Raj Panchak April 2026: क्या आप जानते हैं कि 13 अप्रैल 2026 की सुबह आपके जीवन के अगले 5 दिनों का भाग्य तय करने वाली है? इस दिन न केवल भगवान विष्णु की प्रिय वरुथिनी एकादशी है, बल्कि इसी दिन से 'राज पंचक' की शुरुआत भी हो रही है. वैदिक ग्रंथ और ज्योतिष की गणना के अनुसार, जब एकादशी और पंचक एक साथ मिलते हैं, तो गगन मंडल में ऊर्जा का संतुलन पूरी तरह डगमगा जाता है.

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यदि आपने इन 5 दिनों में अनजाने में भी कोई वर्जित कार्य किया, तो सुख-समृद्धि के घर में 'दुख के बादल' मंडराने में देर नहीं लगेगी. आइए जानते हैं गरुड़ पुराण और प्राचीन संहिताओं के अनुसार इस समय के खौफनाक प्रभाव और उनसे बचने के वो अचूक तरीके जो आपकी ढाल बनेंगे.

13 अप्रैल: पंचांग का वो पन्ना, जो डरा भी रहा है और जगा भी रहा है!

पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल 2026, सोमवार को धनिष्ठा नक्षत्र और वरुथिनी एकादशी का मेल हो रहा है. यह कोई सामान्य तारीख नहीं है. ग्रंथों में इस संयोग को विशेष माना गया है. पंचांग के अनुसार-

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  • राज पंचक प्रारंभ: 13 अप्रैल, सोमवार को सुबह 03:44 बजे से शुरू होगा.
  • दोपहर 04:04 तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद शतभिषा नक्षत्र प्रभावी हो जाएगा.

सबसे बड़ी चेतावनी: लोग इस बात से खुश हैं कि 14 अप्रैल को खरमास खत्म हो रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि पंचक 17 अप्रैल दोपहर 12:02 तक आपका पीछा नहीं छोड़ेगा. इसका मतलब है कि शुभ कार्य चाहकर भी शुरू नहीं हो पाएंगे.

नक्षत्रों का 'खतरनाक जाल': जानें किस मोड़ पर खड़ा है आपका भाग्य?

पंचक के दौरान चंद्रमा 5 ऐसे नक्षत्रों से गुजरता है जो जीवन के अलग-अलग हिस्सों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' करते हैं. ज्योतिष के अनुसार इनका प्रभाव इस प्रकार है:

  1. धनिष्ठा नक्षत्र (अग्नि का खौफ): इस नक्षत्र के दौरान अग्नि का भय सबसे अधिक रहता है. शास्त्र कहते हैं कि इस समय घास, लकड़ी या कोई भी ईंधन इकट्ठा करना साक्षात आग को न्योता देना है.
  2. शतभिषा नक्षत्र (कलह का योग): यह नक्षत्र रिश्तों में जहर घोलने का काम करता है. इस दौरान बिना बात के ऐसे वाद-विवाद होते हैं जो कोर्ट-कचहरी तक पहुंच सकते हैं.
  3. पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र (बीमारियों का साया): इसे 'रोग कारक' नक्षत्र माना गया है. इस समय शुरू हुई बीमारी लंबे समय तक पीछा नहीं छोड़ती और शरीर को अंदर से खोखला कर सकती है.
  4. उत्तराभाद्रपद नक्षत्र (आर्थिक दंड): इस नक्षत्र में की गई छोटी सी लापरवाही भारी धन-हानि या कानूनी दंड (Penalty) का कारण बनती है.
  5. रेवती नक्षत्र (कंगाली की आहट): इस नक्षत्र में धन हानि की संभावना सबसे ज्यादा होती है. विशेषकर घर की छत डलवाना इस समय वर्जित माना गया है.

गरुड़ पुराण की खौफनाक चेतावनी

सबसे ज्यादा डराने वाली बात पंचक में होने वाली मृत्यु है. शास्त्रों और गरुड़ पुराण के अनुसार, इसे 'वंश अनिष्ट' माना गया है. ऐसी मान्यता है कि अगर इस समय शांति न की गई, तो उस परिवार या कुटुंब में 5 और मृत्यु का योग बन सकता है.

मृत्यु के समय करें ये 'महा-उपाय' (शास्त्रीय विधि):यदि किसी अपने की मृत्यु पंचक में हो जाए, तो अंतिम संस्कार से पहले यह विधि अपनाना अनिवार्य है. भूमि शुद्ध कर कुश (घास) और यव (जौ) के आटे से मनुष्य के आकार की 5 प्रतिमाएं बनाएं.  इन प्रतिमाओं पर लेपन कर 'प्रेतवाहाय नमः', 'प्रेतसखायै नमः' आदि मंत्रों से पूजन करें. 

प्रतिमाओं को रखने का स्थान भी जान लें, पहली प्रतिमा सिर पर, दूसरी दक्षिण पसलियों पर, तीसरी बांयी पसलियों पर, चौथी नाभि पर और पांचवीं पैरों पर रखें. इसके बाद ही शव का दाह संस्कार करें ताकि दोष वहीं समाप्त हो जाए.

शास्त्रीय पंचक शांति: मंत्र जो काल को भी टाल दें!

मृत्यु के दोष को पूरी तरह खत्म करने के लिए 11वें या 12वें दिन नदी तट या तीर्थ स्थान पर जाकर विशेष शांति करानी चाहिए.

नक्षत्रों के अनुसार शक्तिशाली वेद मंत्र:

  1. धनिष्ठा के लिए: ॐ वसुभ्यो नमः
  2. शतभिषा के लिए: ॐ वरुणाय नमः
  3. पूर्वाभाद्रपद के लिए: ॐ अजैकपदे नमः
  4. उत्तरभाद्रपद के लिए: ॐ अहिर्बुधाय नमः
  5. रेवती के लिए: ॐ पूषणे नमः

वरुथिनी एकादशी और राज पंचक: क्या करें और क्या नहीं? (Do's & Don'ts)

इस बार एकादशी और पंचक का दुर्लभ योग बन रहा है, इसलिए इन नियमों का पालन कर सकते हैं-

वर्जित कार्यहोने वाला नुकसान
दक्षिण दिशा की यात्रायह यम की दिशा है, यात्रा में दुर्घटना या भारी हानि का योग बनता है.
नई चारपाई या बिस्तरविद्वानों के अनुसार इससे कोई बड़ा संकट या मानसिक बीमारी आ सकती है.
घर की छत डलवानाविशेषकर रेवती नक्षत्र में ऐसा करने से घर में कभी लक्ष्मी नहीं टिकती और क्लेश रहता है.
नख और केश काटनाशास्त्र कहते हैं कि वर्षवृद्धि (जन्मदिन) या विशेष पर्वों पर बाल-नाखून काटना, मांस खाना और कलह करना वर्जित है.

सीक्रेट: क्या राज पंचक हमेशा बुरा होता है?

यहां एक सकारात्मक मोड़ भी है! सोमवार से शुरू होने के कारण इसे 'राज पंचक' कहा जाता है. यद्यपि मांगलिक कार्य वर्जित हैं, लेकिन जो लोग सरकारी नौकरी, राजनीति, प्रशासनिक कार्य या संपत्ति की डीलिंग से जुड़े हैं, उनके लिए यह समय उन्नति के द्वार खोल सकता है. बशर्ते आप वरुथिनी एकादशी का व्रत रखें और भगवान विष्णु की शरण में रहें.

अति विशेष: 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी पर 'मार्कण्डेय ऋषि' की प्रार्थना करना और दूध का सेवन करना आयु और आरोग्य की वृद्धि करता है.

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