SURAH IMRAN: कुरान के सूरह अल-इमरान की आयत 118 में कहा गया है कि, ऐ ईमान वालों, तुम्हें अपने अलावा किसी को अपना करीबी दोस्त या राजदार नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि वे तुम्हें नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ते और तुम्हें तकलीफ पहुंचाकर वह खुश होते हैं.

उनकी दुश्मनी उनकी मुंह से जाहिर हो जाती है और उनके दिलों में इससे भी गहरा छिपा हुआ दुश्मनी (बुग्ज) है. 

कुरान के बारे में जानेंकुरान इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रंथ है, जो मुसलमानों के अनुसार अल्लाह की वाणी है और इसे पैगंबर मुहम्मद पर उतारा गया था. इसमें जीवन जीने के तरीके और सही मार्गदर्शन दिए गए हैं. कुरान अरबी भाषा में है, इसमें 114 सूरह (अध्याय) और 6,236 छंद (आयत) हैं. इसे 30 भागों (जुज़) में बांटा गया है.

कुरान सभी मानवता के लिए एक मार्गदर्शन की किताब है, जो जीवन के हर पहलू, जैसे शादी, कारोबार, और सामाजिक व्यवहार के बारे में बताता है. कुरान में जिंदगी जीने का एक मुकम्मल तरीका बताया गया है, जिसमें व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के नियम शामिल हैं. कुरान में सच्चाई और मार्गदर्शन छिपा है, जिसे ईमान वाले अल्लाह से जुड़ने और अपना जीवन बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं,  

कुरान की सूरह 3 आयत 118 में क्या कहा गया है?कुरान की सूरा अल इमरान की आयत 118 में कहा गया है, "ऐ ईमान वालों अपनी जमात के अलावा दूसरों को अपना राजदार न बनाओ" क्या हैं कि वह आपकी तबाही चाहते हैं. उनकी दुश्मनी बाली बातें जाहिर होती है और वे दिल में ज्यादा बुराई छिपाते हैं. आयत यह भी कहती है कि अल्लाह ने स्पष्ट निशानियां दिखाते हैं ताकि लोग समझ सकें.

दूसरों से दोस्ती से बचेंयह आयत ईमान वालों को यह सलाह देती है कि वे अपने अलावा दूसरों को अपना करीबी दोस्त न बनाएं जिन्हें अपने राज की बात बता सकें या जिन पर पूरी तरह भरोसा कर सकें.

दुश्मनों का इरादावे जो लोग मुसलमानों के समुदाय से नहीं है, वे आपको नुकसान पहुंचाने या आपकी तबाही की कामना कर सकते हैं. 

दिलों में छुपा हुआ दुश्मनीउनकी दुश्मनी केवल बातों से नहीं, बल्कि उनके दिल में छिपी नफरत से और भी ज्यादा है. 

नुकसान पहुंचाने की कोशिशऐसे लोग जो आपके नहीं हैं, वे आपको नुकसान पहुंचाने में कोई कमी नहीं छोड़ते. 

कष्टों से खुशीवे हर उस चीज से प्रेम करते हैं जो आपको तकलीफ देती है. 

मुख से जाहिर दुश्मनीउनकी नफरत और दुश्मनी उनके बोलचाल से साफ दिखाई देती है. 

अल्लाह की हिदायतअल्लाह ने उन लोगों के निशान साफ-साफ बताएं है ताकि ईमान वाले समझदारी से काम लें और सही फैसला कर सके.

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