Adi Kailash Yatra 2026: सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में स्थित पावन आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा इस वर्ष सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है. देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यात्रा शुरू होने के मात्र 39 दिनों के भीतर ही पिछले साल का एक बड़ा रिकॉर्ड ध्वस्त हो गया है.

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प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष महज 39 दिनों में ही पिछले पूरे यात्रा सीजन से अधिक इनर लाइन परमिट जारी किए जा चुके हैं.

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पिछले साल का रिकॉर्ड मात्र 39 दिनों में ध्वस्त

पिथौरागढ़ जिला प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, यात्रा को लेकर इस बार श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व क्रेज देखने को मिल रहा है:

  • वर्ष 2025 (पूरा सीजन): कुल 36,526 इनर लाइन परमिट जारी किए गए थे.
  • इस वर्ष (मात्र 39 दिन): अब तक 36,776 से अधिक परमिट जारी हो चुके हैं.

यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा अब देश के प्रमुख धार्मिक और साहसिक पर्यटन केंद्रों में शुमार हो चुकी है. देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और ट्रेकर्स लगातार पिथौरागढ़ पहुंच रहे हैं.

बेहतर सुविधाएं और सरल परमिट व्यवस्था बनी टर्निंग पॉइंट

पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई के अनुसार, यात्रा की इस सफलता के पीछे बुनियादी ढांचे में सुधार एक बड़ी वजह है. जिला प्रशासन का कहना है कि:

"बेहतर सड़क संपर्क (Road Connectivity), बेहद सरल की गई ऑनलाइन व ऑफलाइन परमिट व्यवस्था और यात्रियों के लिए बढ़ाई गई सुविधाओं का जमीन पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है. प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा और सुगम यात्रा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है."

पीएम मोदी के दौरे के बाद बढ़ा आकर्षण

स्थानीय जानकारों और अधिकारियों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे के बाद से इस पूरे क्षेत्र की लोकप्रियता में वैश्विक स्तर पर उछाल आया है. इसके साथ ही उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही पर्यटन प्रोत्साहन योजनाओं ने आग में घी का काम किया है, जिससे इस सुदूर सीमांत क्षेत्र को एक नई पहचान मिली है.

स्थानीय अर्थव्यवस्था और होमस्टे को मिला बड़ा बूस्ट

आदि कैलाश यात्रा के इस नए रिकॉर्ड से केवल पर्यटन विभाग ही नहीं, बल्कि स्थानीय जनता भी बेहद उत्साहित है. पर्यटकों की इस भारी आमद का सीधा लाभ सीमांत क्षेत्र के आर्थिक विकास को मिल रहा है:

  • होमस्टे और होटल व्यवसाय: स्थानीय गांवों में बने होमस्टे पूरी तरह पैक चल रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की आय बढ़ी है.
  • परिवहन और गाइड: स्थानीय टैक्सी ऑपरेटरों, घोड़े-खच्चर स्वामियों और गाइडों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिल रहा है.
  • स्वरोजगार: स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पहाड़ी व्यंजनों की मांग में तेजी आई है.

आस्था, रोमांच और अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र बने आदि कैलाश और ओम पर्वत की ओर बढ़ता यह रुझान उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था के लिए एक शुभ संकेत है. प्रशासन को उम्मीद है कि यदि यात्रा की यही रफ्तार रही, तो इस वर्ष के अंत तक श्रद्धालुओं की कुल संख्या एक ऐसा ऐतिहासिक आंकड़ा छुएगी, जिसे पार करना आने वाले कई सालों तक एक चुनौती होगा.

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