Sawan 2026: सावन शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं. 30 जुलाई से श्रावण की शुरुआत होगी और 28 अगस्त तक शिव भक्त भोलेनाथ की सेवा में लीन रहेंगे. धार्मिक मान्यता है कि सावन में जो पति-पत्नी साथ मिलकर शिवजी की पूजा, अभिषेक करते हैं उनके वैवाहिक जीवम में सुख की कमी नहीं रहती है.

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सौभाग्य, संपत्ति, संतान आदि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. अगर आप भी सावन में महादेव का जलाभिषेक या रुद्राभिषेकर करते हैं तो वास्तु अनसुार जान लें कि शिव पूजा में पत्नी को पति के किस तरफ बैठना चाहिए, क्या है इसका महत्व.

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शिव पूजा के समय पत्नी को पति के दाईं या बाईं किस ओर बैठना चाहिए

शादी के बाद अधिकांश धार्मिक अनुष्ठानों में पति-पत्नी का एक साथ बैठकर पूजा करना शुभ माना गया है. पूजा, पाठ, हवन, यज्ञ, पितृ कर्म, विवाह आदि कई तरह की वैदिक परंपरा होती है जिसमें कुछ धार्मिक कर्मों में पत्नी पति के दाईं और तो कभी बाईं ओर बैठती हैं.

सावन में शिव पूजा के दौरान पत्नी को पति के किस तरफ बैठना चाहिए इसे ग्रंथों में बताए श्लोक से समझते हैं. संस्कार गणपति और कुछ पारंपरिक कर्मकांडीय ग्रंथों में श्लोक के अनुसार कन्यादाने विवाहे च प्रतिष्ठा-यज्ञकर्मणि। सर्वेषु धर्मकार्येषु पत्नी दक्षिणतः स्मृता॥ अर्थात - कन्यादान, विवाह, यज्ञ, देवपूजन, प्रतिष्ठा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पत्नी का स्थान पति के दक्षिण (दाईं) ओर बताया गया है.

इसका कारण यह माना जाता है कि धार्मिक कर्मों में पति-पत्नी संयुक्त रूप से यजमान दंपति के रूप में भाग लेते हैं, इसलिए वैदिक परंपरा में इन अवसरों पर पत्नी को दाईं ओर बैठाकर धर्मकर्म संपन्न कराया जाता है.

ऐसे में सावन में अगर पति-पत्नी साथ मिलकर रुद्राभिषेक या शिव जी की पूजा कर रहे हैं तो पत्नि पति के दाईं ओर बैठे.

पत्नी पति के बाईं ओर कब बैठती है?

वामे सिन्दूरदाने च वामे चैव द्विरागमने, वामे शयनैकश्यायां भवेज्जाए प्रियार्थिनी। आर्शीवार्दे अभिषेके च पादप्रक्षालेन तथा, शयने भोजने चैव पत्नी तूत्तरतो भवेत।।

संस्कार गणपति ग्रंथ के इस श्लोक अनुसार कुछ विशेष शुभ और पारिवारिक अवसरों पर पत्नी का स्थान पति के वाम (बाईं) ओर माना गया है. इनमें सिंदूरदान, भोजन, शयन, पति की सेवा और बड़ों से आशीर्वाद प्राप्त करते समय पत्नी को पति के बाईं ओर रहना चाहिए. जैसे अवसर शामिल हैं.

(FAQ)

Q 1. शिव पूजा में पत्नी को पति के दाईं ओर क्यों बैठाया जाता है?वैदिक परंपरा के अनुसार देवपूजन, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों में पति-पत्नी यजमान दंपति माने जाते हैं इसलिए पत्नी का स्थान पति के दाईं ओर बताया गया है.

Q 2. सावन में पति-पत्नी के रुद्राभिषेक का क्या फल मिलता है?धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम, आपसी विश्वास, सुख-समृद्धि और भगवान शिव-पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

Q 3. क्या रुद्राभिषेक के समय पति-पत्नी को एक जैसे रंग के वस्त्र पहनने चाहिए?शास्त्रों में ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है हालांकि, स्वच्छ और सात्विक वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ माना गया है.

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