Viral Video: एक व्यक्ति ने पंडित जी से सवाल किया कि, ये जो ग्रह है हमारे सूर्य, चंद्रमा, राहु ये बार-बार क्यों खराब हो जाते हैं. इस पर उन्होंने साधारण लेकिन सटीक जवाब दिया.

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पंडित जी ने कहा कि, ग्रह शरीर से प्राप्त हुआ है और शरीर माता-पिता से प्राप्त हुआ है. पिता सूर्य है और माता चंद्रमा. सारे ग्रहों की शक्तियां सूर्य-चंद्रमा से प्राप्त होती हैं. आप घर के ग्रहों को तो पूछ नहीं रहे और बाहर जा जाकर सोच रहे कि सारे ग्रह शांत हो जाए. यहां पूजा करा लो वहां पूजा करा लो. पंडित जी कहते हैं कि, कोई जरूरत नहीं है कहीं पूजा कराने की. अगर आप अपने माता-पिता को प्रणाम कर लेते हैं तो और उनकी सेवा करते हैं तो सारे ग्रह वैसे ही शांत हो जाते हैं.

यदि आप घर के माता-पिता को नहीं पूछ रहें और बाहर जाकर खूब दान-पुण्य कर रहे हैं तो इसका कोई लाभ नहीं. मंदिर-गुरुद्वारे जाने का भी लाभ नहीं. सबसे पहले भगवान माता-पिता हैं. जिसने मां-पिता की सेवा कर ली, उसने सबकुछ जीत लिया. अगर माता-पिता की सेवा नहीं कर सकते तो सारे दान व्यर्थ हैं. ब्रह्मांड की तीन परिक्रमा के बजाय भगवान गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा कर ली थी, इसलिए वे प्रथम पूज्य हैं.

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कैसे कर सकते हैं माता-पिता को खुश

यह प्रश्न पूछने पर पंडित जी कहते हैं कि, उन्हें तीर्थ लेकर जाएं. माता पिता से पूछे कि उन्हें क्या खाना है कहां जाना और क्या चाहिए. हम अपने माता-पिता के साथ समय बिताएं तो अनुभव प्राप्त होगा.

हमारा असली कर्म क्या है

"प्रातःकाल उठि कै रघुनाथा, मातु पिता गुरु नावहिं माथा"

रामचरितमानस की चौपाई के अनुसार, भगवान श्री राम सुबह उठकर सबसे पहले माता, पिता और गुरु के चरणों में मस्तक नवाते हैं. माता-पिता और गुरु की सेवा से सारे ग्रह और पूर्वज भी खुश रहते हैं. सारे ग्रह को यदि संतुलित नहीं कर सकते तो सूर्य-चंद्रमा को जरूर मजबूत रखें, क्योंकि ये सभी ग्रह के केंद्र है.

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