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कुरियर से आई राखी टूटी मिले तो क्या उसे जोड़कर बांध सकते हैं? जानें परंपरा का सही नियम

रक्षाबंधन पर कई बार बहने किसी कारणवश भाई को राखी बांधने मायके नहीं जा पातीं ऐसे में वो राखी कुरियर कर देती हैं. अगर कुरियर के दौरान राखी टूटी मिले तो क्या वो कलाई पर बांधना चाहिए, क्या है नियम

रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा. राखी सिर्फ धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का प्रतीक मानी जाती है. कई बहनें दूरी या किसी दूसरे कारण से भाई के पास नहीं पहुंच पातीं, इसलिए पहले ही राखी कुरियर से भेज देती हैं लेकिन अगर पैकेट खोलने पर कुरियर के दौरान राखी टूटी हुई मिले, तो क्या उसे जोड़कर भाई की कलाई पर बांधा जा सकता है या नई राखी लेना जरूरी है?

धार्मिक परंपरा में रक्षा सूत्र को किस रूप में शुभ माना गया है और टूटी राखी को लेकर वास्तव में क्या नियम है. शुभ कार्य में साबुत और अक्षत वस्तु के प्रयोग की परंपरा को ध्यान में रखते हुए क्या करना बेहतर है, आइए जानते हैं.

कुरियर में टूटी राखी मिले तो क्या करें

अगर कुरियर से आने के दौरान राखी टूट गई है तो उसे जोड़कर बांधने की बजाय नई और साबुत राखी का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है. धार्मिक परंपरा में पूजा और शुभ कार्यों के लिए खंडित या टूटी वस्तु के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी जाती है.

कई बार बहने कुछ खास राखियां भाई को भेजती हैं इससे उनके इमोशन जुड़े होते हैं, अगर ऐसी राखी टूट जाए तो, धागा या सजावटी हिस्सा कुरियर के दौरान खराब हो जाए तो उसे सिर्फ सजाकर पूजा की थाली में रखा जा सकता है, लेकिन भाई की कलाई पर बांधने के लिए नई, साबुत राखी ले लें. इससे परंपरा भी बनी रहती है और मन में किसी तरह की शंका भी नहीं रहती.

टूटी राखी का क्या करें?

टूटी हुई राखी को कूड़ेदान में फेंकने के बजाय सम्मानपूर्वक अलग रखना उचित माना जाता है. कुछ परंपराओं में ऐसी राखी को पेड़ की जड़ के पास रखने या जल में विसर्जित करने की बात कही जाती है. ध्यान रखें आज के दौर में प्लास्टिक और धातु वाली राखियां चलन में हैं. ऐसी राखियों को नदी या किसी जलाशय में न डालें ये पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं इसलिए उन्हें साफ कपड़े में लपेटकर पूजा स्थान पर रखना बेहतर है.

FAQ

  1. क्या टूटी राखी को ठीक करके भाई को बांधना शुभ होता है?
    शुभ कार्य में साबुत वस्तु के इस्तेमाल की परंपरा है, इसलिए टूटी राखी को जोड़ने की बजाय नई राखी बांधना बेहतर माना जाता है.
  2. क्या राखी का धागा टूटने और पूरी राखी टूटने में कोई अंतर है?
    अगर राखी का केवल सजावटी हिस्सा अलग हुआ है और रक्षा सूत्र सुरक्षित है, तो स्थिति अलग हो सकती है. लेकिन धागा ही टूट गया हो तो नई राखी का इस्तेमाल करना उचित रहेगा.
  3. क्या बहन द्वारा भेजी गई टूटी राखी को पूजा में रखा जा सकता है?
    हां, भावनात्मक रूप से खास राखी को फेंकने की बजाय साफ कपड़े में रखकर सम्मानपूर्वक पूजा स्थान पर रखा जा सकता है.
  4. क्या नई राखी खरीदने से पहले टूटी राखी को जोड़ना जरूरी है?
    नहीं, टूटी राखी को जोड़ना कोई अनिवार्य धार्मिक प्रक्रिया नहीं है. भाई की कलाई पर बांधने के लिए सीधे नई और साबुत राखी का चयन करना बेहतर है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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