Thursday Tips: बृहस्पति ग्रह को देव ग्रह माना जाता है. नौ ग्रहों में बृहस्पति ग्रह को राजा माना जाता है. कहा जाता है कि कुंडली में गुरु ग्रह का कमजोर स्थिति में होना व्यक्ति की शादी में देरी का कारण बनता है. साथ ही, कई बार धन संकट जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है. वहीं, शिक्षा में आ रही बाधाएं, या फिर बार-बार कोशिशों के बाद भी सफलता हाथ नहीं लगती, तो ऐसे में किसी ज्योतिष को कुंडली में बृहस्पति की स्थिति जरूर दिखा लें. 

जानकारों की मानें तो गुरु ग्रह को बहुत ही शक्तिशाली ग्रह माना गया है. कमजोर गुरु व्यक्ति के जीवन में उथल-पुथल मचा देता है. अगर आप भी इनमें से किसी तरह की समस्या आ रही है, तो गुरुवार के दिन गुरु बृहस्पति से जुड़े कुछ उपाय कर लें. आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में. 

भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें

धार्मिक दृष्टि से गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है. ऐसे में जिन लोगों का गुरु ग्रह कमजोर होता है, गुरुवार के दिन उन लोगों को श्री हरि और मां लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन पूजन के दौरान पीले रंग के वस्त्र धारण करें और नारायण को गुड़-चने का भोग लगाएं. उन्हें पीले रंग के फूल, पीले कपड़े और पीला चन्दन अर्पित करें. अगर संभव हो तो इस दिन व्रत रखें और शाम को मीठा खाकर व्रत खोलें.  

वहीं, अगर व्रत नहीं रख सकते तो आप पूजन करके बृहस्पतिवार की व्रत कथा जरूर पढ़ें या सुनें. इस दिन केले के पेड़ का पूजन करें और जल अर्पित करें. ऐसा करने से गुरु की स्थिति मजबूत होती है और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. 

गुरुवार के दिन करें अन्य उपाय 

– प्रत्येक गुरुवार स्नान के समय पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करें. स्नान के बाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का 108 बार जाप करें.

– गुरुवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें. स्नान करें और भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं. इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. बेसन से बनी किसी मिठाई का भोग लगाएं.

– इस दिन पीली चीजों का दान करें जैसे चने की दाल, हल्दी, बेसन, सोना आदि. साथ ही, हर गुरुवार को गाय को आटे की लोई में गुड़ और चने रखकर खिलाएं.

– गुरुवार के दिन किसी को पैसों का दान देने से परहेज न करें. इस दिन बाल न धोएं और न काटें. इस दिन नाखून काटने से भी बचें. 

– बृहस्पतिवार के दिन इनमें से कोई एक गुरु मंत्र का जाप करें. 

ॐ बृं बृहस्पतये नमः

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:

ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:

ॐ गुं गुरवे नम:

ॐ क्लीं बृहस्पतये नम: 

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