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हनुमान अंश के मेकर्स को प्रेमानंद महाराज की बड़ी चेतावनी, संतों के जीवन पर फिल्म बनाना पुण्य या अपराध?

Hanuman Ansh: हनुमान अंश फिल्म टॉक ऑफ द टाउन है. नीम करोली बाबा पर बनी इस फिल्म को बनाने से पहले इसके मेकर्स प्रेमानंद महाराज से मिले थे, महाराज जी ने उन्हें क्या चेतावनी दी थी, देखें वीडियो.

Hanuman Ansh, Premanand Maharaj: नीम करोली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों चर्चा में है. फिल्म के कम बजट में शानदार कलेक्शन करने की खबरों के साथ-साथ इसके बनने की कहानी भी लोगों का ध्यान खींच रही है. खास बात यह है कि फिल्म पर काम शुरू करने से पहले इसके मेकर्स प्रेमानंद महाराज से मिलने गए थे.

फिल्म की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद और मार्गदर्शन लिया था.इस दौरान महाराज ने उन्हें संत-महापुरुषों के जीवन को पर्दे पर उतारने को लकर कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी थी.

महापुरुषों पर फिल्म बनाना आसान नहीं

अनुप्रिया नागर ने प्रेमानंद महाराज से सवाल किया था कि क्या धार्मिक मार्ग पर रहते हुए किसी संत या महापुरुष के जीवन पर फिल्म बनाना भी सेवा का माध्यम बन सकता है? इस पर प्रेमानंद महाराज ने उन्हें समझाया कि महापुरुषों के जीवन का अनुकरण करना बेहद कठिन होता है. उनके अनुसार संतों के चरित्र को देखने या सुनने के बाद व्यक्ति के भीतर वैराग्य, भक्ति और ज्ञान का भाव पैदा होना चाहिए.

प्रेमानंद महाराज ने खास तौर पर मेकर्स को था चेताया कि फिल्म बनाते समय ऐसा कोई दृश्य, अभिनय या प्रस्तुति नहीं होनी चाहिए, जो महापुरुष के चरित्र की गरिमा के विपरीत हो. अगर ऐसा होता है तो धार्मिक चरित्र को मनोरंजन के लिए प्रस्तुत करने की कोशिश उल्टा अपराध का कारण बन सकती है.

'लोग देखें या न देखें पर हकीकत से समझौता न हो'

प्रेमानंद महाराज ने ये भी समझाया था महापुरुषों के जीवन को पर्दे पर दिखाते समय लोकप्रियता से ज्यादा जरूरी सत्य और प्रमाणिकता है. उन्होंने सलाह दी कि जिस संत के बारे में जितना पढ़ा और सुना गया है, उसे उसी भावना और मर्यादा के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास होना चाहिए. फिल्म में दर्शकों को आकर्षित करने के लिए ऐसा कुछ जोड़ना उचित नहीं होगा, जो महापुरुष के वास्तविक चरित्र या आध्यात्मिक संदेश से अलग हो.

अभिनय से पहले साधना क्यों?

प्रेमानंद महाराज ने कहा था कि अगर किसी महापुरुष का चरित्र निभाना है तो केवल बाहरी रूप रंग और अभिनय पर्याप्त नहीं है. इसके लिए व्यक्ति को कुछ समय तक सात्विक जीवन, फलाहार, संतों का संग और धार्मिक चरित्रों के अध्ययन जैसी जीवनशैली अपनानी चाहिए. 

महाराज के मुताबिक जब तक कलाकार स्वयं संतों के जीवन और उनके भाव को समझने का प्रयास नहीं करेगा, तब तक अभिनय में वो आध्यात्मिक सत्यता पूरी तरह नहीं आ सकती. 

महापुरुष पर फिल्म बनाना पुण्य या अपराध

हनुमान अंश फिल्म के मेकर्स ने प्रेमानंद महाराज की इन बातों को गंभीरता से लिया और शूटिंग से लेकर फिल्म की समाप्ति, प्रमोशन तक में इनका पालन किया. इस पूरी घटना से एक बड़ा सवाल भी सामने आता है क्या संतों और महापुरुषों के जीवन पर फिल्म बनाना पुण्य या अपराध है. 

प्रेमानंद महाराज की चेतावनी का सार यही माना जा सकता है कि महापुरुषों की कहानी को पर्दे पर उतारना केवल अभिनय नहीं, बल्कि श्रद्धा, साधना और जिम्मेदारी का काम है. नियमों का पालन करते हुए इसे जारी किया जाए तो ये पुण्य की श्रेणी में आ सकता है लेकिन महापुरुष की छवि या उनके जीवन की सत्यता से खिलवाड़ अपराध माना जाता है.  

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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