Nirjala Ekadashi 2022 Dan Importance: हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, निर्जला एकादशी व्रत, सभी एकादशी व्रतों में सबसे महत्वपूर्ण और कठिन व्रत माना जाता है. इस पूरे व्रत में कुछ भी खाया-पिया नहीं जाता है. पूरे व्रत में एक भी बूंद जल ग्रहण नहीं किया जाता है. व्रत के अगले दिन यानी व्रत का पारण करके ही जला ग्रहण करना चाहिए. ब्राह्मणों और गरीब लोगों को भोजन करने के बाद ही कुछ भी खाना चाहिए. 

निर्जला एकादशी व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादाशी तिथि को रखा जाता है. इस समय बहुत तेज गर्मी पड़ती है. लोगों को जल की अधिक जरूरत पड़ती है. इस एकादशी व्रत में शीतलता प्रदान करने वाली चीजों को दान करने का खास महत्व है. कहा जाता है कि इस दिन शीतलता प्रदान करने वाली चीजों को दान देने से सभी मनोकामना पूरी होती है.

निर्जलाएकादशीव्रतमेंकरेंजूतोंकादान

निर्जला एकादशी व्रत के दिन जूतों का दान करना उत्तम माना जाता है. इसके अलावा गरीब, जरूरतमंद ब्राह्मणों को  अन्नदान, छाता दान, बिस्तर दान, वस्त्र दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. इस दिन चाहें तो आप चने और गुड़ का भी दान कर सकते हैं. यह भी बहुत शुभ फलदायी होता है.

निर्जलाएकादशीव्रतमेंकरेंतुलसीपूजन

निर्जला एकादशी व्रत में तुलसी के पेड़ के पास घी का दीपक जलाना चाहिए. ऐसा करने से घर में धन, यश और वैभव बना रहता है. नौकरी और व्यवसाय में प्रगति होती है.

 

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