होता है.

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  • ज्येष्ठ माह में करें भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा।
  • नियमित तुलसी चालीसा पाठ से दूर होंगे वास्तु दोष।
  • तुलसी को जल दें, शाम को तिल तेल का दीपक जलाएं।
  • जेठ माह में तुलसी पूजन से मिलेगा धन और सुख।
  • आर्थिक लाभ, पारिवारिक शांति, करियर में तरक्की मिलेगी।

Jyeshtha Month 2026: सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह (Jyeshtha Month) का विशेष महत्व है. इस महीने में किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि कुंडली के ग्रह-दोषों से भी मुक्ति मिलती है. वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास की शुरुआत 2 मई 2026 से हो रही है, जो 20 जून 2026 तक चलेगा.

भगवान विष्णु की प्रिय और साक्षात 'वृंदा' स्वरूप तुलसी माता की पूजा इस महीने में अत्यंत फलदायी मानी गई है.

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ज्येष्ठ माह में तुलसी पूजा का महत्व

ज्येष्ठ का महीना सूर्य देव और भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित है. मान्यता है कि जिस घर में नियमित रूप से तुलसी जी की सेवा होती है, वहां मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का स्थाई निवास होता है. चिलचिलाती धूप और गर्मी के इस महीने में तुलसी के पौधे को हरा-भरा रखना सेवा भाव और संपन्नता का प्रतीक है.

तुलसी चालीसा पाठ के चमत्कारी लाभ

नियमित रूप से तुलसी चालीसा का पाठ करने से जीवन में निम्नलिखित सकारात्मक बदलाव आते हैं:

  • आर्थिक लाभ: गरीबी का नाश होता है और आय के नए स्रोत बनते हैं.
  • पारिवारिक शांति: घर के कलेश दूर होते हैं और सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है.
  • सकारात्मक ऊर्जा: घर की नकारात्मकता (Negative Energy) दूर होती है और वास्तु दोष कम होते हैं.
  • करियर में तरक्की: व्यवसाय और नौकरी में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं.

पूजन विधि: कैसे करें ज्येष्ठ में तुलसी पूजन?

ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में तुलसी जी की विशेष देखभाल और पूजा इस प्रकार करें:

प्रातः काल: स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें.

संध्या काल: शाम के समय तुलसी के पास तिल के तेल का दीपक जलाएं.

पाठ: दीपक जलाकर आसन पर बैठें और पूरी श्रद्धा के साथ तुलसी चालीसा का पाठ करें.

आरती: पाठ के अंत में मां तुलसी की आरती गाएं.

विशेष सावधानी: गर्मी के कारण पौधा सूखने न पाए, इसलिए समय-समय पर जल दें. हरा-भरा पौधा ही घर में खुशहाली लाता है.

.. श्री तुलसी चालीसा ..

(दोहा) श्री तुलसी महारानी, करूं विनय शिरनाय।।
जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।

(चौपाई)
नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।
दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।
विष्णुप्रिया जय जयति भवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।
भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।
जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।
करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।
कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।
तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।
कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।
वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।
श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।
कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।
छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।
तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।
औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता।
देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।
वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।
नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।
नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।
नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।
नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।
नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।
नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।
जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।
निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।
करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।
शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।
करहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।
मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।
जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।
बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।
प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।
चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।
करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।
पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।
यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।
करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।
है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।

इस पाठ को ज्येष्ठ के महीने में नियमित रूप से करना अत्यंत शुभ माना गया है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

हर्षिका मिश्रा, एस्ट्रोलॉजर

हर्षिका मिश्रा ABP Live में ‘ज्योतिष और धर्म’ बीट को कवर करने वाली एक डिजिटल पत्रकार हैं. ज्योतिष शास्त्र में 3 वर्षों के अनुभव के साथ, वे पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में समझाने और पाठकों तक सटीक एवं संतुलित जानकारी पहुंचाने पर काम करती हैं.

नई दिल्ली स्थित AIMC से ‘टेलीविजन और रेडियो प्रोडक्शन’ में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद, हर्षिका ने मीडिया जगत में अपनी एक विशिष्ट और प्रगतिशील पहचान बनाई है. पिछले एक वर्ष में उन्होंने ज्योतिष और धर्म से जुड़े विषयों पर निरंतर कार्य करते हुए एक स्पष्ट, सरल और भरोसेमंद लेखन शैली विकसित की है.

हर्षिका का कार्य पारंपरिक ज्योतिष को आज के समय की जरूरतों से जोड़ना है. वे वैदिक ज्योतिष, अंक ज्योतिष (Numerology), वास्तु शास्त्र और शकुन शास्त्र जैसे विषयों को केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उन्हें Gen-Z की सोच, करियर से जुड़े निर्णयों और रिलेशनशिप की समझ के साथ एकीकृत करती हैं. उनका फोकस जटिल ज्योतिषीय अवधारणाओं को सरल, व्यावहारिक और उपयोगी रूप में प्रस्तुत करने पर रहता है.

वे मानती हैं कि ज्योतिष का उद्देश्य भय फैलाना नहीं, बल्कि व्यक्ति को सही समय (Timing) की समझ देकर बेहतर और संतुलित निर्णय लेने में सक्षम बनाना है. अपनी स्क्रिप्ट लेखन और वीडियो प्रोडक्शन की समझ के जरिए वे ग्रहों के गोचर और धार्मिक विश्लेषणों को एक ‘प्रैक्टिकल गाइड’ के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जिससे पाठक उन्हें अपने जीवन में उतार सकें.

उनका लेखन श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत से प्रेरित है, जो जीवन में संतुलन और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है. ज्योतिष और पत्रकारिता के अलावा, हर्षिका की रुचि संगीत, साहित्य और यात्राओं में है, जो उनके दृष्टिकोण को गहराई और विविधता प्रदान करती हैं.

हर्षिका का उद्देश्य ज्योतिष को अंधविश्वास के दायरे से बाहर निकालकर एक समझदारीपूर्ण, व्यावहारिक और जीवनोपयोगी मार्गदर्शक के रूप में स्थापित करना है.

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Frequently Asked Questions

ज्येष्ठ माह 2026 में कब से कब तक रहेगा?

वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास की शुरुआत 2 मई से हो रही है, जो 20 जून 2026 तक चलेगा।

ज्येष्ठ माह में किसकी पूजा का विशेष महत्व है?

ज्येष्ठ माह में भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी माता की पूजा अत्यंत फलदायी मानी गई है।

तुलसी चालीसा पाठ के क्या लाभ हैं?

नियमित रूप से तुलसी चालीसा का पाठ करने से आर्थिक लाभ, पारिवारिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और करियर में तरक्की मिलती है।

ज्येष्ठ माह में तुलसी पूजन की विधि क्या है?

प्रातः स्नान के बाद जल अर्पित करें और संध्या काल में तिल के तेल का दीपक जलाकर तुलसी चालीसा का पाठ करें।

ज्येष्ठ माह में तुलसी के पौधे की विशेष देखभाल क्यों करनी चाहिए?

भीषण गर्मी के कारण पौधा सूखने न पाए, इसलिए समय-समय पर जल देना चाहिए। हरा-भरा पौधा घर में खुशहाली लाता है।

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